00:00आशूरा दस मुहर्म सन 61 हिज्री
00:10इसलामी तारीख का सियाह तरीन दिन
00:13मुसल्मानों की एक बड़ी फौज ने अपने ही नभी के प्यारे
00:17नवासे को अपने अहल औ अयाल और तकरीबन बहत्तर साथियों
00:21समीद गर्बला की सर्जमीन पर प्यासा जिबाह कर दिया
00:24इमाम हुसेन को जब मालुम हुआ कि उन्हें कतल करने की नियत से
00:32कई खुफिया लोग आम कपड़ों में काबा शरीफ में दाखिल हो चुके हैं
00:37तो उन्होंने खाना काबा की हुर्मत को पामल होने से बचाने के लिए
00:41अपने हज को उम्रे में बदला और कूफा की तरफ चल पड़े जहां से उन्हें हजारों खत मौसूल हुए थे
00:53रास्ते में उन्हें पता चला के उनके भीजे गए कासिद मुस्लिम बिन अगेल को कूफा में शहीद कर दिया गया है
01:01और इसी के साथ इमाम हुसेन को घर वालों समियत सब को नैनवा यानि कर्बला के मकाम पर हर तरफ से घिर लिया गया
01:21इमाम हुसेन ने इसलाम की सरबुलंदी की खातिर अपने 18 साला बेटे अली अकबर तक की कुर्बानी दी
01:29जिसे तलवारों, नेजों और तीरों से शहीद कर दिया गया
01:38और फिर जब तीन दिन के प्यासे बच्चे पानी की तलब से मचलने लगे
01:43तो अभास अलमदार ने अपने भाई इमाम हुसेन से पानी लाने की इजासत ली
01:49लेकिन वो मैदान से वापस ना आ सके और उन्हें बड़ी बेदर्दी से शहीद कर दिया गया
01:55यहां तक के इमाम हुसेन के छे महीने के बेटे अली अजगर तक को तीर मार कर शहीद कर दिया गया
02:07जब कोई न रहा तो इमाम हुसेन खूद मैदान की तरफ गए
02:12और उन्हें सजदे की हालत में सर काट कर शहीद कर दिया गया
02:16Salam ho us Hussain ibn Ali par
02:24ki jenhe Nabi sallallahu aliyahhi wa alihi wa sallam
02:28ne jenneti noguwano ka sardar qarar diya
02:31or saath kaha ki Hussain mujh se hai
02:34or mein Hussain se hoon
02:36or phir unki lashon par ghoڑe dhodai gaya
02:42or ahel-e-bait ki khawatin ko qaidi bina kar
02:45kufa or sham ke dherbaron
02:48or bazaaron me lye jaya gaya
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