00:00प्रनीत मोरे के विवाद पर मचा बवाल अभी थमा भी नहीं था कि अब एक और स्टेंड अप कॉमेडियन मदुर
00:05विरली विवादों के घेरे में आ गए
00:06और देखते ही देखते एक बहस शुरू हो गई है कि क्या कॉमेडी के नाम पर किसी भी विशय पर
00:11मजा किया जा सकता है
00:13क्या महिलाओ के साथ हुए दुशकर्म जैसे घंबीर अपराद भी अब स्टेंड अप का कॉंटेंट बन गए
00:31उनके खिलाव शिकायत दर्ज हुई सोशल मीडिया पर बहर छिडी और सवाल उठने लगा कि आखिर कॉमेडी की सीमा क्या
00:37होनी चाहिए
00:38लेकिन इस बार सोशल मीडिया पर एक दूसरे स्टेंड अप कॉमेडियन मधूर विरली का एक पुराना स्टेंड अप क्लिप तेजी
00:44से वाइरल हो रहा है
00:45वीडियो में मधूर विरली एक ऐसा मजाग करते हुए दिखाई देते हैं जो बेहत आपतीजनक और असमवेदन शील है
00:51दर्शक बात इतनी आपतीजनक है कि आँ आपको दिखा भी नहीं सकते
00:54आरोप है कि उनके इस जोग में महिलाओ के साथ दुशकर्म और उससे जुड़े अपरात को कॉमेडी की रूप में
00:59पेश किया गया
01:00और जब वीडियो सोशल मीडिया पर वाइरल हुआ तो लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रिया सामने आने लगी
01:05कुछ लोग ने इसे डाक यूमर कहा कर बचाओ करने की कोशिश जबकि बड़ी संख्या में यूजर्स ने इसे गलत
01:10और शर्मनाग बताया है
01:11अब इस पूरे मामले में टीवी परसनालिटी और सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर उर्फी जाविद भी सामने आई
01:16उर्फी जाविद ने इस वीडियो पर कडरी प्रतीक दिया दी और कहा कि कॉमेडी के नाम पर महिलाओ और दुश
01:22कर्म पीडितों का मजाग बनाना सुविकार नहीं किया जा सकत.
01:24साती उर्फी ने ये भी कहा कि कॉमेडी और कॉंटेंट क्रियेशन की दुनिया में महिलाओ की भागेदारी बढ़नी चाहिए
01:30क्योंकि उनके मुताबिक अगर राइटिंग रूम और क्रियेटिव टीम में जादा महिलाए होंगी
01:34तो ऐसे कॉंटेंट पर पहले ही सवाल उठेंगे और शायद इस तरह के विवाद पैदा ही नहीं होंगे
01:39दर्शक उर्फी की इस टिपनी के बाद बहस और तेज हो गई
01:42एक तरह वे लोग हैं जो कहते हैं कि स्टेंड अप कॉमेडी में किसी भी विशे पर बात करनी की
01:47आजादी होनी चाहिए
01:48उनके तर्ख है कि कॉमेडियन का काम लोगों को हसाना है और दर्शक अगर पसंद ना करे तो कॉंटेंट को
01:54नजर अंदास कर सकते हैं
01:55वही दूसरी तरह वो बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो मानते हैं कि अभी व्यक्ति की सोतनसता का मतलब
02:00यह नहीं है कि किसी भी पीडित वर गया गंबीर अपरात का मजाग बनाए
02:04यही से दर्शक को एक बड़ा सवाल खड़ा होता है आखिर क्यों बार-बार महिलाओं के साथ हुए दुशकर्म महिलाओं
02:10के साथ हुए हिंसा, हत्याद, धार्मिक भावनाय और अन्य संवेधन विशे कॉमेडी का हिस्सा बनते जा रहे हैं
02:15दर्शल दर्शक को इसकी एक वज़ा डिजिटर प्लैटफॉर्म का कॉम्पेडीशन भी माना जा सकता है आज सोचल मीडिय के दौर
02:21में लाख हो वीडियो हर दिन अपलोड होते हैं ऐसे में कई कॉंटेंड क्रियेटेर्स और कॉमीडियन कुछ ऐसा बोलने की
02:27कोशिश करते ह
02:27जो लोगों को चोका दे विवादित बयान हो बोल जोक्स हो और समभेदन शील विश्यो पर टिपनी अकसर तीजी से
02:39वायरल होती है यानि कई बार कॉंटेंड की गुणवत्ता से जादा उसकी विवाद पैदा करने की शमता चर्चा का करान
02:45बन जाती है दूसरी वजा है डा
02:57समाजिक मुध्य अभी भी बेहत समभेदन शील है वहाँ ऐसे जोक्स को लेकर प्रतिक्रियाय कई जादा तीखी हो जाती है
03:03लेकिन दर्चों को हमें यहाँ एक चीज समझनी पड़ीगी जब किसी अपरात का शिकार व्यक्ति या उसके परिवार उस तरह
03:09के मजाग को सुनते
03:10हैं तो उनके लिए वे किवल एक जोक नहीं होता उनके लिए वे एक दर्दनाक अनुभो की याद दिलाने वाला
03:15श्रण बन जाता है यही कारण है कि कई समाजी कारे करता और विशेशक गया ऐसे कॉंटेंड को लेकर जिम्मेदारी
03:21की बात करते है हाला कि दर्चों को यह बह
03:38अब इस बहस का हिस्सा बन चुका है फिलाव सोचल मीडिया पर बहस जारी है लेकिन इस पूरे विवाद ने
03:44एक बार फिर यही सवाल खड़ा कर दिया है कि हसी और समवेदन शीलता के बीच की रेखा आकिर कहा
03:49खीची जानी चाहिए बाकि दर्चों को आप इस पूरे मामले
03:52पर क्या सोचते हैं क्या मैलाओ के साथ हुए दुशकर्म जैसे गंबीर अपरादों पर मजाग करना सिर्फ डाक यूमर है
03:57या फिल्ट समाच को इस पर नए सीरे से सोचनी की जरुवत है अपनी राय हमार सार कमेंट बॉक्स में
04:03जरूर शेर करिए बाकि देश दुनिया की त
04:07दिपक बेश्ट
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