00:03शिल्पा की आदते ठीक नहीं थी
00:05वो ना बोलने से पहले कुछ सोचती और ना ही कुछ करने में
00:10उसकी इस आदत से सबी परिशान रहते
00:14बेहन घर पर मेहमान आये हैं और शक्कर खतम है
00:17थोड़ी शक्कर दे दो मैं बाजार जाओंगी तो ले आओंगी
00:22अरे शिखा बेहन तुम तो माफी करें जब देखो तुम्हारे घर में कुछ ना कुछ खतम ही रहता है
00:29अरे शिल्पा चिल्ला क्यों रही हो कहाना घर में मैमान बैठे हैं सुन लेंगे
00:35सुन लेंगे तो सुन ले तुम लोगों की मांगने वाली आदत तो बंध होगी
00:41अच्छा अच्छा शिल्पा ना दो शक्कर, लेकिन बात तो अच्छे से करो, एक कट्वरी शक्कर के लिए तुमने मेरी बड़ी
00:48बेज़ जती कर दी
00:50शिल्पा बड़ बड़ाते अंदर चली जाती है, तो शिखा भी घर चली जाती है
00:56मा, क्या हुआ?
00:58अरे कुछ नहीं बेटा, पता नहीं कहां कहां से ऐसे पड़ोसी आ जाते हैं, जब देखो तब कुछ न कुछ
01:04मांगने के लिए घंटी बजाते हैं, अब घंटी बजे तो दर्वाजा ना खुलना?
01:10पता नहीं मा की ये आदत कैसे बदलीगी, किसी को कुछ भी बोल देती है, बोलने से पहले सोचती भी
01:17नहीं
01:19शिल्पा की ये आदत दिन बदिन बढ़ती ही जा रही थी
01:24एक दिन शिल्पा के दर्वाजे सबजी वाला आया
01:28सुनो भईया, मुझे ये भिंडी, टिंडे, लौकी और आलू के साथ एक किलो प्यास दी दो
01:36जी बहें जी
01:38वो एक एकर सारा सामान पैक कर दिता है
01:42कितने पैसे दू?
01:44दो सो बीस रुपा है पूरे
01:48अरे, इतना महंगा नहीं हाँ
01:50मैं तो सिर्फ डेड़ सो दूँगी
01:54नहीं नहीं, पैसे तो पूरे लूँगा
01:56नहीं तो सबजी वापस कर दो
01:58ऐसे कैसे वापस कर दूँगी?
02:01मैं तो एक भी सबजी वापस नहीं करूँगी
02:04और हाँ, रही बात पैसो की
02:06तो लेना है तो डेड़ सो ले लो, बनना मेरे महले में घुसने तक नहीं दूगी, हाँ
02:14अरे नहीं नहीं बेहन, हम लोग गरीब लोग हैं, ऐसा ना करो
02:19पकड़ो ये डेड़ सो, और दफा हो जाओ
02:23शिल्पा की बेटी अंदर से ये सब देख रही थी
02:27शिल्पा, तुने तो हद कर दी, बेचारा गरीब आदमी, उसका तो गुजारा ही इसी से होता है
02:36बोलने से पहले सोचा कर बेटा
02:41मा, आप चुप रहो, घर चलाना बच्चों का केल नहीं
02:45और वैसे भी, इतनी महेंगी सबजी थोड़ी ना होती है
02:49आपको तो सिर्फ खाने से मतलब है, लेकिन मुझे तो सब सोचना पड़ता है ना
02:54शिल्पा के सास ये बात सुनकर दुखी हो जाती है
02:57शिल्पा की बेटी, शिल्पा की ये सारी बाते सुन रही होती है
03:01शिल्पा की बेटी एक दिन मा से कहती है
03:05मा, ओ मा, जरह यहां तो आना
03:10ओहो, क्या हुआ, क्यूं चिलना रही हो ऐसे बेटा
03:15हुआ क्या, ये दिखे मेरी स्कूल की ड्रेस, कितने गंदी हो गई है, इसे कौन धोएगा
03:22लेकिन ये तु साफ है बेटा, मैंने अपने हाथ से खुद साफ किया है
03:27मा, ये ड्रेस इत्ती गंदी है, कि मैं इसे पहन ही नहीं सकती, चलो, मुझे बाजार से नहीं दिलाओ
03:34शिल्पा दुखी हो जाती है, और वहां से चली जाती है, कि तभी सामने उसकी सास मिल जाती है
03:43शिल्पा, अरे ओ शिल्पा, ये क्या सबजी बनाई है, ऐसे भी कोई सबजी बनाता है
03:53शिल्पा सास की इस हरकत से सकते में आ जाती है
03:58अरे मा को तो मैं जो बना दू उन्हें वो पसंद आ जाता था, फिर आज वो ऐसा व्यवार क्यों
04:04कर रही है
04:06शिल्पा कुछ समझ पाती कि थोड़ी ही देर में उसका पती आ जाता है
04:10अरे शिल्पा, ये क्या है?
