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Bhojshala Case: कोर्ट की फटकार के बाद मौलाना के बदले सुर, क्या अब खुलेगा भोजशाला का पूरा सच? देखिए इस वीडियो में कि कैसे अदालती कार्यवाही के बाद मुस्लिम पक्ष की दलीलों पर सवाल खड़े हो गए हैं।

The ongoing legal battle over the Bhojshala complex in Madhya Pradesh's Dhar has intensified after recent court observations. Following a stern warning from the court, a prominent Maulana has issued a cautious statement to the community, sparking nationwide debate. This video explores the latest updates on the ASI survey, the court's stand on the temple-mosque dispute, and its implications on Indian politics and communal harmony.

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Transcript
00:00हिंदू समाज के लोगों को माँ पे पूजा पार्ट का धिकार दिया है वोट में भोशाला कॉंप्लेक्स को राजा भोज
00:05का माना है एक सरस्वती स्कूल माना है लड़निंग का
00:18अभी जो लोग इसको अपनी जीत मानने हैं जीत नहीं मानना चाहिए ठीक है एक निचले अदारत का फैसला है
00:24अपर कोट जाएंगे जैसे हमने बाबरी मस्जिद की लड़ाई को लड़ा है
00:29खुलूस के साथ इमानदारी के साथ प्रेम के साथ हम इसी तरह ये लड़ाई भी लड़ना चाहते हैं तक 2003
00:35में A.S.I. का जो आदेश था उसी को मानकर मुसल्मानों ने महाननमाज शुरू की थी
00:42A.S.I. सरकारी अदारा है उस पर किसी ने तलवार नहीं रखी किसी ने बंदूख नहीं रखी के भई
00:48ये आदेश जारी करो उन्होंने जैसा अच्छा समझा वैसा आदेश जारी किया
00:532003 से अब तक महां बराबर नमाज होती रही
00:57B.J.P. सरकार आने के बाद में ये विवाद फिर गरमाया
01:02अभी जो हाई कोट का फैसला आया है हम हाई कोट के फैसले का निरादर नहीं करते
01:08लेकिन अभी हमारे पास विकल्प है सुप्रिम कोट जाने का
01:11और सुप्रिम कोट ने हाई कोट के बहुत सारे फैसले निरस्ट किये है
01:16इसमें भी कोई दो रहा है नहीं
01:17आपने देखा होगा बाबरी मस्जिद मामले को लेकर
01:20A.S.I. के रिपोर्ट और हाई कोट का फैसला
01:23मुस्लिम खिलाफ था
01:26लेकिन सुप्रिम कोट ने A.S.I. की रिपोर्ट को निरस्ट किया
01:30और ये कहा कि हमें ऐसा कोई सुबूत नहीं मिला
01:32जिससे पता चले के मंदिर तोड़कर मस्जिद बनी हो
01:35ये बिलकुल सुप्रिम कोट के फैसले में लिखा है
01:39सुप्रिम कोट ने ये भी कहा कि बाबरी मस्जिद को गलत तरीके से तोड़ा गया
01:43सुप्रिम कोट ने ये भी कहा कि 1949 मुर्तियां गलत तरीके से रखी गई
01:47सुप्रिम कोट ने ये भी कहा कि जो लोग इसमें शामिल थे
01:51उनके खिलाफ कारवाई होनी चाहिए
01:53ये अलग बात है कि निचली अदालतों ने उनको बरी कर दिया
01:58मगर फिर भी जगा राम मंदरी को दे दी गई
02:01ये इस देश का दुर भागे है
02:03हमारी जो जुडिशेरी है
02:05वो कहां तक है और कैसे है
02:07बाबरी मस्जिद के फैसले ने सारी दुनिया में
02:10जिस तरह से हमारी जुडिशेरी को बताया और दिखाया है
02:14कि सब कुछ मामला मुसल्मानों के फैसले में होने के बावजूद
