नंबियारकुन्नु गांव केरल के वायनाड और तमिलनाडु के नीलगिरी की सीमाएं मिल जाती हैं. इस गांव में भी विधानसभा चुनावों की गर्मी है. बेशक ये गांव नक्शे पर दो राज्यों में बंटा हो, लेकिन यहां के लोगों की चिंताएं और मांगें एक जैसी हैं. ये केरल और तमिलनाडु दोनों राज्यों के प्रशासन के लिए हैं. दोनों ओर विकास की उम्मीदें और बढ़ते इंसान-जानवर संघर्ष का बोझ है. कई लोगों का कहना है कि स्ट्रीट लाइट की कमी और जंगली जानवरों के खतरे के कारण शाम के बाद इलाके में डर का माहौल बन जाता है. लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में कोई स्ट्रीट लाइट नहीं है. न तो केरल की ओर और न ही तमिलनाडु का ध्यान इस तरफ है. तरफ जैसे ही शाम ढलती है, जंगली जानवरों का खतरा बढ़ जाता है. जंगली जानवरों का आतंक बढ़ने के कारण लोग रात में बाहर निकलने से डरते हैं. कुछ मतदाताओं का कहना है कि यहां जानवरों के घातक हमले पर्यटन के विकास में भारी रुकावट हैं. इसके स्थायी समाधान की मांग उठ रही है.
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