00:03रश्मी और अमर लॉगडाउन के चलते डीजिंग एप पर मिलते हैं
00:07उसी बीच उनकी बॉण्डिंग बहुत अच्छी बन जाती है
00:10और दोनों एक दूसरे से प्यार करने लगते है
00:15पस लॉगडाउन खत्म होते ही चेटमंगी पच्छा दे
00:20उससे पहले घर में बात तो कर लो
00:22अरे मापापा कभी मना नहीं करेंगे
00:25अमर के बात सुन रश्मी खुश हो जाती है
00:28ऐसी ही दिन बित्ते हैं और देखते ही देखते लॉगडाउन खुल जाता है
00:32जिसके अगले ही दिन अमर अपने परिवार के साथ रिष्टा लेकर रश्मी के घर पहुँच जाता है
00:39अभी लॉगडाउन खुला ही है और कोरोना तो खतम भी नहीं हुआ
00:43इसलिए ज्यादा कुछ ना करके अगले कुछ दिनों में छोटे फंक्शन के साथ शादी कर लेते हैं
00:49अमर के पापा की बात पर सब सहमत हो जाते हैं
00:53कुछ दिन बाद दोनों की शादी हो जाती है और रश्मी अपने ससुराल पहुँच जाती है
01:00बेटा शादी तो तुने अपनी मर्जी से कर ली लेकिन बहु को बोल देना इस घर में हुकम मेरा ही
01:06चलेगा
01:07इसलिए अपना राज जमाने की कोशिश भी ना करें
01:12मा रश्मी को यहां सिर्फ प्यार आशिर्वाद और अपना पन चाहिए पैसा या राज नहीं
01:18बेटी की बात पर सास मूँ बनाये वहां से चली जाती है
01:21और अब वो हर रोज रश्मी को परिशान करना और ताने देना शुरू कर दीती है
01:27देखो यह है आजकल की लड़की
01:30इंटरनेट पर लड़कों से बाते करते हुए इन्हें शरम भी नहीं आती
01:34और यहां तो देखो कितनी सीधी सुशेल बन कर दिखा रही है
01:40ममी शादी के रिष्टे वाले इंटरनेट एप से जिब किसी को कोई दिकत नहीं है
01:45फिर डेटिंग एप के जरिये मिला किस तरह गलत हो सकता है
01:49रश्मी के डेटिंग एप वाली बात सुन उसकी हैरान सास तुरंत तुनक कर पूरे घर को सिर पर उठा लेती
01:56है
01:56जिसकी आवाज सुन अमर और उसके पापा भी वहां आ जाते है
02:00हाए मेरी माता इतना बड़ा जूट डेटिंग एप को इंटरनेट के जरिये मिली है
02:07बोलकर इस कलमुही को मेरे सर लाब इठा दिया
02:09अरे नास पिटी तुझे जरा भी शरम नहीं आई
02:12वहां न जाने कितने लड़कों से गुलु गुलु गुलु करके
02:16तुझे मेरा ही लड़का मिला था फसाने के लिए
02:19मा मुझे ते समझ नहीं आ रहा क्या बोले जा रही हो
02:23डेटिंग एप इस्तिमाल करना कोई अपराद नहीं है
02:25और तुम रश्मी को ऐसा कैसे बोल सकती हो
02:27मैं भे तो था उस एप पर
02:30पहले उसके लिए मा से जूट बोला और अब लड़ाई कर रहा है
02:34सास और अमर की बात सुनकर रश्मी हैरान खड़ी रहती है
02:38अमर तुमने घर में जूट क्यों बोला
02:41ये सब देख रही हो ना इसी की वज़े से जूट बोलना पड़ा
02:45एक तरफ अमर और रश्मी की ये बात चल रही होती है
02:48वहीं दूसरी तरफ सास का नौन स्टॉप क्लेश सब को परिशान कर देता है
02:54सब एकदम चुप जो हुआ सो हुआ अब मुझे कुछ ना सुनाई दे
02:59पति की बात सुन सास चुप होकर वहाँ से चली जाती है
03:03लेकिन अब वो रश्मी के सिर्फ दुनिया भर के सारे काम डाल कर
