00:02बड़ी पहू वर्षा हर काम में बहुत तेज थी
00:05वही छोटी वहू हर्षा हर काम आराम से करती
00:09वर्षा को अपनी तेज़ी पर बहुत घमंड था
00:12वो बाद बाद पर हर्षा को ताना मारा करती
00:14एक दिन वर्षा किचन में खाना बना रही होती है
00:17और हर्शा से कहती है देवरानी जी इतना धीमे धीमे खाना बनाओगी तो लोग भूख से मर जाएंगे पीछले जनम
00:26में कचुआ थी क्या
00:28मेरा तो पता नी आप बहुत तेजो आप पिछले जनम में घोडा थी क्या
00:36वर्शा आराम से चली जाती है खाना खाने के बाद वर्शा का पती गौतम हर्शा का पती लोकेश और उनके
00:44मादा पिता बैठ कर टीवी देख रहे होते हैं तबी सास कहती है
00:48अरे, रामायन लगा दो हर्शा
00:53हर्शा धीरे धीरे चैनल बदलती है
00:57जब तक रामायन की चैनल पर पहुँच उगी
00:59रावन मर भी चुका होगा
01:02हाँ बेटा हर्शा, जल्दी लगा दे न
01:05राम भगवान के दर्शन कर लू
01:08जी, लगा तो रही हूँ
01:10इतना स्लो, सासु मा इतने में तो अयोध्या जाके राम भगवान के दर्शन कर आएंगी
01:18सब वर्शा की बात पर हस्ते लगते है
01:20वर्शा हर्शा के हाथ से रिमोट लेकर रामायन लगा देती है
01:24हर्शा बुरा नहीं मानती और वो भी हस्ते हुए वहाँ से चली जाती है
01:29एक दिन हर्शा खाना खा रही होती है
01:32तबी वर्शा वहाँ के कहती है
01:35हरे कितना धीमेदी में खा रही हो
01:37इतने में तो शादी में सौ लोग खाना खा लेते
01:40आदे घंटे से खाना खा रही हो तुम
01:45अरे खाने को चबा चबा कर खाना चाहिए
01:48हाँ हाँ आप तो चबा के भी खाती हो और दबा के भी
01:56अरे आपको मेरे धीरे खाने से दिक्कत है या ज्यादा खाने से
02:01अरे आप धीमे खाओ या ज्यादा खाओ मुझे क्या
02:04बस मैं ये कहने आई थी कि सुबर कुछ महमान आ रहे हैं
02:08जल्दी उटके खाना बना लिना, देर मत करना
02:13साथ में बनाते हैं न
02:16तुम्हारे साथ बनाऊंगी तो स्पीड को पांच वे गियर से पहले गियर पर लियाना पड़ेगा
02:21अरे बही तुम्हारे साथ रहकर तो मेरी तेज रफ़दार पर भी असर पड़ेगा
02:25और मैं भी तुम्हारी तरह हौले हौले काम करने लगए सब
02:31ठीक है, मैं पराटे बना लूГी और सब्सी बना लूँगी
02:37आप चपाती बना लेना और दाल बना लेना
02:40हाँ हाँ ठीक है पर अलग-अलग ही बनाएंगे
02:43अगले दिन हर्शा जल्दी उठके काम करने लगती है
02:47और वर्शा सुबह उठके ये सोच के वापस सो जाती है
02:50कि काम तो वो तेज करी लेती है
02:52अगर थोड़ी देल सो भी जाएगी
02:54तो भी हर्शा से पहले तो काम निप्टा ही लेगी
02:58हर्शा बेटा आज भगवान के लिए थोड़ा जल्दी हाथ चलाना हाँ
03:03महमान आने ही वाले है
03:06जी हाँ मा आटा गुन लिया है आलू बल रहे है
03:11पराठी बनाने ही वाली हूँ फिर सबसी भी बना लूँगी
03:14इतने में ही वर्शा वहाँ आ जाती है
03:18मा जी मेरा तो आप टेंशन ही मतलो अभी उठी हूँ लेकिन देखना
