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US Iran Sanctions Update: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही महा-शांति वार्ता के बीच आखिर 1,224 से ज्यादा प्रतिबंधों का क्या होगा? 1979 की इस्लामी क्रांति से शुरू हुई इस 47 साल पुरानी दुश्मनी के खत्म होने से भारत पर क्या असर पड़ेगा, देखिए यह खास रिपोर्ट।
मिडिल ईस्ट (Middle East) में दशकों पुराने तनाव को खत्म करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच इस समय बेहद संवेदनशील शांति वार्ता चल रही है। हालांकि, इस बातचीत के रास्ते में सबसे बड़ी दीवार बंदूकों की नहीं, बल्कि ईरान पर लगे अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों (US Sanctions) की है। वर्तमान में ईरान पर बैंकिंग, तेल व्यापार, वित्तीय क्षेत्र, मैन्युफैक्चरिंग और माइनिंग समेत 1,200 से भी अधिक कड़े प्रतिबंध लागू हैं। ईरान का साफ कहना है कि जब तक उसे इन आर्थिक पाबंदियों से बड़ी राहत नहीं मिलती, तब तक किसी स्थायी युद्धविराम या समझौते की कल्पना नहीं की जा सकती। अगर Trump मान जाते हैं तो Gulf में रह रहे लाखों Indian Diaspora के लिए नए अवसर के रास्ते खुल जाएंगे।

About the Story:
As the United States and Iran engage in crucial peace negotiations, the fate of over 1,224 unilateral US sanctions remains the primary geopolitical friction point. While Iran demands a total lifting of sanctions and guaranteed economic re-integration as a prerequisite for a permanent ceasefire, Washington insists on verifiable limits to Iran's nuclear and missile capabilities. A successful resolution could significantly alter global energy markets, stabilizing crude oil prices and heavily benefiting major oil-importing nations like India.

#IranWar #USIranPeaceDeal #USIranSanctions #DonaldTrump #MiddleEastPeace #OneindiaHindi

~PR.514~HT.408~ED.276~GR.506~VG.HM~

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Transcript
00:00अमेरिका और इरान के बीच शान्ती वारता चल रही है।
00:03दुनिया की निगाहें इस बात पढ़ते की हैं कि क्या दोनों देशों के बीच करीब पांच दशक पुराने दुश्मनी आखिरकार
00:10खत्म हो जाएगी।
00:11क्या मध्यपुर्व में युद्ध का खत्रा चलेगा।
00:30इरान का कहना है कि जब तक अमेरिका आर्थिक प्रतिबंदों में बड़ी रहत नहीं देता, तब तक किसी स्थाई शान्ती
00:36समझोते की कल्पना भी नहीं की जा सकेगी।
00:38वहीं अमेरिका चाहता है कि इरान पहले अपने पर्मानों कारिक्रम, मिसाइल गतिविदियों और छेत्रिय नीतियों पर फोस भरोसा दे।
00:46यहीं बज़ा है कि युद्विराम और शान्ती वारता के बीच सबसे बड़ी लड़ाई बंदू को की नहीं, बलकि सैंक्शन्स की
00:53हैं।
01:16यहीं हो चुका होता। लेकिन क्या आपने कभी जानने की कोशिश की है कि यह सैंक्शन्स की कहानी आखिर शुरू
01:22कहां से होती है।
01:23अमेरिका और इरान के रिष्टे इतने खराब कैसे हुए। क्यों 47 साल से प्रतिबंधों का यह सिलसिला जारी है।
01:30तो प्रतिबंधों की ये कहानी और दुश्मनी की इस कहानी को जानने के लिए आपको बहुत पीछे जाना होगा साल
01:361989 में एक ऐसे घटना की तरफ जिसने मध्यपुर्व की राजनीती ही नहीं बलकि पूरी दुनिया की कूटनीती की दुशा
01:44बदल दी थी
01:49आज हम आपको 1989 से लेकर 2026 तक की इरान पर लगाये गए सैंक्शन्स की पूरी कहानी हम बताएंगे
01:56सबसे पहले समझे कि सैंक्शन्स यानि की प्रतिबंद होते क्या है जब कोई देश दूसरे देश पर दबाग बनाना चाहता
02:03है
