00:00क्या इस साल मौनसून महरबान रहेगा या फिर बारिश का गणित बिगड़ सकता है।
00:03इस सवाल के पीछे एक नाम बार-बार सामने आता है, अल-नीनो।
00:07मौसम विग्यानिकों के लिए ये सिर्फ एक जल वायू घटना नहीं, बलकि पूरी दुनिया के मौसम को प्रभावित करने वाली
00:13एक बड़ी प्रकृतिक ताकत है।
00:14भारत में जब भी अल-नीनो सक्रिया होता है, किसानों से लेकर सरकार तक की चिंता बढ़ जाती है क्योंकि
00:20इसका सीधा असर मौनसून पर पड़ता है।
00:22दरसल अल-नीनो प्रिशान्त महा सागर के मध्य और पुर्वी हिस्से में समुद्र की सते के आसमाने रूप से गर्म
00:29होने की सिथी है।
00:30जब समुद्र का ताफ पान सामाने से ज्यादा बढ़ता है, तो दुनिया भर के वायू मंडलिये पैटन बदलने लगते हैं।
00:36इसका असर एशिया, अमेरिका, अफ्रिका और आस्ट्रेलिया तक देखने गुंबलता है।
00:41भारत के लिए अल-नीनो इसलिए महतोपून है क्योंकि हमारा कृशी तंत्र और जल संसाधन काफी हद तक मौनसून पर
00:48निर भर है।
00:49देश की लगभग आधी कृशी भूमी आज भी बारिश आधारित खेती पटी की हुई है।
00:54ऐसे में अगर मौनसून कमजोर पड़ता है तो फसलों, जलाशयों और ग्रामिड अर्थ वैवस्था पर इसका बुरा प्रभाव पड़ सकता
01:01है।
01:02इतिहास बताता है कि कई बार मजबूत अल्नीनों के दौरान भारत में समाने से कम बारिश तरफ की गए।
01:082002 और 2015 जैसे वर्षों में अल्नीनों को कमजोर मौनसून की बड़ी वजह माना गया था।
01:13अलकि ये भी सच है कि हर बार अल्नीनों का मतलब सुखा नहीं होता।
01:18कई बार हिंद महासागर की परिस्तिथियां और अन्य जलवायू कारक इसके प्रभाव को कम कर देते हैं।
01:24वह सब बैग्यानिक बताते हैं कि मौनसून केवल एक फैक्टर पर नर्भर नहीं करता।
01:28इंद महासागर, डाइबोल यानि की IOD अरब सागर का ताप मान बंगाल की खाड़ी की स्तिथी और पश्चिमी विक्षोब जैसे
01:36कई कारक मिलकर मौनसून की तस्वीर तै करते हैं।
01:39इसलिए केवल अल नीनो के अधार पर पूरे मौनसून का अनुमान लगाना सही नहीं माना जाता।
01:45पिर भी जब अल नीनो की चर्चा होती है तो किसानों को चिंदा बढ़ी जाता।
01:49अगर बारिश कम हुई तो धान, मक्का, सोया बीन, डालों और अन्या खरी फसलों पर असर पड़ेगा।
01:54जलाशेयों में पानी का स्तर घट जाएगा और बिजली उत्पादन पर भी दबाब बढ़ेगा।
01:59यही वज़ा है कि मौसम विभाग और कृशी विशशग्य लगतार पुशान्त महसागर की गतिविदियों पर नजर रख रहे हैं।
02:06दूसरी तरफ अलनीनो कमजोर रहे या उसका असेसिमित हो जाए तो मौनसुन समान्या या फिर समान्या से बहतर भी रह
02:13सकता है।
02:13ऐसे में कृशी उत्पादन बढ़ने, खादे कीमतों को नियंत्रित रखने और ग्रामिड अर्थ व्यवस्था को मजबूती मिलने की उमीद रहती
02:20है।
02:21दिल्चस बात ये है कि पिछले कुछ वर्षों में जलवायू परिवर्तन ने मौसम के पारंपरिक पैटर्न को और जटल बना
02:27दिया है।
02:27कई बार ऐसे हालात बने हैं जब अलनीनों मौजूद था लेकिन मौनसून ने उमीद से बहतर प्रदशन किया।
02:33इसी विजह से वैज्ञानिक अब मौसम की भविश्यवानी के नए मौडल और तक्निकों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
02:40फिलाल पूरे देश की नजर मौनसून की प्रगति और प्रशांत महसागर की गतिविधियों पर बनी हुई है क्योंकि भारत में
02:47मौनसून सिर्फ मौसम नहीं होता।
02:49ये खेती, अर्थव्यवस्था, रोजगार और करोडों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा हुआ है।
02:55और जब बात अलनीनों की हो, तो हर बादल, हर बारिश और हर मौसम रिपोर्ट पर नजर अपने आप तेखे
03:02जाती है।
03:02इस ख़बर में इतना ही अपडेट्स के लिए देखते रहें, One India हैंदी.
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