03:23खाना फटा फट राज धानी एक्सप्रेस की स्पीड से बना दूँगी
03:27इतने में ही महमान आ जाते है
03:30आईए आईए आईए खाना बन ही रहा है
03:34चाय बनवा लेती हूँ पहले आपके लिए
03:37सास किचन में आती है
03:40वर्शा वो लोग आ गये चाय बना दे जल्दी से
03:44हर्शा को नहीं बोल रही क्योंकि वो तो सुबह की चाय देने में शाम कर देगी
03:52चाय बन भी चुकी है माजी
03:54वर्शा तेज ही नहीं सबसे तेज है
03:57आप चलिए मैं चाय लेकर आती हूँ
03:59वर्शा महमानों के सामने चाय लेकर जाती है
04:02ये हमारी बहू है वर्शा
04:05तेज वर्शा कहते है इसको
04:08हर काम में इतनी तेजी रखती है
04:11जैसे मिलखा सिंग भाग रहा हो
04:16अरे वावा, फिर तो खाना भी जल्दी मिलेगा हमको
04:21हाँ हाँ, आप चाई नाश्टा खतम कर लेंगे
04:25उसके पहले ही वर्षा जल्दी से स्वादिष्ट खाना भी लेकर आ जाएगी
04:32बादा तो कर लिया जल्दी खाना देने का
04:35आपकी चापाती भी नहीं बनी और डाल भी नहीं उबली
04:39फिर भी तुमसे पहले काम खतम हो जाएगा मेरा
04:42तुमारी तरह नहीं हूँ, घड़ी की सबसे पतली स्वीकी जैसे धीमे धीमे धीमे काम करती हो तूँ
04:48बस, वर्षा अपने तेज हाथों से दाल कुकर में चड़ाती है और आटा निकालके गूंतने लगती है
04:55थोड़ी दिर में कुकर की तेज सीटी बचती है और वर्षा का हाथ डोल जाता है
05:01आटे में पानी ज्यादा पढ़ जाता है
05:04अरे रे, आटा तो ज्यादा गिला हो गया
05:08वर्षा जब रोटी बेलने लगी तो एक पी रोटी गोल नहीं बन रही थी
05:12कोई रोटी श्रीलंका के नक्षे जैसी थी तो कोई रोटी आस्ट्रेलिया के नक्षे जैसी बनती
05:18वर्षा चिर जाती है
05:20कूकर फिर से जोर से सीटी मारता है
05:23सास बहर से आवाज देती है
05:25वर्षा बेटा
05:27आज स्पेड थोड़ी कम लग रही है
05:31टाइम और लगने वाला हो तो बता दो बेटा
05:35वर्षा को ये बात सुनकर बहुत बुरा लगता है
05:38वो सोचना भी नहीं चाहती थी कि कभी उसकी तेजी पर कोई सवाल उठेगा
05:43वहीं हर्षा धीमे धीमे अपना काम करती रहती है
05:47वर्षा दाल बनाते वक्त भी इतनी खबरा जाती है कि जल्द बाजी में डाल में नमक ज्यादा गिर जाता है
05:54वर्षा का खाना फिर भी हर्षा से जल्दी तो बन जाता है
05:58और जब खाना महमानों के सामने लगता है तो सब हर्षा के खाने की तारिफ करते हैं
06:05अरे पराथी तो कमाल की बनी है और सबजी भी
06:08बस दाल में नमक थोड़ा, इधर हो ओधर हो गया है
06:15वर्षा को बहुत शेर्माती है और वो नीचे सर करके खड़ी रहती है तब ही हर्षा कहती है
06:22वो ना मैं थोड़ी जल्दबाजी कर गई और नमक ज्यादा हो गया पर पराधे तो वर्षा भावी नहीं बनाये हैं
06:30इसलिए तो अच्छे बने हैं
06:31वर्षा ने कभी नहीं सोचा था कि हर्षा के काम की इतनी तारीफ होगी लेकिन वो उसका यश वर्षा को
06:39दे देगी
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