00:00अमेरिका और इरान के बीच शान्ती वारता चल रही है।
00:03दुनिया की निगाहें इस बात पढ़ते की हैं कि क्या दोनों देशों के बीच करीब पांच दशक पुराने दुश्मनी आखिरकार
00:10खत्म हो जाएगी।
00:11क्या मध्यपुर्व में युद्ध का खत्रा चलेगा।
00:30इरान का कहना है कि जब तक अमेरिका आर्थिक प्रतिबंदों में बड़ी रहत नहीं देता, तब तक किसी स्थाई शान्ती
00:36समझोते की कल्पना भी नहीं की जा सकेगी।
00:38वहीं अमेरिका चाहता है कि इरान पहले अपने पर्मानों कारिक्रम, मिसाइल गतिविदियों और छेत्रिय नीतियों पर फोस भरोसा दे।
00:46यहीं बज़ा है कि युद्विराम और शान्ती वारता के बीच सबसे बड़ी लड़ाई बंदू को की नहीं, बलकि सैंक्शन्स की
00:53हैं।
01:16यहीं हो चुका होता। लेकिन क्या आपने कभी जानने की कोशिश की है कि यह सैंक्शन्स की कहानी आखिर शुरू
01:22कहां से होती है।
01:23अमेरिका और इरान के रिष्टे इतने खराब कैसे हुए। क्यों 47 साल से प्रतिबंधों का यह सिलसिला जारी है।
01:30तो प्रतिबंधों की ये कहानी और दुश्मनी की इस कहानी को जानने के लिए आपको बहुत पीछे जाना होगा साल
01:361989 में एक ऐसे घटना की तरफ जिसने मध्यपुर्व की राजनीती ही नहीं बलकि पूरी दुनिया की कूटनीती की दुशा
01:44बदल दी थी
01:49आज हम आपको 1989 से लेकर 2026 तक की इरान पर लगाये गए सैंक्शन्स की पूरी कहानी हम बताएंगे
01:56सबसे पहले समझे कि सैंक्शन्स यानि की प्रतिबंद होते क्या है जब कोई देश दूसरे देश पर दबाग बनाना चाहता
02:03है
02:03लेकिन सीधे युद्ध नहीं करना चाहता तब वो आर्थिक व्यपारिक और वित्य प्रतिबंद लगाता है
02:09इसका मकसद उस देश की अर्थवयवस्था को कमजोर करना और उसे अपनी नीतियां बदलने पर मजबूर करना होता है
02:16इरान और अमेरिका के बीच प्रतिबंदों की कहानी आज की नहीं है
02:19इसकी शुरुआत 1989 में हो चुकी थी
02:35और 52 अमेरिकी नागरिकों को बंधक बना लिए
02:38ये बंधक संकट पूरे 444 दिनों तक चला
02:41अमेरिका ने इसे अपनी संप्रभुता और प्रतिष्ठा पर सीधा हमला माना
02:46जबाब में ततकालीन अमेरिकी राश्रपती जिम्मी कॉटर ने
02:50इरान की लगभग 12 अरब डॉलर की संपतियां फ्रीज कर दिया
02:55और कई आर्थिक प्रतिबंध लागू कर दिया
02:58यही से दोनों देशों के बीच सैंक्शन्स की लंबी, कहानी और संघर्ष जो आज तक चल रहा है
03:04वो शुरू हो गई
03:16इसके बाद 1987 में राश्रपती रॉनाल्ड रीगन ने इरान से अमेरिका आने वाले लगभग सभी उत्पादों पर प्रतिबंध लगा दिया
03:24फिर 1995 में राश्रपती बिल क्लिंटन ने अमेरिकी कंपनियों को इरान के तेल और गैस छेतर में निवेश करने से
03:32रोक दिया
03:33और कुछे महीनों बाद दोनों देशों के बीच लगभग पूरा व्यापार बंद कर दिया गया
03:381996 में अमेरिकी कॉंग्रिस ने विदेशी कंपनियों को भी चेताबनी दी
03:42कि यदि वे इरान के उजजा छेतर में बड़ा निवेश करेंगे तो उन पर भी प्रतिबंध लगाये जा सकते हैं
03:49यही से इरान की आर्थिक घेरा बंदी एक वैश्विक अभियान में तब्दील हो गई