04:13क्या हुआ आपको?
04:16ये मेरी अल्मारी पूरी आस्तवियस्त है, तुमसे कोई काम नहीं होता है, सारा देन पता नहीं क्या करती रहती हो
04:24अरे मैंने तो सारी अल्मारी साफ रखी है
04:28इससे तुम साफ कहती हो? ये तो पूरा कुड़ा दान लग रही है
04:33शिल्पा परिशान हो जाती है और समझ नहीं पाती है कि उसके साथ क्या हो रहा है
04:38शिल्पा अकेले कमरे में जाती है और जोर-जोर से रोने लगती है
04:43तब ही वहाँ उसका पती, सास और बेटी आ जाते है
04:48शिल्पा उन लोगों को देखकर और जोर-जोर से रोने लगती है
05:01कि तब ही उसकी सास उससे कहती है
05:03क्या हुआ यहाँ बैट कर रोती रहोगी या फिर खाने को भी कुछ बनाओगी
05:12मा पहले आप पता है आप लोगों को क्या हुआ है जो मुझसे ऐसा व्यावार कर रहे है
05:20वही हुआ है जो तुम्हें रोज होता है
05:23मैं समझी नहीं
05:25मा, आज घरवालों ने आपसे बुरा व्यावार किया, तो आपको कितना बुरा लगा ना?
05:32हाँ, मुझे बहुत बुरा लगा, मुझे अच्छो नहीं लगता, कोई मुझे इस तरह से बात करे
05:40सही कहा शिल्पा, जो चीज तुम्हें खुद के लिए अच्छी नहीं लगती, वो तुम्हें दूसरों के साथ भी तो नहीं
05:46करनी चाहिए
05:48बेटा, हम तुम्हारे अपने हैं, फिर भी तुम्हें अपनों की बात का बुरा लगा
05:55लेकिन सोचो, जिन बाहर के लोगों से तुम ऐसा व्यवार करती हो, उन्हें कैसा लगता होगा
06:04हा मा, आप सच कह रही हैं, मैं आप लोगों से माफे मांगती हो, मुझे कड़वा नहीं बोलना चाहिए
06:11मैं समझ गई, मैं आपकी हूँ, इसलिए आप लोगों ने मुझे सुधरने का वक्त दिया, और मेरा साथ दिया
06:18लेकिन जिन बाहर के लोगों से मैं बुरा व्यवार करती आई, वो लोग मेरे कड़वे बोल से कितने दुखी होती
06:25होंगे
06:26मैं वादा करती हूँ, आज से ऐसा व्यवार किसे के साथ नहीं करूंगी
06:32सीख, हमें दूसरों के साथ वैसा ही व्यवार करना चाहिए, जो हम खुद के लिए अपिक्षा करते हैं
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