03:07उसका जीना पहले से भी ज्यादा मुझे कर देती है
03:11ममी मैं आपका गुसा समझ सकती हूँ
03:13आपको जो करना है कर लीजिए
03:15मैं कभी कुछ नहीं बोलूँगी
03:17उमीद है किसी दिन तो आपका गुसा शान्थ होगा
03:20और नफरत प्यार में बदलेगी
03:23रश्मी की अच्छाई को उसका नाटक समझ कर
03:25सास गुसे के सात्वे आसमान पर चड़ जाती है
03:29और उसी शाम रश्मी को नीचा दिखाने के लिए
03:32अपनी सहलियों को घर बुलाकर उसकी बुराया करने लगती है
03:36और कुशलिया क्या बताओं आज कल के बच्चिना बहुत एडवांस हो गया है
03:42पहले रिष्टे घर परिवार वाले सब देख परक्के कराते थे
03:46और अब ये लोग खुद न जाने कहा कहा मिलकर
03:50खुदी सब कुछ पक्का करके हमें बता देते हैं
03:53लड़की का कैसा दिन धरम, कैसा इमान, कैसा चरित्र कुछ नहीं पता
03:58बास प्यार किया और घर लाकर बिखा देते हैं
04:03अरे ऐसा क्यों बोलती हो
04:05आज काल बच्चे अपने आप में बहुत समझदार हो गये हैं
04:09और फिर पूरी जिन्दगी तो उन दोनों को ही साथ निपानी है
04:13अपनी पसंद से शादी कर भी ले तो क्या दिकत तो ही देख ले
04:18पहले इतना अच्छा बेटा और अब सोने पर सुहागे जैसी सर्वगुण संपन न पहु
04:24अर पता है अभी कुछ दिन पहले मेरी बेटी ने मुझे डेटिंग एप के बारे में बताया
04:29जहां लड़का लड़की अपनी पसंद से अपने आप एक दूसरे को चुन लेते हैं
04:34और फिर अगर सब सही रहता है तो बात आगे भी वड़ जाती है
04:37अरे इसमें इतना खुश होकर क्या बता रही हो ये तो गलत है
04:41न जाने कौन क्या है कितना जूट कितना सच है
04:46अरे पर सोचो जब तुम किसी के बताय रिष्टे को देखने जाते हो
04:51तो क्या एक ही बार देखने से सच जूट का पता लगा सकती हो
04:55जरूरी नहीं कि बच्चों का लिया फैसला हमेशा गलत हो
04:59अरे बहुत बार हमसे भी तो गलत फैसले होते हैं ना
05:02अच्छे बुरे लोग तो हर जगह मिल सकते हैं
05:06फिर इसमें सर्फ बच्ची ही गलत कैसे
05:09सहलियो की बात सुन सास सोच में पढ़ जाती है
05:12और इसी तरह कुछ दिन बीच जाते हैं
05:15जिसमें ना तो वो रश्मी को परिशान करती है
05:18और ना ही कोई ताना सुनाती है
05:20जिसे देख रश्मी परिशान हो जाती है
05:24ममी, आपकी तब्यत तो ठीक है न
05:26कुछ दिनों से देख रही हैं
05:28तो आप मुझे कुछ बोलती ही नहीं?
05:30तो मेरा परेशान करना
05:32ज्यादा अच्छा लगता है क्या?
05:34नहीं, आपकी
05:36शान्ती उससे ज्यादा परेशान कर रही है
05:39शान्ती इसलिए है
05:41क्योंकि मुझे एसास हो गया है
05:43कि गलत तुम लोग नहीं
05:45मेरी सोच है
05:46प्यार तो एक संदर आइसास और शादी खुबसूरत साथ है
05:50अगर ये साथ सच्चा है तो कहीं पर भी किसी भी तरह जुड़ा हो उसे कोई फर्क नहीं पड़ता
05:59आप कौन है इतनी अच्छी बाते मेरी पत्नी तो नहीं बोल सकती
06:08क्या आप भी
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