00:00खुश आमेदीद, आज हम एक जबरदस ट्रेंड पर बात करने वाले हैं.
00:04आपने भी गौर किया होगा कि आजकल हम सब वापस उन खालिस और रिवायती खानों की तरफ लोट रहे हैं,
00:11है न?
00:11सुपर मार्किट्स की शल्फ्स पर रखे डबों वाले, केमिकल से भरे खानों से अब लोग उकता चुके हैं, हमें वही
00:18पुराने घर वाले जाईके चाहिए जो हमारी सखाफत की पहचान हैं, तो चलिए देखते हैं कि मार्किट्स से लेकर हमारे
00:25किचन और फिर फूड साइंस
00:27तक इन हाथ से बने खालिस खानों की वापसी कैसे हो रही है।
00:58तो शिरुआत करते हैं हमारे पहले हिसरे से रिवायात की तलब।
01:27भूक मिटाती है बलकि दुनिया की मुख्तलिफ सकाफतों को आपस में जोडने का काम भी करती है।
01:32अब जरा इस मवाजने को देखें एक तरफ वो खाने हैं जो फैक्टरियों में बनते हैं जिन में मसनुई रंग,
01:38शेल्फ लाइफ पढ़ाने वाले केमिकल्स और बिलकुल एक जैसे बोरिंग मशीनी जाईके होते हैं।
01:43और दूसी तरफ है हमारे आर्टिसनल या घरेलू तरस के खाने। इन में खालिस कुदरती अज़ा होते हैं, सद्यों पुराना
01:50रवायती विर्सा होता है और ये सिहत के लिए भी पहतरीन होते हैं।
01:53और सच पूछें तो, आजकल हर बाशोगर इनसान बिलकुल इसी खालिस पन की तलाश में है।
02:23जिर्फ एक अचार बेचने का तरीका नहीं है, बलके केमिकल से पाक रिवायती खानों का एक जबरदस्त और मॉडरन बिजनस
02:30मॉडल है।
02:31आखिर ये आर्टिसनल मसनुआद सूपर मार्केट के आम ब्रैंड्स से इतनी मुखतलिफ क्यों होती हैं।
02:36इसके चार बड़ी वजुहात हैं।
02:38सबसे पहले तो ये सिहत के लिए बेहतरीन हैं, क्योंके इन में कोई मसनुई केमिकल नहीं होता, सिर्फ कुदरती मसाले
02:45होते हैं।
02:45दूसरा, इनका जाइका बिलकुल मुस्तनद और घर जैसा होता है।
02:50तीसरा, आज की मसरूफ जिन्दगी में एक जबरदस सहूलत है कि आपको खाने के लिए हर वक्त तयार खालिस खिजा
02:56मिल जाए।
02:57और चोथा, पाएदारी, ये छोटे पैमाने पर लोकल अजज़ा से तयार होते हैं, जिससे हमारे माहुल को भी कोई नुकसान
03:04नहीं पहुशता।
03:05अब मार्किट से निकल कर सीधा किचन का रुख करते हैं।
03:09नारा तीसरा हिस्सा सिकून बख्ष पकवान, रिवाएती मुझद्धरा
03:13क्या आपने कभी मुझद्धरा ट्राई किया है?