03:54लेकिन असली जटका 2006 के बाद लगा
03:57अमेरिका और उसके सहयोगियों ने आरोप लगाया कि इरान परमानू हत्यार विक्सित करने के दिशा में आगे बढ़ रहा है
04:03इरान लगतार कहता रहा कि उसका परमानू कारेक्रम किवल शांतिपुर्ण और उजजा उत्पादन के लिए है
04:08इसके बावजूद इरान के बैंकों, तेल कमपनियों और सरकारी संस्थाओं पर एक के बाद एक प्रतिबंध लगते गए
04:162010 में CISADA कानून लागू हुआ
04:202011 और 2012 में इरान के केंद्रिया बैंक पर भी प्रतिबंध लगा दिये गए
04:26अब स्तिथी ये हो गई कि दुनिया के अधिकांश बैंक इरान के साथ लेन दिन करने से डरने लगे
04:32तेल बेचने वाला देश तेल बेच तो सकता था लेकिन पैसा प्राप्त करना मुश्किल हो गया
04:37यहां से इरान की अर्थ वैवस्था पर सबसे बड़ा असर शुरू हो गया
04:412015 में उमीद कि एक किरन दिखाई जरूर दी
04:44अमेरिका, ब्रिटन, फ्रांस, जर्मनी, रूस, चीन और इरान के बीच
04:50JCPO यानि की एतिहासिक पर्मानू समझोता हुआ
04:54इरान ने अपने पर्मानू कारेक्रम पर सिमायस विकार की
04:57और बदले में अमेरिका समेत पश्रिमी देशों ने कई प्रतिबंध हटा दिये
05:01उस समय इरान की अर्थ वैवस्था में टेजी आई
05:04तेल निर्याद बढ़ा, विदेशी निवेश आने लगा
05:07यूरोपिया कमपनिया इरान लोटने लगी
05:09लेकिन ये राहत ज्यादा लंबे समय तक टिक नहीं पाया
05:132018 में राश्रपती डॉनल्ड ट्रम्प ने JCPOA से
05:16अमेरिका को बाहर निकाल लिया
05:18इसके साथ ही मैक्सिमम प्रेशर कैंपेंग शुरू हुई
05:21700 से ज्यादा प्रतिबंध तुबारा लागू कर दिये गए
05:25इसके बाद हर साल नए प्रतिबंध इसमें जुड़ते गए
05:28और 2026 तक अमेरिके प्रतिबंधों की संख्या
05:331224 से भी ज्यादा पहुँच चुकी है इरान के उपर
05:36ये दुनिया के इतिहास में किसी एक देश पर लगाए गए
05:39सबसे व्यापक और सबसे लंबे आर्थिक प्रतिबंधों में से एक माना जाता है
05:44अब कहानी के मुखे पड़ाओ पर आते हैं
05:46आखिर इन प्रतिबंधों ने इरान को कितना नुकसान पहुँचाया
05:49कवक बता दे कि इरानी मुद्रा रियाल की कीमत कई बार बुरी तरहे गिरी
05:54महंगाई लगतार बढ़ती गई युवाव में बेरोजगारी बढ़ी
05:57विदेशी निवेश लगभग खत्म हो गया
06:00कई अंतराश्ट्रे कंपनियों ने इरान छोड़ दिया
06:02तेल निर्याद जो इरान की अर्थवयवस्था की रीड माना जाता था
06:06बुरी तरहे प्रभावित हुआ
06:07कई बार इरान को अपना तेल भारी छूट देकर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा
06:12अंतराश्ट्रे बैंकिंग सिस्टम से कट जाने के कारण
06:15विदेशी व्यापार भी मुश्किल होता गया
06:17यही वज़ा है कि पिछले कुछ वर्षों में
06:20इरान में कई बार बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन देखने को बिले
06:23अब समझे कि वर्तमान शांतिवारता में
06:27इरान की सबसे बड़ी मांग क्या है
06:29इरान चाहता है कि अमेरिका उसके तेल निर्याद पर लगे प्रतिबंध हटाए
06:33उसके बैंक दुबारा वैश्विक वित्य प्रणाली से जुड़े
