00:01जम्मू कश्मीर की गुर्जर और बकरवाल जन्जातियां एक बार फिर अपने वार्षिक प्रवास पर निकल पड़ी हैं।
00:07वे अपने पशों के लिए चरागाह की तलाश में चेनाब घाटी के पहाडी चरागाहूं की ओर जा रही हैं।
00:14हलांकि बे मौसम हीमपात और बारिश के कारण यह यात्रा आसान नहीं है। कठिन रास्ते और भी ज्यादा खतरनाक हो
00:22गए हैं।
00:23फिर भी कठुआ, सांबा और जम्मू के मैदानी इलाकों से सैकलों परिवार सदियों पुरानी अपनी मौसमी यात्रा के लिए दुर्गम
00:31भूभाग और भीशन मौसम का सामना कर रहे हैं।
00:36अपने पशुक के साथ ये परिवार लगभग एक महिने से पैदल यात्रा कर रहे हैं।
00:41कई परिवारों ने खराप मौसम के कारण अपने पशुक हो दिये हैं।
00:45और वे शिकायत करते हैं कि उन्हें सरकारी सहयता भी बहुत कम ही मिल पाती है।
00:51अपने बहुत मुश्किल होई जी हम जगापरु जिरे टुर्या बारश बहुत होई है।
01:07बड़ी बड़ी मुश्किल होती है बारशों में माल मरता है चलता है क्या करना हमने पिर।
01:11बर्फ बहुत है।
01:15इन लोगों की मुश्किले सिर्फ खराब मौसम तक ही सीमित नहीं है।
01:20कई लोगों का कहना है कि रोजगार के अफसरों की कमी ने शिक्षित युवाओं को भी इस अनिश्चित घुमंतु जीवन
01:26को जारी रखने के लिए मजबूर कर दिया है।
01:49कुछ लोगों का ये भी कहना है कि उन्हें आजीवी का चलाने का कोई और तरीका आता ही नहीं है।
02:13पारंपरिक रूप से आदिवासी खाना बदोश गर्मियों के दौरान अपने पशों के साथ उतरी हिमाले की उपरी धलानों पर चले
02:20जाते हैं।
02:21और टेड़ी मेडे रास्तों पर सेकड़ो मील पैदल चलकर सर्दियों में मैदान इलाकों में लोटाते हैं।
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