02:03लेकिन सीधे युद्ध नहीं करना चाहता तब वो आर्थिक व्यपारिक और वित्य प्रतिबंद लगाता है
02:09इसका मकसद उस देश की अर्थवयवस्था को कमजोर करना और उसे अपनी नीतियां बदलने पर मजबूर करना होता है
02:16इरान और अमेरिका के बीच प्रतिबंदों की कहानी आज की नहीं है
02:19इसकी शुरुआत 1989 में हो चुकी थी
02:35और 52 अमेरिकी नागरिकों को बंधक बना लिए
02:38ये बंधक संकट पूरे 444 दिनों तक चला
02:41अमेरिका ने इसे अपनी संप्रभुता और प्रतिष्ठा पर सीधा हमला माना
02:46जबाब में ततकालीन अमेरिकी राश्रपती जिम्मी कॉटर ने
02:50इरान की लगभग 12 अरब डॉलर की संपतियां फ्रीज कर दिया
02:55और कई आर्थिक प्रतिबंध लागू कर दिया
02:58यही से दोनों देशों के बीच सैंक्शन्स की लंबी, कहानी और संघर्ष जो आज तक चल रहा है
03:04वो शुरू हो गई
03:16इसके बाद 1987 में राश्रपती रॉनाल्ड रीगन ने इरान से अमेरिका आने वाले लगभग सभी उत्पादों पर प्रतिबंध लगा दिया
03:24फिर 1995 में राश्रपती बिल क्लिंटन ने अमेरिकी कंपनियों को इरान के तेल और गैस छेतर में निवेश करने से
03:32रोक दिया
03:33और कुछे महीनों बाद दोनों देशों के बीच लगभग पूरा व्यापार बंद कर दिया गया
03:381996 में अमेरिकी कॉंग्रिस ने विदेशी कंपनियों को भी चेताबनी दी
03:42कि यदि वे इरान के उजजा छेतर में बड़ा निवेश करेंगे तो उन पर भी प्रतिबंध लगाये जा सकते हैं
03:49यही से इरान की आर्थिक घेरा बंदी एक वैश्विक अभियान में तब्दील हो गई
03:54लेकिन असली जटका 2006 के बाद लगा
03:57अमेरिका और उसके सहयोगियों ने आरोप लगाया कि इरान परमानू हत्यार विक्सित करने के दिशा में आगे बढ़ रहा है
04:03इरान लगतार कहता रहा कि उसका परमानू कारेक्रम किवल शांतिपुर्ण और उजजा उत्पादन के लिए है
04:08इसके बावजूद इरान के बैंकों, तेल कमपनियों और सरकारी संस्थाओं पर एक के बाद एक प्रतिबंध लगते गए
04:162010 में CISADA कानून लागू हुआ
04:202011 और 2012 में इरान के केंद्रिया बैंक पर भी प्रतिबंध लगा दिये गए
04:26अब स्तिथी ये हो गई कि दुनिया के अधिकांश बैंक इरान के साथ लेन दिन करने से डरने लगे
04:32तेल बेचने वाला देश तेल बेच तो सकता था लेकिन पैसा प्राप्त करना मुश्किल हो गया
04:37यहां से इरान की अर्थ वैवस्था पर सबसे बड़ा असर शुरू हो गया
04:412015 में उमीद कि एक किरन दिखाई जरूर दी
04:44अमेरिका, ब्रिटन, फ्रांस, जर्मनी, रूस, चीन और इरान के बीच
04:50JCPO यानि की एतिहासिक पर्मानू समझोता हुआ
04:54इरान ने अपने पर्मानू कारेक्रम पर सिमायस विकार की
04:57और बदले में अमेरिका समेत पश्रिमी देशों ने कई प्रतिबंध हटा दिये
05:01उस समय इरान की अर्थ वैवस्था में टेजी आई
05:04तेल निर्याद बढ़ा, विदेशी निवेश आने लगा
05:07यूरोपिया कमपनिया इरान लोटने लगी
05:09लेकिन ये राहत ज्यादा लंबे समय तक टिक नहीं पाया
05:132018 में राश्रपती डॉनल्ड ट्रम्प ने JCPOA से
05:16अमेरिका को बाहर निकाल लिया
05:18इसके साथ ही मैक्सिमम प्रेशर कैंपेंग शुरू हुई
05:21700 से ज्यादा प्रतिबंध तुबारा लागू कर दिये गए
05:25इसके बाद हर साल नए प्रतिबंध इसमें जुड़ते गए
05:28और 2026 तक अमेरिके प्रतिबंधों की संख्या
05:331224 से भी ज्यादा पहुँच चुकी है इरान के उपर
05:36ये दुनिया के इतिहास में किसी एक देश पर लगाए गए
05:39सबसे व्यापक और सबसे लंबे आर्थिक प्रतिबंधों में से एक माना जाता है
05:44अब कहानी के मुखे पड़ाओ पर आते हैं
05:46आखिर इन प्रतिबंधों ने इरान को कितना नुकसान पहुँचाया
05:49कवक बता दे कि इरानी मुद्रा रियाल की कीमत कई बार बुरी तरहे गिरी
05:54महंगाई लगतार बढ़ती गई युवाव में बेरोजगारी बढ़ी
05:57विदेशी निवेश लगभग खत्म हो गया
06:00कई अंतराश्ट्रे कंपनियों ने इरान छोड़ दिया
