00:00आपदाम अपहरतारम दातारम शर्बशंपदाम लोकाभिरामं स्रीरामं भूयो भूयो नमाम्याम
00:09प्यारे मित्रों जैश्यराम जैमातादी
00:11मित्रों आप से चर्चा करते हैं अधिक मास में माल पुवा का दान क्यों किया जाता है
00:19और कैसे करें इस दान को करने से बाधायें दूर हो जाती हैं इसी विशे पे करेंगे चर्चा अधिक मास
00:28में 33 मालपूहों को दान करने का बिधान बताया गया है
00:33इससे क्या होता है कि करज और बिवाह की बाधाएं भी दूर होती हैं। अधिकमास या पुर्षोतम मास के अदिश्ठात्रा
00:43देवता जो हैं भगवानी विश्ट्णू हैं। इस महिने में स्रीहरी भगवानी विश्ट्णू की पूजा की जाती है और मालपूओं का
00:51दान किया
01:00जाता है यह परमपरा सदियों पुरानी है। इसके पीछे का एक महत्तो और रहस से बहुत ही कम लोग जानते
01:10हैं।
01:11अधिक मास में क्यों किया जाता है माल पूय का दान? अधिक मास को पुर्षोत्तम मास कहते हैं क्योंकि इस
01:18महिने के देवता भगवानी विष्णु बताया गए हैं भगवानी विष्णु को माल पूय का भोग बेहद ही प्री है पुर्षोत्तम
01:26महिने में भगवानी विष्ण�
01:39पोहा ही क्योंदान करना चाहिए क्योंकि हिंदु धर्भ तेर्ब में 53 कोटी के देवी देऊता माने गए हैं. ऐसे में
01:4733 मालपूए का सम्मंद
01:5033 कोटी के देवी देवताओं से है
01:53साथ ही अधिक मास में 33 मालपुए का दान करने से
01:58प्रथवी दान करने के बराबर फल प्राप्त होता है
02:02इसे अपूप दान भी कहते हैं
02:05जो मालपुए है इसको अपूप दान भी कहा गया है
02:09अधिक मास में मालपुय का दान करने से सारे पापों का नाश होता है साथ ही इसमें मिलापुन फलवी जीवन
02:20में तमाम तरे की जो शमस्याएं हैं उनको दूर कर सकता है
02:24जैसे करजी की समस्या बिवाह या संतान के सुख में बाधा आना तरक्की में रुकावटे आना बैवाहिक समस्याएं दूर होती
02:35हैं जीवन में शुक और सम्रद्धी सांती बढ़ती है
02:39मालपुवा का दान करने से पूरा का पूरा पुर्ण फलप्राप्त होता है जब इसका सही विदि से दान किया जाए
02:48इसके लिए अधिक मास में गुड और घी से बने हुए मालपुवे तयार किये जाते हैं फिर उन्हें काशे के
02:57बरतन में रख करके भगवानी विश्टू को �
03:00भोग लगाया जाता है इसके बाद पूरी भक्ती और स्रद्धा के साथ किसी जरूरत मंद को किसी व्राम्मन को अपने
03:09किसी मान्य वर्ग को यह पुए दान किये जाते हैं जैस्री कृष्णा अगर चाहते हैं किसी भी तरह की जानकारी
03:18शंपर्ग करेंगे मैं पुना मिलता ह
03:22लिए आप सभी को जैजै स्रिशीता राम
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