00:03रेणुका की शादी कुछी दिनों पहले शास्त्री नगर में हुई थी
00:06रेणुका बहुती आलसी लड़की थी
00:09वो दिन भर बैट पर सूती रहती या फिर मैगेजिन पढ़ती रहती
00:13और घर के काम भी धीरे धीरे ही करती
00:17एक दिन उसकी सास उसके पास आती है
00:21बहु आज बेसन का चिला बना दे बड़ा मन कर रहा है
00:28हाँ मम्मी जी बनाती हूँ थोड़ी देर में
00:32थोड़ी देर में? अरे थोड़ी देर में तो रात के खाने का वक्त हो जाएगा बहु
00:37अच्छे मम्मी जी तो फिर आप रात का खाना ही खा लीजीगा न
00:42ये भगवान कैसी आलसी बहु मिली है मुझे हारे काम को बस टालती ही रहती है
00:50रेणुका दिन भर बस आलस पना ही करती रहती
00:54एक बार रात की खाने पर सब बैठे हैं तो रेणुका का पती कहता है
00:59अरे ये क्या? आज फिर से करेला?
01:03रेणुका हफ़ते में तीसरी बार ऐसा हुआ है कि करेला बन रहा है
01:07कुछ भी बना लिया करो अरे इतनी सारी सब्जी मिलती है मार्केट में
01:12हाँ पर अब कौन मार्केट जाए और सब्जी लेकर आए
01:16इसलिए जो था घर पर वही बना दिया
01:19बहु फ्रिज खोल कर देखती तो पता चलता कि सारी सब्जियां रखी होती है
01:25पर तुम्हारा आलस पन खतम हो तो तुम्हारी नजर जाए ना?
01:30विशाल कमरे में आकर रेणुका से पूछता है
01:34रेणुका मैंने कहा था तुमसे कि मेरे लिए रुमाल ले आना
01:37मेरे सारे रुमाल खराब हो गया है
01:39तुम ले आई क्या?
01:42आज नहीं गई कल ले आऊंगी
01:45ओफो! पिछले चार दिनों से मैं यही सुन रहा हूँ
01:48बिना रुमाल के ओफिस जाना पड़ रहा है
01:51तुम तो बहुत ही आलसी होती जा रही हो रेणुका
01:54आपको रुमाल की जरुरत है ना
01:56तो खुदी खरी लीजी ना
01:58हाँ, अब वही करूँगा
02:00तुम्हारे भरो से बैठा रहा तो कुछ नहीं होगा
02:04एक दिन दर्वाजे पर बैल बज रही होती है
02:08और रेणुका सोफे पर बैठी होती है
02:11पर आलस में दर्वाजा खोलती ही नहीं
02:14अरे बहु कितनी दे से बैल बज रही है
02:17क्या कानों में रुई डाल कर बैठी हो
02:20जो सुनाई नहीं दे रही बैल
02:23मम्ही जी अब आप आ ही गई है
02:25तो आपी खोल दीजे ना दर्वाजा
02:27क्यों मुझे ताना मार कर और देर कर रही है
02:31अरे वह उल्टा चोर को तवाल को डाटे
02:37सास दर्वाजा खोलती है
02:39तो उसकी पडोसन दर्वाजे पर खड़ी होती है
02:42दर्वाजा खोलने में इतनी देर क्यों हो गई
02:45सब सो गई थी क्या
02:47और ये अभी कोई वक्त है क्या सोने का हाँ
02:51अरे नहीं नहीं ऐसी कोई बात नहीं है
02:55आईए आईए आप लोग अंदर आईए
02:57उफो इन सबको भी अभी आना था
03:00अब मम्मी जी लगा देंगी मेरी ड्यूटी किचन में
03:04बहू पकोड़े तल दे बहू चाय बना दे
03:09अरे बहू सो गई क्या कबसे आवाज दे रही हूँ
03:14जा चाय बनाकर लिया
03:15हाँ मम्मी जी अभी जाती हूँ थोड़ी देर में
03:19सास रेणुका को आँग दिखाती है
03:23मतलब थोड़ी ही देर लगेगी चाय बनाने में
03:26अभी ले आती हूँ बस जट पट
03:31रेणुका रस्वे में जाती है और इसी आलसी पन में वो चीनी की जग़र नमक डाल देती है
03:37जैसे ही सब चाय का घूंट भरते हैं चाय थूप देते हैं
03:43यह कैसी चाय बनाई है तूने रेणुका? इसमें तो सारा नमक भरा है
03:48हाँ और ये पकोड़े इसमें इतनी मिर्च है कि मेरी तो हालत ही खराब होगे खाकर
03:55और रे अणू जी आपकी खातिरदारी में पहले तो कभी कोई कमी नहीं रहती थी
04:01पर जब से आपकी ये बहु आई है ना मामला कुछ गड़ बड़ा सा गया है
04:06हाँ हाँ जहां आप इतनी अक्टिव है वहीं आपकी बहु एकदम आलसी एकदम राम मिलाई जोड़ी लगती है
04:20अच्छा जी चलते हैं अब नमक वाली चाए पिलाने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया
04:28सब वहाँ से चले जाते हैं
04:31अरे तुने तो मेरी ना की कटा दी बहु वे लोग क्या सोच रहे होंगे मेरे बारे में
04:37मम्मी जी मैंने तो शक्कर ही डाली थी पता नहीं नमक कैसे बन गई शक्कर
04:44शक्कर नमक नहीं बना बहुरानी तुम्हारा ये जो आलसपना है ना ये उसी का नतीजा है
04:51सुरी मम्मी जी अब मैं ये आलस पन छोड़कर सारे काम अच्छे से मन लगा कर करूंगी
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