06:02तेल निर्याद जो इरान की अर्थवयवस्था की रीड माना जाता था
06:06बुरी तरहे प्रभावित हुआ
06:07कई बार इरान को अपना तेल भारी छूट देकर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा
06:12अंतराश्ट्रे बैंकिंग सिस्टम से कट जाने के कारण
06:15विदेशी व्यापार भी मुश्किल होता गया
06:17यही वज़ा है कि पिछले कुछ वर्षों में
06:20इरान में कई बार बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन देखने को बिले
06:23अब समझे कि वर्तमान शांतिवारता में
06:27इरान की सबसे बड़ी मांग क्या है
06:29इरान चाहता है कि अमेरिका उसके तेल निर्याद पर लगे प्रतिबंध हटाए
06:33उसके बैंक दुबारा वैश्विक वित्य प्रणाली से जुड़े
06:36फ्रीज की गई अरबो डॉलर की संपतिया वापस मिले
06:39विदेशी कमपनिया फिर से निवेश कर सके
06:42और सबसे महत्वपुन भविष्य में
06:45अमेरिका किसी समझोते से अचानक बाहर ना नकलिए
06:47दूसरी तरफ अमेरिका चाहता है कि इरान अपने परमाणू कारेक्रम को सिमीत करे
06:52मिसाइल कारेक्रम पर नियंतरण रखे
06:54और छेत्रिय गत्विध्यों में बदलाव लाए
06:57यही वो बिंदू है जहां बाचीत अटक जा रही है
07:01अगर अमेरिका प्रतिबंदों में बड़ी रहात देने को तयार हो जाता है
07:04तो इरान को सबसे बड़ा फाइदा तेल छेत्र में मिलेगा
07:07इरान दुनिया के सबसे बड़े तेल और गैस भंडार वाले देशों में शामिल है
07:11प्रतिबंध हटते ही वो प्रतिदिन लाखो बैरल अतरिक्त तेल वैश्विक बाजार में भेज सकेगा
07:18इससे उसकी सरकार को अर्मो जॉलर की अतरिक्त आय होगी
07:22विदेशी निवेश लोट सकता है, रोजगार बढ़ सकता है, मुद्रा मजबूत हो सकती है, महंगाई कम हो सकती है
07:27और वर्षों से दवाब जहल रही अर्थवेवस्था को नई सांस मिल सकती है
07:31इसका फायदा के वाली इरान को नहीं होगा
07:33दुनिया भर में तेल की कीमतों पर दबाब कम हो सकता है, जब आजार स्थिर हो सकते हैं, मध्यपूर में
07:38तनाव घट सकता है
07:39और भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों को भी राहत मिल सकती है
07:44यही वज़े है कि आज पूरी दुनिया अमेरिका इरान वारता पर नजर बनाए हुए है क्योंकि यह सिर्फ दो देशों
07:50के बीच समझाता नहीं है
07:51यह दुनिया के सबसे पूराने आर्थिक संगर्षों में से एक का संभावित अंत हो सकता है
07:57अगर यह समझाता हो जाता है
07:5847 साल पुराने प्रतिबंधों की कहानी अब शायद एक नए मोड पर खड़ी है
08:03लेकिन सवाल अब भी वही है क्या अमेरिका प्रतिबंधों में रहात देने को तयार होगा
08:07और क्या इरान अपनी शर्तों पर समझाता करेगा
08:10तो अगर सैंक्शन्स की दिवार टूटी है तो सिर्फ तहरार नहीं बदलेगा
08:14बलकि पूरी दुनिया की राजनीती रुज्जा वैवस्था अर्थ वैवस्था पर उसका असर दिखाई देगा
08:20और यही वजह है कि इस शांती वारता का असली केंद्र युद्ध नहीं
08:24बलकि इरान पर लगिवे 1224 से ज्यादा प्रतिबंध है जिन्होंने दशकों से इस पूरे संगर्ष की दिशा तय की है
08:32तो अब अगर दोनों देश शांती वारता कर लेते हैं, सीस फायर हो जाती है तो जंग रुकने से ज्यादा
08:38दुनिया की अर्थ वैवस्था की बड़ी जीत होगी
08:40इसका सर भारत में रहने वाले भारतियों के साथ साथ दुनिया के किसी भी देश में निवास करने वाले भारतियों
08:46और दुनिया के पूरी पॉपुलेशन पतवाड़ेगा
08:49इस ख़बर में इतना ही, लेकिन आप क्या सोचते हैं, हमें comment में जरूर बताई आपको क्या लगता है कि
08:53अमेरिका का जो प्रतिबंदों का ये इतिहास हमने आपको बताया, अमेरिका ने इ ceiling पर इतने प्रतिबंद लगा अगर सही
08:58किया, गलत किया, और क्या अमेरिका को ये प्
09:19झाल
09:19झाल
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