00:00द्रिश्यम ने कैसे बना दिया दो उक्तोबर को पॉप कल्चर का हिस्सा हम सभी बच्पन से दो उक्तोबर को गांधी
00:05जैनती की तौर पर मनाते आये हैं लेकिन पिछले लगभग एक दशक से इस तारीख का एक नया संस्कृतिक आर्थ
00:11भी बन गया अब दो उक्तोबर आते ही
00:13गांधी जैनती की साथ पंड़जी की यात्रा सचसंग और पावभजी की याद आने लगती है इसका कैरान है दृश्यम फेंचाइजी
00:19फिल्म में अजे सलगाउंकर की कहानी और उसका बार बार दोराया गया दावा दो अक्तोबर को पंड़जी जाना सचसंग सुनना
00:27और प
00:41पाहनी गरना भी है सोशल मीडिया और ब्रैंट्स ने भी स्लोक ब्रेता को आगे बढ़ाया फूड और डिलिवरी प्लेटफॉर्म से
00:47लेकर सिनेमा घरों तक कई जगों पर पावभाजी और दृश्यम के संदर्णों का इस्तमाल हुआ एक तरफ दो अक्टूबर महत्मा
00:52गा
00:57गाउंकर की कहानी जूट परिवार और नैतिक दुविधा की सवाल उठाती है शायद यही विरोधाभास दृश्यम को पॉप कल्चर का
01:04हिस्सा बनाता है