00:00भारत में पेट्रोल डीजल की कीमतों को लेकर सरकार ने बड़ा दावा किया है।
00:04केंद्रिय पेट्रोलियम और प्राकर्थिक गैस मंत्री हरदीप सिंग पुरी ने कहा है कि दुनिया की कई देशों में जहां इंधन
00:11के दाम तेजी से बढ़े हैं, वहीं भारत में पिछले चार सालों में पेट्रोल डीजल की कीमतों में 3.1
00:17प्रतिशत की गिराव अटाई है।
00:19लेकिन आम आदमी का सवाल कुछ और है, अगर कीमते सच में घटी हैं तो पेट्रोल आज भी कई जगा
00:25100 रुपे के आसपास क्यूं है? डीजल भू आम लोगों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर की जेब पर भारी क्यूं पढ़ रहा
00:31है? यही वज़े है कि सरकार के इस दावे प
00:47तुलना करके समझाया है. दावा किया गया है कि इसी दोरान पाकिस्तान में पेट्रोल डीजल के दाम करीब 70 प्रतिशत
00:54तक बढ़े. श्री लंका में 66 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई. फ्रांस और इटली जैसे देशों में भी इंधन महंगा हुआ.
01:00अमेरिका में भी पे�
01:14अश्ट्रिय बाजार में उथल पुथल के कारण कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ा. ऐसे समय में सरकार ने टाक्स
01:20कटोती और तेल कमपनियों की जरिये कीमतों को नियंतरित रखने की कोशिश की. सरकार की अनुसार पेट्रोल पर उतपाज शुल्क
01:27में 3 रुपे प
01:43पूरा भार न पड़े. इसके अलावा सरकारी तेल कमपनियों ने भी अंतराश्ट्रिय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार
01:50चड़ाव के बीच नुकसान झेला. इसे अंडर रिकवरी कहा जाता है. यानि बाजार में कच्चा तेल महंगा होने के बावजूद
01:57कमप
02:11शहरों में पेट्रोल अब भी 100 उपय प्रती लीटर के आसपास बिक रहा है. डीजल के दाम भी ट्रांसपोर्ट, खेती
02:17और रोजमर्रा की चीज़ों पर असर डालते हैं. जब डीजल महंगा होता है तो माल धुलाई महंगी होती है और
02:22इसका असर सबजी, राशन और बाकी �
02:25ज़रूरत की चीज़ों की कीमतों पर भी दिखता है. यही वज़ा है कि लोग पूछ रहे हैं अगर चार साल
02:30में कीमतें 3.1 प्रतिशत घटी हैं तो जेब पर बूज कम महसूस क्यों नहीं हो रहा? सरकार आंकडों के
02:36आधार पर राहत दिखा रही है, लेकिन आम आदमी अप
02:52लगाने के लिए प्रतिवाहन 200 लीटर डीजल की दैनिक सीमा तै की गई है. सरकार का कहना है कि इससे
02:58आम उपभोकताओं के लिए इंधन की उपलब्धता बनी रहेगी और स्टॉक की कमी नहीं होगी. कुल मिलाकर सरकार का दावा
03:05है कि भारत ने वैश्विक संकट के बीच प
03:21सरकार अपना गणित बता रही है लेकिन जनता अपनी जेब का हिसाब पूछ रही है.
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