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  • 20 minutes ago

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00:01बहु प्रिया को आदत थी हर काम में शौट कट ढूणने की
00:05क्योंकि उसे हर काम में आले साता था
00:09अरे यार दूद गरम कर दो न
00:12हरे पेट में जाके तो दूद ठंडा ही हो जाना है न
00:15तो ठंडा ही पीलो न
00:18अरे तुम मेरा सर गरम मत करो यार
00:20अच्छा है सर गरम हो जाए तो सर पे दूद रख लेना
00:25वो भी गरम हो जाएगा
00:27एक बात बताओ तुम इतनी आलसी क्यों हो
00:32अरे बोलो न इतनी आलसी क्यों हो
00:36प्रिया जवाब दो
00:41जवाब देने में आलस आ रहा है
00:44पती वहाँ से उठके बढ़ बढ़ाते हुए
00:46खुद दूद गरम करने चला जाता है
00:49और प्रिया अपनी आंके बंद करके
00:52सोफे पर लेट जाती है
00:55प्रिया की इस आदत का घर वाले सबको पता तो था ही
00:58आप तो बाहर वाले भी उसको आलसी बोलने लगे थे
01:03अरे बहुत सुन ना एक गुड नियूज है
01:06क्या मा जी आप सब कुछ मेरे नाम करने वाली है क्या
01:11अरे पस तेरा दिमाग पैसो में ही लगा रहता है
01:15मा जी आपको तो पता है कि मैं गांधी जी की कितनी बड़ी फैन हूँ
01:20और गांधी जी तो नोट पे ही मिलते है ना
01:24इसलिए पैसो के अलावा कहीं दिमाग ही नहीं रहता
01:27वैसे गुड नियूज क्या है
01:29अरे गुड नियूज ये है कि मेरे कुछ सहलिया आने वाली है
01:34हैं ये भी कोई गुड नियूज है क्या
01:38जब भी आपकी सहलिया आती हैं
01:40मेरे किसी ना किसी काम में खोट निकाल की जाती है
01:44हमेशा कोई कमे दिखी जाती है उनको मेरे काम में
01:47और मुझे आल से बोलते हैं वो लोग
01:50अरे तो ऐसा समझ कि आज तेरे पास मौका है
01:54उनकी नजरों में अच्छा इंप्रेशन जमाने का कैसे कैसे उनके लिए खाने की इतनी स्वादिष्ट चीज़े बना कि बे उंगलिया
02:04चाटती रह जाए माजी ये तो आप मुझे नया काम पकड़ा रही हो अरे मेरी सहलियों से तारीफ पानी है
02:14कि नहीं हाँ पानी तो है तो
02:19बस जाओ बन जाओ बावर्ची लगाओ तड़का कल शाम को आएंगी वो अगले दिन सास सुबह से घर के बाहर
02:30अपनी सहलियों के पास चली जाती है और शाम को सब प्रिया के हाथ का खाना खाने घर आते हैं
02:38आज देखते हैं के प्रिया बना दी क्या है हाँ हाँ पिछली बार हमने बोला कुछ हलका खाएंगे तो पापड़
02:47फ्राई करके ला दिये थे बस
02:49हाँ और उसके पहले जब आये थे और बोला था कि भारी खाना खाना है तो तर्बूज काट कर ले
02:57आए थी बोल रही थी तर्बूज भारी होता है ना
03:03अरे बस भी करो इतनी बुरी नहीं है मेरी बहू तब ही बहू वहां खाना लेकर आती है पनीर कोफता
03:12भींदी मसाला शाही मसाला दाल डबल तड़का लच्छा पराठा मिस्सी रोटी अरे बस बस बहू इतना सारा खाना अरे अभी
03:24तो और भी है फ्राइड राइस भी है अ�
03:28अरे शुपलाना दो भूली गई मैं अरे लगता है पुशले बार की कमी आज पूरी कर ही देगे बहू हाँ
03:39हाँ आप खाईए तो हाँ खाएंगे तो सही इतना खाना बना तो दिया है अब देखना भी तो पड़ेगा ना
03:47की बना कैसा है हाँ हाँ लगा ले भोग खुद को
03:59शानदार जबरदस्त जिन्दबाद मज़े आ गए प्रिया प्रिया की साज भी कमाल है बहू को क्या जाइकेदार खाना बनाना सिखाया
04:09है अरे मान गए बई इतना अच्छा खाना तो हम में से किसी की बहू ने बनाती और हम भी
04:17नहीं बनाते जूट कियों बोले हैं हाँ हा�
04:23खाने पे ध्यान दो बोलती ही रहोगी तो खाऊंगी कब एलो ठोड़ा पनीर और ले लो सास भी सहलियों के
04:32साथ खाना खाने लगती है पर बहु के साथ अपनी भी तारिफ सुनकर सास मन ही मन फूली नहीं समा
04:39रही थी प्रिया ने बड़ी खुशी से सब को खाना परोसा और
04:44और सबने जट से खाना खतम भी कर दिया
04:46राधे राधे मजा आ गया
04:49और अथा गई खाना खाते खाते
04:53अब बस बिस्तर लग जाए मेरा
04:55अब तो जब भी मेरे घर महमान आएंगे
04:59प्रिया को ले जाया करूंगी खाना बनाने के लिए
05:02महमान भी खुश हो जाएंगे
05:05सास खुश है कि प्रिया की इमेज
05:08अपनी सहलियों के सामने काफी सुधर गई है
05:11प्रिया खाने के बरतन समेटती है
05:13इतने में तीनों सहलियां हाथ धोने किचन में चली जाती है
05:17तभी एक सहलि देखती है कि किचन स्टेंड पर काफस पड़ा हुआ है
05:22वो सोचती है कि काफस को डस्ट पीन में डाल दे
05:25जैसे ही वो उसे उठाती है तो देखती ही रह जाती है
05:28दरसल वो एक बिल है
05:30जिसमें वो सारी चीज़े लिखी है जो उन्होंने अभी अभी खाई है
05:35वो चुप चाब बिल उठा कर बाहर आ जाती है
05:38और उसके पीछे बाकी दो सहलिया भी आती है
05:43प्रिया खाना अच्छा बनाया था
05:46सच कहूं तो बहुत अच्छा बनाया था
05:49थैंक यू थैंक यू बहुत अच्छा लगा सुनकी
05:53हाँ पर जिसने बनाया वो इतनी तारीफ सुनता तो उसे और भी अच्छा लगता
05:59क्या मतलब
06:01ये बिल देखो तुमारी बहुने आनलाइन ओर्डर किया था खाना
06:08अरे तारीफ तो आज की ही है ना
06:11हाँ हाँ आज की ही है
06:13प्रिया ये सब सही है क्या
06:16प्रिया अपना सर जुका लेती है
06:19सास सब समझ जाती है कि बहु की जोरी पकड़ी गई है
06:24इतना भी आलस अच्छा नहीं प्रिया
06:28अरे बता ही देती कि बाहर का खाना है
06:31मैं बाहर का खाना खाती नहीं हूँ
06:34तीनों सहलिया वहाँ से जारी होती है कि तभी उनमें से एक मुड़कर कहती है
06:39अब ये तो बताओ कि खाने की रेटिंग बभु को दे या डिलिवर करने वाले को
06:45प्रिया समझ जाती है कि शौटकट लेने के वज़ा से उसके साथ सास को भी ये बेजज़ती छेलनी पड़ी
06:52और वो कसम खाती है कि अब से शौटकट से नहीं मैनद से काम करेगी
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