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क्या अब देश की हर गृहिणी ₹30,000 महीने की कानूनी हकदार है? सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस दावे के पीछे की पूरी सच्चाई जानिए। सुप्रीम कोर्ट ने गृहिणियों को 'नेशन बिल्डर' बताते हुए उनके घरेलू श्रम को आर्थिक मान्यता दी है, लेकिन क्या इसका मतलब हर महिला को ₹30,000 मिलेंगे? इस वीडियो में जानिए सड़क दुर्घटना मुआवजा, नोटशनल इनकम, 62 लाख के मुआवजे और सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले की पूरी जानकारी।


Is every homemaker in India now legally entitled to ₹30,000 per month? A viral claim has sparked nationwide debate after the Supreme Court called homemakers "Nation Builders." This video explains the truth behind the landmark verdict, the ₹30,000 notional income concept, motor accident compensation rules, and why the judgment is being called historic. Watch the complete fact-based analysis.


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Transcript
00:00अगर आपकी मा, पत्नी या बहन एक ग्रहनी या हाउस वाइफ है तो क्या अब उन्हें हर महीने 30,000
00:07रुपे मिलेंगे
00:08सोशल मीडिया पर यही दावात तेजी से वाइरल हो रहा है
00:12कई लोग कह रहे हैं कि सुप्रीम कोट ने ग्रहनियों के लिए 30,000 रुपे महीने का अधिकार तै किया
00:18है
00:18लेकिन क्या सच में ऐसा है या फिर इस फैसले को गलत तरीक के से समझा जा रहा है
00:23आईए जानते हैं पूरी सच्चाई
00:25नमस्कार मैं हूँ विशाख शर्मा और आप देख रहे हैं One India Hindi
00:30जरा सोचिए एक महीला सुबह सबसे पहरे उठती है
00:35पूरे परिवार का खाना बनाती है
00:37बच्चों को त्यार करती है
00:39बुजर्गों की देखबाल करती है
00:41घर का हर काम संभालती है
00:43और रात में सबसे आखिर में सोती है
00:45उसे ना छुट्टी मिलती है
00:47ना सालरी ना प्रमोशन
00:49और ना ही किसी तरह का बोनस
00:51फिर भी अकसर उसके काम को
00:53सिर्फ एक लाइन में कह दिया जाता है
00:55वो तो सिर्फ हाउसवाइस है
00:57शायद इसी सोच को बदलने की दिशा में
00:59सुप्रीम कोट ने एक एतिहासिक टिपनी की है
01:02जस्टिस संजे करोल और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंग की बेंच ने कहा
01:06कि रहनिया सिर्फ होम में कर नहीं
01:09बल्कि नेशन बिल्डर यानी राष्ट निर्माता है
01:12क्योंकि वे सिर्फ घर नहीं संभालती
01:15बल्कि आने वाली पीडी तैयार करती है
01:17और समाज की मजबूत नीव रखती है
01:19कोट ने अपने फैसले में ये भी माना
01:22कि महिलाएं रोजाना घंटों बिना किसी वेतन के घरेलु काम
01:26और देख भाल का दायत्व निभाती है
01:28ऐसे योगदान को केवल इसलिए शून्य नहीं माना जा सकता
01:32क्योंकि उसके बदले उन्हें कोई सालरी नहीं मलती
01:34लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल
01:37क्या सुप्रीम पोर्ट ने हर ग्रहनी के गे 30,000 महीने का वेतन तै कर दिया है
01:42जवाब है नहीं
01:43असल में ये फैसला किसी सरकारी योजना या मासिक भुकतान से जुड़ा नहीं है
01:48ये फैसला एक सड़क दुरगटना मुआवजे के मामले में आया है
01:52मामला साल 2001 में हर्याना में हुई एक सड़क दुरगटना का था
01:56जिसमें एक ग्रहनी की मौत हो गई
01:59परिवार ने मुआवजे की मांग की और मामला वर्षों तक अदालतों में चलता रहा
02:04सुनवाई के दरान सुप्रीम कोट ने कहा कि अगर नौकरी करने वाले व्यक्ति की आये के अधार पर मुआवज़त तै
02:10हो सकता है
02:11तो एक ग्रहनी के घरेलू श्रम का भी आर्थिक मूले होना चाहिए
02:15इसी अधार पर अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में ग्रहनी की कालपने क्यानी नोशनल मासिक आए 30,000 रुपे
02:23मानी जा सकती
02:24इसके बाद भविशे की संभावित आए उम्र और अन्य कानूनी मानकों को जोड़ कर अंतिम मुआवज़त तै किया जाएगा
02:31इसी मामले में कोर्ट ने पीडित परिवार को लगभग बासर ठलाक रुपे तक का मुआवज़ा भी मनजूर किया
02:38सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि मोडर आक्सिडेंट मुआवज़े के मामले सालों तक लंबित नहीं रहने चाहिए
02:44और समान्य परिस्थतियों में उनका निप्टारा एक साल की भीतर होना चाहिए
02:48इस फैसले का सबसे बड़ा संदेश पैसों से कई ही बड़ा है
02:51ये फैसला उन करोडों महिलाओं के अद्रिश्य श्रम को कानूनी सम्मान देता है
02:56जिनकी महनत पर पूरा परिवार ख़़ा होता है
02:59लेकिन जिनके काम की कीमत अक्सर कहीं नहीं आखी जाती
03:02इसलिए अगर आप सोशल मीडिया पर ये दावा देखें कि अब हर ग्रहनी
03:0630,000 रुपे की कानूनी हगदार है तो सच्चाई जान लीजी
03:10सुप्रीम कोट ने हर महीला के लिए मासिक वेतन का आदेश नहीं दिया है
03:15बल्कि सड़क दुर्गटना मुआफजों के मामलों में उनके घरेलू श्रम को आर्थिक माननेता देने के लिए
03:2130,000 रुपे प्रती महा की एक आधार राशी तै करने की बात कही है
03:26यानि ये फैसला सिर्फ कानून का नहीं बलकि सम्मान का भी है
03:30एक ऐसा सम्मान जिसका इंतजार देश की करोडों ग्रहनिया लंबे समय से कर रही थी
03:35इस पूरे विशे में आपकी क्या राय है
03:37कि ग्रहनियों के लिए 30,000 रुबे की मासिक आए आपके हिसाब से सही है
03:56हुआ हुआ है
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