00:00हिंदू समाज के लोगों को माँ पे पूजा पार्ट का धिकार दिया है वोट में भोशाला कॉंप्लेक्स को राजा भोज
00:05का माना है एक सरस्वती स्कूल माना है लड़निंग का
00:18अभी जो लोग इसको अपनी जीत मानने हैं जीत नहीं मानना चाहिए ठीक है एक निचले अदारत का फैसला है
00:24अपर कोट जाएंगे जैसे हमने बाबरी मस्जिद की लड़ाई को लड़ा है
00:29खुलूस के साथ इमानदारी के साथ प्रेम के साथ हम इसी तरह ये लड़ाई भी लड़ना चाहते हैं तक 2003
00:35में A.S.I. का जो आदेश था उसी को मानकर मुसल्मानों ने महाननमाज शुरू की थी
00:42A.S.I. सरकारी अदारा है उस पर किसी ने तलवार नहीं रखी किसी ने बंदूख नहीं रखी के भई
00:48ये आदेश जारी करो उन्होंने जैसा अच्छा समझा वैसा आदेश जारी किया
00:532003 से अब तक महां बराबर नमाज होती रही
00:57B.J.P. सरकार आने के बाद में ये विवाद फिर गरमाया
01:02अभी जो हाई कोट का फैसला आया है हम हाई कोट के फैसले का निरादर नहीं करते
01:08लेकिन अभी हमारे पास विकल्प है सुप्रिम कोट जाने का
01:11और सुप्रिम कोट ने हाई कोट के बहुत सारे फैसले निरस्ट किये है
01:16इसमें भी कोई दो रहा है नहीं
01:17आपने देखा होगा बाबरी मस्जिद मामले को लेकर
01:20A.S.I. के रिपोर्ट और हाई कोट का फैसला
01:23मुस्लिम खिलाफ था
01:26लेकिन सुप्रिम कोट ने A.S.I. की रिपोर्ट को निरस्ट किया
01:30और ये कहा कि हमें ऐसा कोई सुबूत नहीं मिला
01:32जिससे पता चले के मंदिर तोड़कर मस्जिद बनी हो
01:35ये बिलकुल सुप्रिम कोट के फैसले में लिखा है
01:39सुप्रिम कोट ने ये भी कहा कि बाबरी मस्जिद को गलत तरीके से तोड़ा गया
01:43सुप्रिम कोट ने ये भी कहा कि 1949 मुर्तियां गलत तरीके से रखी गई
01:47सुप्रिम कोट ने ये भी कहा कि जो लोग इसमें शामिल थे
01:51उनके खिलाफ कारवाई होनी चाहिए
01:53ये अलग बात है कि निचली अदालतों ने उनको बरी कर दिया
01:58मगर फिर भी जगा राम मंदरी को दे दी गई
02:01ये इस देश का दुर भागे है
02:03हमारी जो जुडिशेरी है
02:05वो कहां तक है और कैसे है
02:07बाबरी मस्जिद के फैसले ने सारी दुनिया में
02:10जिस तरह से हमारी जुडिशेरी को बताया और दिखाया है
02:14कि सब कुछ मामला मुसल्मानों के फैसले में होने के बावजूद
02:19जगा बाबरी मस्जिद को दे दिया गया
02:22मुसल्मान फिर भी खामोश रहा
02:24मुसल्मान ने कोई धरना परतशन नहीं किया
02:26कोई उस पर आपतियनक बयान किसी नहीं दिया
02:29हमने कोट का सम्मान किया
02:31हाँ इतना जरूर है कि कोट ने जो जगा दी थी हमें
02:34उसके अल्टरनेट हमने उसको सुविकार नहीं किया
02:37आज भी हो जोगी तो पड़ी भी है
02:38कोई उसको लेने को तियार नहीं है
02:40अगर हमारे यहां कोई ऐसा प्रावधान होता
02:43कि जहां मस्जिद है उसको एक बार तोड़ दो
02:46उसकी जगा कहीं और ले लो
02:47तो हम ले लेते हैं उस जगा को
02:49हमारे यहां प्रावधान है यह नहीं
02:50हमारी आस्था के मताविफ तो वो मस्जिद जहां थी
02:54है और रहेगी आस्था इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि सुप्रिम कोट ने खुद इस बात को माना है
02:59कि मंदिर तोड़के मस्जिद नहीं बनी तो इसका मतलब वो जगा सेफ जगा थी मस्जिद के लिए
03:04और सेफ जगा पर मस्जिद बनी और फिर उसको नजायस तरीके से तोड़ा गया और जगा मंदिर को दे दी
03:10गई
03:10और मैं ये भी किलिर करता हूँ कि जहां बाबरी मस्जिद थी महा मंदिर नहीं बना
03:15मंदिर महा बना जो 66 एकड़ जमीन नरसी मराओ के टाइम में एकवायर कर ली गई थी उस जगा पर
03:23मंदिर बना है
03:24ये भी एक बहुत बड़ा खुलासा मैं कई बार टीवी पर कर चुका हूँ लेकिन लोग इस पर ध्यान नहीं
03:29देते
03:29वो जगा आज भी खाली है अगर सरकार चाहती महा मंदिर भी बन सकता है महा मस्जिद भी बन सकती
03:35थी लेकिन सरकार नहीं चाहती चुका इसका अपना वोट का मसला है
03:39दूसरी बात अभी जो लोग इसको अपनी जीत मानने हैं जीत नहीं मानना चाहिए
03:44ठीक है एक निचले अदालत का फैसला है अपर कोट जाएंगे अपर कोट जो भी तै करेगा
03:50हम मैं मुसल्मानों से कपील और करना चाहता हूं इसमें भाउक होने की जरूत नहीं है
03:55इसमें अग्रेसिव भी होने की जरूत नहीं है जैसे हमने बाबरी मसीद की लड़ाई को लड़ा है
04:01खुलूस के साथ इमानदारी के साथ प्रेम के साथ हम इसी तरह ये लड़ाई भी लड़ना चाहते हैं
04:07अगर कोट की हमारे देश की अदालत ये कह देती है कि तुमारा अधिकार यहां भी नहीं है
04:13तो हम उसको भी मानेंगें क्योंकि इसके लावा हमारे पास कोई अल्टरनेट है भी नहीं
04:18कोई रास्ता भी नहीं है
04:19मैंने पहले क्लियर कहना, अगर वेकलपिक भूमी का कोई रास्ता होता हमारी आस्था में, तो हम बाबरी मस्जिद वाली जमीन
04:26को ले लेते, हमने उस जमीन को इसलिए नहीं लिया, चूंकि वेकलपिक रास्ता ही नहीं हमारे यहां, कि एक मस्जिद
04:34की जगा को दूसरी जगा क
04:46और मस्जिदेन नमाज पढ़ने की जगह हैं हमारी आस्था का केंद्र हैं अगर ऐसा कुछ
04:55इसलाम में होता कि मस्जिद ना भी हो तब भी चलो कोई बात नहीं चल जाएगा हाँ ये जरूर है
05:01कि आप नमाज कहीं भी पढ़ सकते हैं घर में भी पढ़ सकते हैं कहीं और भी पढ़ सकते हैं
05:06लेकिन मस्जिदें हैं नमाज पढ़ने के लिए तो उस विकल्प को हम कैसे आस
05:23इंशाला की है कोई बात नहीं हमने जिसे बाबरी मस्जिद को सहा है हम इसको भी सहेंगे
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