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  • 2 days ago

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Transcript
00:28चमतकारी बहु की लालची सास
00:33अरे यहां कौन रो रहा है
00:35इस जंगल में भला किसी के रोने की आवाज
00:38जरूर कोई जंगल में फस गया होगा
00:41वो देखती है तो उसे एक परी दिखाई दीती है
00:44जिसका एक पंक टूटा होता है
00:47अरे तुम कौन हो और क्यों रो रही हो
01:01अरे इसे जोड़ना तो आसान है
01:04रुको मैं अभी जोड़ देती हूँ
01:06यह कहकर गौरी लकड़ी और रसी की सहायता से पंको को जोड़ देती है
01:11परी अपने जुड़े हुए पंको को देखकर खुश हो जाती है
01:14और गौरी को वर्दान देती है
01:17कि वो पूर्णे मा की रात किसी भी चीज़ को हाथ लगाएगी
01:21तो वो सोने की हो जाएगी
01:22लेकिन गलती से अगर उसने किसी इंसान को छूलिया
01:28तो वो अगली पूर्णे मा तक सोने का ही रहेगा
01:31गौरी घर आती है और सारी बात अपने माता पिता को बताती है
01:36गौरी के मा उसे कहती है
01:37तू भी ना गौरी
01:39सारा दिन परियों की कहानिया पढ़कर स्वपने लोग में ही रहती है
01:44नहीं मा मैं सच बोल रही हूँ
01:45दिखो आज पूर्णी मा की रात है न
01:48इसलिए डर के मारे में कोई सामान भी नहीं चूर रही हूँ
01:51अच्छा ऐसी बात है बिटिया रानी
01:53तो जरा इस घड़े को हाथ लगा दे
01:56गौरी घड़े को जैसी ही हाथ लगाती है
01:58वो सोने का हो जाता है
02:00गौरी के माता पिता घड़े को देखकर हैरान रह जाते हैं
02:03He asks for a sit-in garden in the garden. He asks for a sit-in garden and asks for
02:10a sit-in garden. He asks for a sit-in garden under the garden.
02:16Ah!
02:16You are the dog! It's a big girl.
02:20하�arai, Kaki, no. Is the dog not evenived. I'll share it with you.
02:26Ah!
02:26Another person that is a sit-in garden!
02:28Here is a so-in garden.
02:58
03:00देखो काकी, मैं ऐसे ही व्यक्ति से अपनी बेटी की शादी कराऊंगा, जो गौरी के वर्दान से नहीं, उसके गुणों
03:07को समझे।
03:08अरे हमें तो गौरी के गुण अच्छे लगे, इसलिए तो आ गई हूँ मैं।
03:12फिर गौरी के माबाब मान जाते हैं, और उसकी शादी काकी के बेटे से हो जाती है, अगले दिन
03:18अरे गौरी, कल पूर्णे मा की रात है, तुम्हारे पिता जी परिके वर्दान के बारे में बता रहे थे, तो
03:25मैं ना कुछ चीज़े रख दूँगी, जरा हाथ लगा दे ना।
03:48अरे बस कर किताबी बातें, तेरे लिए क्या लड़कियों की कमी थी, जो मैं ये किसान की बेटी घर ले
03:54आती, और सुन गौरी, कल अगर तुने सारी चीज़ों को सोने का नहीं किया, तो मैं तुझे घर से निकाल
04:01दूँगी, और अपने बेटे की दूसरी शादी करवा दू
04:06इतना कहकर गौरी की सास महा से चली जाती है, अगली पूर्णी मा की रात गौरी की सास गौरी के
04:12सामने धेर सारे बरतन रख दीती है, और कहती है, जल्दी कर गौरी, रात खतम हो जाएगी, जल्दी जल्दी इन
04:19सारे बरतनों को हाथ लगा कर सोने का खर दे,
04:22गौरी करती भी तो क्या वो जaysCom size keep box like five
04:24वो जैसे ही एक चोटे से बरतन को छुने वाली होती है कि उसकी
04:27सास था पढ़क जाती है क्या मजाक बना रखा है इतने
04:31छोटे से बरतन में क्या होगा येले ये बढ़ा वाला
05:02
05:13अरे करना क्या है मा को उठा कर अलमारी में रख दो और हाँ लालज का फल बुरा ही होता
05:19है
05:20ज्यादा बड़े बरतन को सोने का बनाने के चकर में मा का ये हाल हुआ है
05:25ये कहकर वो दोनों मा की तरफ देखने लगते हैं
05:28झालज का बड़े लगते हैं
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