00:00इस वजाहती जाइजे की शुरुआत करते हैं आज हम एक ऐसी जगा की बात कर रहे हैं जो महज एक
00:05लकीर या सरहद नहीं है बलकि पाक भारत तालुकात के उतार चड़हाओ को मापने का एक जीता जागता बैरोमीटर है
00:13जी हाँ अटारी वागा बॉर्डर एक ऐसी जगा जहा
00:28की जोगराफियाई और सियासी तारीख की अकासी कैसे कर सकता है असल में ये आम सी नजर आने वाली गुजरगा
00:35अपने अंदर दहाईयों के रापतों तनाजाआत और एक बहुत ही मुनजम रिवायती मुसाबकत की पूरी कहानी समेटे हुए है ये
00:44सिर्फ एक बॉर्डर नह
00:57हाँ देखने को मिलता है यहां जिकर हो रहा है मशूर बीटिंग रिट्रीट तकरीब का 1959 से हर रोज सूरज
01:04गरूब होने से जरा पहले इंडियन बॉर्डर सेक्यारिटी फोर्स और पाकिस्तान रेंजर्स के जवान ये शानदार परेड करते हैं इसमें
01:11होता क्या है इंतहा�
01:26हटने नहीं देता अब इस तकरीब का सबसे दिल्चस पहलू इसका दोहरा मियार या मुतजाद रवईये हैं जरा गोर कीजिए
01:34एक तरफ तो इंतहाई जारहाना अदाकारी चल रही होती है जिसमें जोरदार जंगी नारे बूटों की धमक और एक दूसरे
01:41को घोरने के मनाज
01:54का तबादला ये शांदार मवाजना बताता है कि बजाहर दिखावे की दुश्मनी के साथ-साथ सकाफती खेर सगाली भी कैसे
02:02कंदे से कंदा मिला कर जलती है अब बढ़ते हैं इस बॉर्डर के एक और एहम पहलू की तरफ यानि
02:08एक ऐसा दर्वाजा जो रापते का सबब ब
02:23मतलब है कोई मुआहिदा या मुफाहमत और उमूमन इससे मुराद वो इत्फाकिराय है जो बाहमी रजामंदी और कुछ लो और
02:32कुछ दो की बुनियाद पर हो
02:341976 में शुरू होने वाली मशूर जमाना ट्रेन का नाम भी यही रखा गया था
02:39जब भी सिफारती हालाथ थोड़े बहतर होते हैं तो इस ट्रेन का ये नाम दोनों मुलकों के दर्मियान मुफाहमत के
02:46इसी जजबे की तरजुमानी करता है
02:48अमली तोर पर ये रापता कैसे काम करता रहा है इसके दो एहम सतून है
02:53एक तरफ तो समझोता एक्सप्रेस थी जो दिल्ली और लाहॉर के दर्मियान हफते में दो बाग चलने वाली मुसाफिर ट्रेन
03:00थी
03:00और दूसरी तरफ 2010 का आपटा तिजारती मुहायदा है
03:04इस मुहायदे ने अफगानिस्तान जैसे खुश्की में घिरे मुल्क के ट्रकों को वागा के रास्ते भारत तक अपना समान पहुचाने
03:11की अजाज़त दी
03:12यानि ये सरहद सिर्फ आम लोगों को मिलाने का ही नहीं बलके इलाकाई मैशत को चलाने का भी एक इंतहाई
03:19एहम पूल रही है
03:20लेकिन तस्वीर का एक तारीख रुख भी है
03:22आईए अब हकीकी कशीदगी और तशद्द के उन तल्ख हकाईक की बात करते हैं जो इस सरहद ने देखे हैं
03:29अगर हम सरहदी बंदिश की इस टाइम लाइन पर नज़र डालें तो सूरत इहाल शीशे की तरह साफ हो जाती
03:35है
03:351965 और 1971 की जंगे हों, 1999 में कारगिल की पाबंदियां, 2001 में भारती पार्लिमेंट पर हमले के बाद की
03:43मौतली, 2019 का पुलावामा वाक्या हो या फिर बिलकुल हाल ही में 2025 में पहल गाम हमले के बाद की
03:50बंदिश
03:50ये पूरी हिस्ट्री हमें बताती है कि जब भी मजमुई तोर पर कौमी सता पर कशीदगी बढ़ती है, तो सबसे
03:57पहले और कितनी तेजी से इन राप्ते के दर्वाजों को बंद कर दिया जाता है
