00:00अगर आपकी मा, पत्नी या बहन एक ग्रहनी या हाउस वाइफ है तो क्या अब उन्हें हर महीने 30,000
00:07रुपे मिलेंगे
00:08सोशल मीडिया पर यही दावात तेजी से वाइरल हो रहा है
00:12कई लोग कह रहे हैं कि सुप्रीम कोट ने ग्रहनियों के लिए 30,000 रुपे महीने का अधिकार तै किया
00:18है
00:18लेकिन क्या सच में ऐसा है या फिर इस फैसले को गलत तरीक के से समझा जा रहा है
00:23आईए जानते हैं पूरी सच्चाई
00:25नमस्कार मैं हूँ विशाख शर्मा और आप देख रहे हैं One India Hindi
00:30जरा सोचिए एक महीला सुबह सबसे पहरे उठती है
00:35पूरे परिवार का खाना बनाती है
00:37बच्चों को त्यार करती है
00:39बुजर्गों की देखबाल करती है
00:41घर का हर काम संभालती है
00:43और रात में सबसे आखिर में सोती है
00:45उसे ना छुट्टी मिलती है
00:47ना सालरी ना प्रमोशन
00:49और ना ही किसी तरह का बोनस
00:51फिर भी अकसर उसके काम को
00:53सिर्फ एक लाइन में कह दिया जाता है
00:55वो तो सिर्फ हाउसवाइस है
00:57शायद इसी सोच को बदलने की दिशा में
00:59सुप्रीम कोट ने एक एतिहासिक टिपनी की है
01:02जस्टिस संजे करोल और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंग की बेंच ने कहा
01:06कि रहनिया सिर्फ होम में कर नहीं
01:09बल्कि नेशन बिल्डर यानी राष्ट निर्माता है
01:12क्योंकि वे सिर्फ घर नहीं संभालती
01:15बल्कि आने वाली पीडी तैयार करती है
01:17और समाज की मजबूत नीव रखती है
01:19कोट ने अपने फैसले में ये भी माना
01:22कि महिलाएं रोजाना घंटों बिना किसी वेतन के घरेलु काम
01:26और देख भाल का दायत्व निभाती है
01:28ऐसे योगदान को केवल इसलिए शून्य नहीं माना जा सकता
01:32क्योंकि उसके बदले उन्हें कोई सालरी नहीं मलती
01:34लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल
01:37क्या सुप्रीम पोर्ट ने हर ग्रहनी के गे 30,000 महीने का वेतन तै कर दिया है
01:42जवाब है नहीं
01:43असल में ये फैसला किसी सरकारी योजना या मासिक भुकतान से जुड़ा नहीं है
01:48ये फैसला एक सड़क दुरगटना मुआवजे के मामले में आया है
01:52मामला साल 2001 में हर्याना में हुई एक सड़क दुरगटना का था
01:56जिसमें एक ग्रहनी की मौत हो गई
01:59परिवार ने मुआवजे की मांग की और मामला वर्षों तक अदालतों में चलता रहा
02:04सुनवाई के दरान सुप्रीम कोट ने कहा कि अगर नौकरी करने वाले व्यक्ति की आये के अधार पर मुआवज़त तै
02:10हो सकता है
02:11तो एक ग्रहनी के घरेलू श्रम का भी आर्थिक मूले होना चाहिए
02:15इसी अधार पर अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में ग्रहनी की कालपने क्यानी नोशनल मासिक आए 30,000 रुपे
02:23मानी जा सकती
02:24इसके बाद भविशे की संभावित आए उम्र और अन्य कानूनी मानकों को जोड़ कर अंतिम मुआवज़त तै किया जाएगा
02:31इसी मामले में कोर्ट ने पीडित परिवार को लगभग बासर ठलाक रुपे तक का मुआवज़ा भी मनजूर किया
02:38सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि मोडर आक्सिडेंट मुआवज़े के मामले सालों तक लंबित नहीं रहने चाहिए
02:44और समान्य परिस्थतियों में उनका निप्टारा एक साल की भीतर होना चाहिए
02:48इस फैसले का सबसे बड़ा संदेश पैसों से कई ही बड़ा है
02:51ये फैसला उन करोडों महिलाओं के अद्रिश्य श्रम को कानूनी सम्मान देता है
02:56जिनकी महनत पर पूरा परिवार ख़़ा होता है
02:59लेकिन जिनके काम की कीमत अक्सर कहीं नहीं आखी जाती
03:02इसलिए अगर आप सोशल मीडिया पर ये दावा देखें कि अब हर ग्रहनी
03:0630,000 रुपे की कानूनी हगदार है तो सच्चाई जान लीजी
03:10सुप्रीम कोट ने हर महीला के लिए मासिक वेतन का आदेश नहीं दिया है
03:15बल्कि सड़क दुर्गटना मुआफजों के मामलों में उनके घरेलू श्रम को आर्थिक माननेता देने के लिए
03:2130,000 रुपे प्रती महा की एक आधार राशी तै करने की बात कही है
03:26यानि ये फैसला सिर्फ कानून का नहीं बलकि सम्मान का भी है
03:30एक ऐसा सम्मान जिसका इंतजार देश की करोडों ग्रहनिया लंबे समय से कर रही थी
03:35इस पूरे विशे में आपकी क्या राय है
03:37कि ग्रहनियों के लिए 30,000 रुबे की मासिक आए आपके हिसाब से सही है
03:56हुआ हुआ है
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