02:19जगा बाबरी मस्जिद को दे दिया गया
02:22मुसल्मान फिर भी खामोश रहा
02:24मुसल्मान ने कोई धरना परतशन नहीं किया
02:26कोई उस पर आपतियनक बयान किसी नहीं दिया
02:29हमने कोट का सम्मान किया
02:31हाँ इतना जरूर है कि कोट ने जो जगा दी थी हमें
02:34उसके अल्टरनेट हमने उसको सुविकार नहीं किया
02:37आज भी हो जोगी तो पड़ी भी है
02:38कोई उसको लेने को तियार नहीं है
02:40अगर हमारे यहां कोई ऐसा प्रावधान होता
02:43कि जहां मस्जिद है उसको एक बार तोड़ दो
02:46उसकी जगा कहीं और ले लो
02:47तो हम ले लेते हैं उस जगा को
02:49हमारे यहां प्रावधान है यह नहीं
02:50हमारी आस्था के मताविफ तो वो मस्जिद जहां थी
02:54है और रहेगी आस्था इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि सुप्रिम कोट ने खुद इस बात को माना है
02:59कि मंदिर तोड़के मस्जिद नहीं बनी तो इसका मतलब वो जगा सेफ जगा थी मस्जिद के लिए
03:04और सेफ जगा पर मस्जिद बनी और फिर उसको नजायस तरीके से तोड़ा गया और जगा मंदिर को दे दी
03:10गई
03:10और मैं ये भी किलिर करता हूँ कि जहां बाबरी मस्जिद थी महा मंदिर नहीं बना
03:15मंदिर महा बना जो 66 एकड़ जमीन नरसी मराओ के टाइम में एकवायर कर ली गई थी उस जगा पर
03:23मंदिर बना है
03:24ये भी एक बहुत बड़ा खुलासा मैं कई बार टीवी पर कर चुका हूँ लेकिन लोग इस पर ध्यान नहीं
03:29देते
03:29वो जगा आज भी खाली है अगर सरकार चाहती महा मंदिर भी बन सकता है महा मस्जिद भी बन सकती
03:35थी लेकिन सरकार नहीं चाहती चुका इसका अपना वोट का मसला है
03:39दूसरी बात अभी जो लोग इसको अपनी जीत मानने हैं जीत नहीं मानना चाहिए
03:44ठीक है एक निचले अदालत का फैसला है अपर कोट जाएंगे अपर कोट जो भी तै करेगा
03:50हम मैं मुसल्मानों से कपील और करना चाहता हूं इसमें भाउक होने की जरूत नहीं है
03:55इसमें अग्रेसिव भी होने की जरूत नहीं है जैसे हमने बाबरी मसीद की लड़ाई को लड़ा है
04:01खुलूस के साथ इमानदारी के साथ प्रेम के साथ हम इसी तरह ये लड़ाई भी लड़ना चाहते हैं
04:07अगर कोट की हमारे देश की अदालत ये कह देती है कि तुमारा अधिकार यहां भी नहीं है
04:13तो हम उसको भी मानेंगें क्योंकि इसके लावा हमारे पास कोई अल्टरनेट है भी नहीं
04:18कोई रास्ता भी नहीं है
04:19मैंने पहले क्लियर कहना, अगर वेकलपिक भूमी का कोई रास्ता होता हमारी आस्था में, तो हम बाबरी मस्जिद वाली जमीन
04:26को ले लेते, हमने उस जमीन को इसलिए नहीं लिया, चूंकि वेकलपिक रास्ता ही नहीं हमारे यहां, कि एक मस्जिद
04:34की जगा को दूसरी जगा क
04:46और मस्जिदेन नमाज पढ़ने की जगह हैं हमारी आस्था का केंद्र हैं अगर ऐसा कुछ
04:55इसलाम में होता कि मस्जिद ना भी हो तब भी चलो कोई बात नहीं चल जाएगा हाँ ये जरूर है
05:01कि आप नमाज कहीं भी पढ़ सकते हैं घर में भी पढ़ सकते हैं कहीं और भी पढ़ सकते हैं
05:06लेकिन मस्जिदें हैं नमाज पढ़ने के लिए तो उस विकल्प को हम कैसे आस
05:23इंशाला की है कोई बात नहीं हमने जिसे बाबरी मस्जिद को सहा है हम इसको भी सहेंगे
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