06:36फ्रीज की गई अरबो डॉलर की संपतिया वापस मिले
06:39विदेशी कमपनिया फिर से निवेश कर सके
06:42और सबसे महत्वपुन भविष्य में
06:45अमेरिका किसी समझोते से अचानक बाहर ना नकलिए
06:47दूसरी तरफ अमेरिका चाहता है कि इरान अपने परमाणू कारेक्रम को सिमीत करे
06:52मिसाइल कारेक्रम पर नियंतरण रखे
06:54और छेत्रिय गत्विध्यों में बदलाव लाए
06:57यही वो बिंदू है जहां बाचीत अटक जा रही है
07:01अगर अमेरिका प्रतिबंदों में बड़ी रहात देने को तयार हो जाता है
07:04तो इरान को सबसे बड़ा फाइदा तेल छेत्र में मिलेगा
07:07इरान दुनिया के सबसे बड़े तेल और गैस भंडार वाले देशों में शामिल है
07:11प्रतिबंध हटते ही वो प्रतिदिन लाखो बैरल अतरिक्त तेल वैश्विक बाजार में भेज सकेगा
07:18इससे उसकी सरकार को अर्मो जॉलर की अतरिक्त आय होगी
07:22विदेशी निवेश लोट सकता है, रोजगार बढ़ सकता है, मुद्रा मजबूत हो सकती है, महंगाई कम हो सकती है
07:27और वर्षों से दवाब जहल रही अर्थवेवस्था को नई सांस मिल सकती है
07:31इसका फायदा के वाली इरान को नहीं होगा
07:33दुनिया भर में तेल की कीमतों पर दबाब कम हो सकता है, जब आजार स्थिर हो सकते हैं, मध्यपूर में
07:38तनाव घट सकता है
07:39और भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों को भी राहत मिल सकती है
07:44यही वज़े है कि आज पूरी दुनिया अमेरिका इरान वारता पर नजर बनाए हुए है क्योंकि यह सिर्फ दो देशों
07:50के बीच समझाता नहीं है
07:51यह दुनिया के सबसे पूराने आर्थिक संगर्षों में से एक का संभावित अंत हो सकता है
07:57अगर यह समझाता हो जाता है
07:5847 साल पुराने प्रतिबंधों की कहानी अब शायद एक नए मोड पर खड़ी है
08:03लेकिन सवाल अब भी वही है क्या अमेरिका प्रतिबंधों में रहात देने को तयार होगा
08:07और क्या इरान अपनी शर्तों पर समझाता करेगा
08:10तो अगर सैंक्शन्स की दिवार टूटी है तो सिर्फ तहरार नहीं बदलेगा
08:14बलकि पूरी दुनिया की राजनीती रुज्जा वैवस्था अर्थ वैवस्था पर उसका असर दिखाई देगा
08:20और यही वजह है कि इस शांती वारता का असली केंद्र युद्ध नहीं
08:24बलकि इरान पर लगिवे 1224 से ज्यादा प्रतिबंध है जिन्होंने दशकों से इस पूरे संगर्ष की दिशा तय की है
08:32तो अब अगर दोनों देश शांती वारता कर लेते हैं, सीस फायर हो जाती है तो जंग रुकने से ज्यादा
08:38दुनिया की अर्थ वैवस्था की बड़ी जीत होगी
08:40इसका सर भारत में रहने वाले भारतियों के साथ साथ दुनिया के किसी भी देश में निवास करने वाले भारतियों
08:46और दुनिया के पूरी पॉपुलेशन पतवाड़ेगा
08:49इस ख़बर में इतना ही, लेकिन आप क्या सोचते हैं, हमें comment में जरूर बताई आपको क्या लगता है कि
08:53अमेरिका का जो प्रतिबंदों का ये इतिहास हमने आपको बताया, अमेरिका ने इ ceiling पर इतने प्रतिबंद लगा अगर सही
08:58किया, गलत किया, और क्या अमेरिका को ये प्
09:19झाल
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