03:16ये लुबनान और मशरे के वुस्ता की एक इनतहाई मशूर और रिवायती डिश है।
03:21ये बुन्यादी तोर पर भूरी दाल और चावल से बना एक ऐसा शानदार पुलाव है जो खा कर बस रुह
03:27को सुकून मिल जाता है
03:28और सबसे कमाल की बात बताओं ये सौ फीसद वेडिन है प्रोटीन और फाइबर से भरा हुआ है और इसे
03:34बनाने के लिए आपको कोई खास चीज़े नहीं चाहिएं ये आम किचन के अज़सा से ही बन जाता है किसी
03:40भी आम दिन के डिनर के लिए ये एक परफेक्ट चॉइस है
03:58प्यास की जैतून के गरम तेल में कटी हुई प्यास को तकरीबन 18 से 22 मिनिट तक फ्राई करना है
04:04यहां तक है वो बिलकुल गहरे नारंजी रंकी हो जाएं फिर जब इस गरम तेल में चावल शामल किये जाते
04:09है न तो वो जो हलकी सी चटखने की आवाज आती है कमाल है आखि
04:25चिद्रा की असल जान उसके जाइकों का बैलिंस है वो मिटी की सौंधी खुश्बू जैसी भूरी दाल और सफैद बासमती
04:32चावल का जबरदस कॉम्बिनेशन और उस पर जीरा, धनिया, ओल स्पाइस और दारचीनी जैसे गरम मसालों का जादू और सबसे
04:39दिल्चस्प ची
04:55हमारे चौते हिस्से की तरफ फौरी जाई के सिंधी अचार
04:59मदरा जैसे पलाओ के साथ अगर ये तेज और खटा सिंधी प्याज का अचार मिल जाए तो यकीन करें खाने
05:05का मज़ा डबल हो जाता है और इसे बनाना बहुत ही असान है
05:09सबसे पहले छोटी सफेद प्याज को एक घंटे के लिए पानी में भिगो दें ताकि उसकी वो तेज चुबने वाली
05:16भू निकल जाए
05:16फिर इसमें कुटी हुई राई, हल्दी का वो खुबसूरत पीला, रंग, लाल मिर्च, सिर्के की तेजी और थोड़ा सा सरसो
05:24का तेल मिला ले और बस इसे दो दिन के लिए कमरे के दरजा रहारत पर खमीर होने के लिए
05:29छोड़ दें
05:30एस चार की सबसे हिरान कुन बात पता है क्या है? वो है कुदरती फर्मेंटेशन, यानि खमीर उठने का जादू.
05:37मसाले मिलाते वक्त, इसमें पानी का एक कत्रा तक नहीं डाला जाता. लेकिन सिर्फ दो दिन बाद, प्याज अपना कुदरती
05:44पानी खुद चोड़ती है, ज
05:57पाते हैं अपने पाँचवे हिस्से की जानिब, महफूज रखने की साइंस. अब आपके जहन में एक सवाल तो जरूर आ
06:04रहा होगा, कि अगर इन खानों में केमिकल्स नहीं होते, तो ये इतने अर्से तक महफूज कैसे रहते हैं? अब
06:09इस स्लाइड की सबसे दिल्चस बात
06:27बैक्टीरिया को रुकती है, जिससे अचार एक से दो साल तक चल जाता है, और खालिस नमक वाला अचार भी
06:32छे से बारा महिने तक महफूज रहता है. ये कुदरती अज़ा, कुदरती तौर पर ही बैक्टीरिया के खिलाफ एक मजबूट
06:39ढाल का काम करते हैं. अगर आप भी
06:41इन चीजों की शेल्फ लाइफ पढ़ाना चाते हैं, तो माहरीन की कुछ इंतहाई एहम टिप्स याद रखें. सबसे पहली बात
06:49तो पले बांध लें, कि नमी दर असल अचार की सबसे बड़ी दुश्मन है, इसलिए हमेशा बिलकुल खुश्क और साफ
06:55चमच इस्तमाल करें
07:08प्लास्टिक या धात बिलकुल नहीं और आखिर में उन्हें किसी ठंडी और खुश्क जगा पर रखें. ये वो साइंसी उसूल
07:15हैं जिन पर हमारी दादी नानिया सदियों से अमल करती आ रही हैं. और अब हम पहुँच चुके हैं अपने
07:21आखरी हिस्से पर, घरेलू खानो
07:52का मस्तक्बिल.
07:53आज की इस गुफटगू के इखताम पर मैं आपको एक एहम सवाल के साथ छोड़े जा रहा हूँ. जरा सोचिए,
07:59आपके अपने खानदान की तारीख में ऐसी कौन सी खास रिवायती तरकीब है जो इस बात की हगदार है कि
08:05उसे भुलाया ना जाए? कोई ऐसी खास तरकीब �
08:09जिसे अगली नसल तक पूरे फखर के साथ मुंतकिल होना चाहिए या शायद एक शानदार ब्रैंड के तौर पर मार्किट
08:14में लाया जाना चाहिए? रिवायात को जिन्दा रखने का ये सफर हमारे अपने किचिन से ही शुरू होता है. तो
08:20क्यों ना पुरानी डैरियों को ख
08:23ये आफ़ किया जाए.
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