04:01और सच तो ये है कि इस कशीदगी की कीमत बहुत भारी रही है
04:05फरवरी 2007 की वो अलमनाक सुभा कौन भूल सकता है जब बराहे रास्त इन ही सफरी रास्तों को निशाना बनाया
04:13गया
04:14दहली अटारी एक्सप्रेस जिससे समझोता एक्सप्रेस भी कहा जाता है उसमें एक हौलनाक बंधमाका हुआ जिसमें सत्तर जाने जाया हो
04:22गई
04:22इन में जादतर तादाद आम पाकस्तानी शहरियों की थी ये हिंदसा चीख चीख कर बताता है कि ये राप्ता काईम
04:29रखना कभी भी खतराद से खाली नहीं रहा
04:32और सिर्फ सफर के दौरान ही नहीं बलकि पुरमन समझी जाने वाली परेड के मैदानों में भी हकीकी खुनरेजी देखी
04:39गई है
04:40नुमेंबर 2014 में तकरीब के फौरण बाद पाकस्तानी हुदूद में एक इंतहाई दर्दनाग खुदकुश हमला हुआ जिसमें 60 से जादा
04:48लोग अपनी जान से हाथ धो बैठे
04:49ये दिल देहला देने वाले वाटियाद बताते हैं किस रोजमर्रा की अलामती महाजाराई के बीचों बीच हकीकी शिद्ध पसंदी किस
04:57कदर तबाकुन और भयानक थाबत हुई है
05:00अब आ जाते हैं आज के दौर पर
05:02मौझूदा सूर्तेहाल क्या है और 2025 में ये सरहत कैसी नजर आती है
05:07साल 2025 तक इस जगा पर जबर्दस तब्दीलियां लाई गई है
05:12Grand Arena को इतना बड़ा कर दिया गया है कि अब वहाँ एक वक्त में 25,000 लोग बैठ सकते
05:18हैं
05:18तकसी में हिंद की यादों को ताजा रखने के लिए एक नया रेलवे स्टेशन थीम पाक बनाया गया है
05:24और तो और जुनूबी एशिया का सबसे बुलंद 149 मीटर उंचा जंडा नस्प किया गया है
05:30और बिलकुल लाहोर किले की तर्स पर एक बहुत बड़ा दर्वाजा तामीर किया गया है
05:35ये भारी सरमाया कारी इस बात का सुबूत है कि इस रोजमर्रा के तमाशे को मजीद अजीम शान बनाने की
05:41कितनी जबरदस्ट खौाइश मوجود है
05:43मगर ठहरी ये यहां एक बहुत बड़ा तज़ाद है
05:47इतनी शानदार और नई तामीरात के बावजूद ये मकाम आज भी पूरी तरह से जोगराफियाई और सियासी हालात के रहमो
05:55करम पर है
05:55मैई दो हजार पच्चिस की गेर जानिबदाराना रिपोर्ट्स बताती है
06:00कि पहल गाम हमले और उसके बाद की कशीदगी की वज़ा से रोजाना की ये परेड और हर किसम की
06:06आमिद और रफ्ट गेर मौयना मुदद के लिए रोग दी गई
06:08जरा सोचें एक तरफ इतना पैसा लगा कर तमाशाईयों की गुंजाईश बढ़ाई जा रही है
06:14और दूसरी तरफ हालात की जरा सी खराबी इस पूरी जगा को एक ही लम्हे में वीरान कर सकती है
06:20इस तमाम तर जाइजे के बाद अब सिर्फ एक ही सवाल जहन में रह जाता है
06:24क्या अटारी वागा की ये दरवाजे हमेशा के लिए एक मुस्तकिल रुकावट बन कर रह जाएंगे
06:29या फिर क्या कभी ये दो एटमी टाकतों के दर्मियान एक देर पाप पुल का किरदार भी अदा कर पाएंगे
06:36इस सरहत की असल कहानी बस इसी एक सवाल के गिर्द घूमती है
06:40इसका हत्मी जवाब तो शायद आने वाला वक्त ही दे
06:43मगर ये जरूर सोचने पर मजबूर कर देता है कि तारीक केस एहम तरीन मोड का अगला बाप क्या होगा
06:48इस वजाहती जायजे में साथ रहने का शुक्रिया
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