00:01चलियार पंचायद के प्लाकल चोला में रहने वाले 24 आदिवासी परिवारों को हर साल अपने घर छोड़ने और कांजीरा पुझा
00:10नदी के किनारे जागर बसने के लिए मजबूर होना पड़ता है क्योंकि उनके इलाके में पानी के सभी श्रोत पूरी
00:17तरह से सूग शाते हैं
00:19केरल के मलपुरम जिली में इन आदिवासी परिवारों की जिंदगी बस गुजारे लायक चीजों तक ही सिमट कर रह गई
00:26है
00:26वे पत्रीले जमीन पर तिरपाल के नीचे रहते हैं और उन्हें साफ सफाई बिजली या बुन्यादी सुविधाओं में से कुछ
00:34भी नसीब नहीं होता
00:37घर बदलने की वज़ाईया है कि हमारी कालोनी एक ऐसा इलाका है जहां पानी की भारी कमी है
00:43बारिश के मौसम में तो पानी मिल जाता है लेकिन गरमियों में हमारे पास न तो पानी होता है और
00:49नहीं कोई बुन्यादी सुविधाएं
00:52जब हमारे बच्चे स्कूल से लौटते हैं तो हमारे पास उन्हें नहलाने या उनके कपड़े धोने का भी कोई साधन
00:58नहीं होता
00:59यही कारण है कि हम अपने परिवारों के साथ कांजीर पुझा नदी के किनारे यहां रहने को मजबूर हैं
01:05हमारी जिन्दगी पूरी तरह से इसी नदी पर निखाए
01:11यहां रहने वाले लोगों का कहना है कि यह समस्या सालों से बनी होई है
01:16घर तो बन गए लेकिन पीने के पानी की सही विवस्था कभी नहीं हो पाई
01:21हमारे घर में पीने का पानी नहीं है
01:23We have been 5-6 years old, but we have not been water.
01:28We are not alone.
01:30This is only our vote for our people.
01:34After our people, we have no idea.
01:38This area is a lot of people who have come to us.
01:42This area is a lot of people who have come to us.
01:47This area is a lot of people who have come to us.
02:15प्पाते हैं।
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