00:00सुधा बहु की कमाई
00:02कंचिन की दो बहुएं थी सुधा और गौरी दोनों के दो बच्चे
00:07गौरी नौकरी करती, पैसे कमाती और लोगों को बाती सुनाती
00:12तो वही सुधा अपने और गौरी के बच्चों को पढाती, लिखाती, उनका खयाल करती और घर का सारा काम भी
00:20करती
00:20लेकिन फिर भी कंचन को पसंदी गौरी
00:24बच्चों चलो उठो, स्कूल का टाइम हो रहा है
00:28भाबी, इन लोगों को आप अपने कमरे में ही सुला लिया करो ना, मैं डिस्टर्ब होती हूँ
00:33वैसे भी आप क्या जानो, आफिस में कितना काम होता है
00:37अरे वा, मैं तो चाची के पास सूंगा
00:40अरे नहीं नहीं बेटा, बच्चों को मा के पास ही सोना चाहिए
00:44ये बोलकर सुधा बच्चों को साथ लेकर बाहर आ जाती है
00:48अरे सुधा, क्या रोज रोज गोरे के कमरे में चली जाती है
00:53पता है ना, वो नौकरे करती है, ठक जाती है बिचारी
00:57तो क्या माँ बच्ची स्कूल नहीं जाएंगे?
01:00वैसे भी सुधा की पढ़ाई दिमाग पर ज्यादा असर करती है
01:03इसकले मैं इन लोगों को सुधा जल्दी उठा कर दिन में सुला भी देती हूँ
01:07अच्छा अच्छा ठीक है, ज्यादा समझदारी ना दिखा
01:10इतनी समझदार होती ना, तो आज किसी दफ्तर में अफसर होती
01:15तबी सुधा के ससुर बोल पड़ते हैं
01:18है तो अफसर, मेरे घर की लक्ष्मी और अफसर साब मेरी सुधा भी ट्या ही है
01:23अरे चुपरहो जी, मती मारी गई थी
01:27बोल रही थी कि दोनों बहुएं कमाओ आनी चाहिए
01:30लेकिन आप तो माने ही नहीं, मती मारी गई थी आपकी
01:35तबी सुधा सास को चाय का प्याला पकड़ाती है
01:39अगर ये भी दफ्तर जाती न, तो कौन हमारी सुम्रह में सेवा करता, सोचा है कभी
01:45सुधा का ज्यादा ध्यान बच्चों पर होता
01:48देखो बेटा, रट्टा करके पढ़ाई नहीं होती
01:51गणित समझनी का विशय है, मैं बताती हूँ
01:54और वो चारों बच्चों को अच्छे से पढ़ाती
01:57अरे भाबी ये लीजी, चेक
02:00स्कूल की फीजार जमा कर दीना, मैसिज आया था
02:04तब ही सुधा का पती भी वहाँ आ जाता है
02:06सुधा, आज रात को तयार है न, हम फिल्म दिखने चलेंगे
02:09रात का खाना भी बाहर खा लेंगे
02:12नहीं जी, कल राजु की परिक्षा है, मैं नहीं जा सकती
02:16अरे राजु की परिक्षा है, तो गौरी है न, पढ़ाए अपने बच्चों को
02:20तुम्हारी भी तो अपनी जिन्दगी है न
02:22हरे, कैसे बोल रहे हैं आप, क्यों गौरी पढ़ाए
02:25आपको तो पता है कि वो सिर्फ मेरे समझाने से ही समझता है
02:29पती वहां से चला जाता है, धीरे धीरे बच्चे बड़े होते जाते हैं
02:34एक दिन गौरी और गौरी का पती
02:37भाईया, मैं और गौरी कुछ दिनों के लिए बाहर जा रहे हैं
02:40घर में रह रहकर उप गये हैं, कुछ दिनों की छुट्टी है, सोचा मन बदर जाएगा
02:45और तुम लोग तो रोज बाहर जाते हो, घूमते हो, कभी सुधा को भी लेकर जाओ
02:51वो भी तो घर में रह रहकर ऊप गई होगी, थोड़ा चेंज मिल जाएगा उससे
02:56कैसी बात कर रहे हैं पिता जी, ये जो घर चल रहा है, वो हम लोगों के बाहर जाने से
03:00ही चल रहा है
03:01और हाँ, हमने कभी मना नहीं किया, कि भाबी बाहर ना जाए
03:07अरे, बाबु जी कहाँ, समय ही कहाँ है, बच्चे छोटे थे, तब तो सोच भी सकती थी
03:13अब तो बड़े हो गए है, जिम्मेदारियां भी बढ़ गई है, मैं नहीं जा सकती
03:18अरे, रहने दो सुधा, बच्चे छोटे थे, तब भी तुम कहाँ निकलती थी
03:22तब भी सुधा की बेटी आ जाती है
03:24मा, आपके लिए खुशकबरी है, मैंने डॉक्टरी की परिक्षा पास कर ली है
03:29अब आपकी बेटी जल्दी डॉक्टर बन जाएगी
03:33ओहो, मैं कितना खुश नसीब हूँ, मैं एक डॉक्टर का पिता कहलाऊंगा
03:40और मैं डॉक्टर का चाचा
03:43अरे, आज तो अपने राजू की इंजिनेरिंग का रिजल्ट भी आने वाला था ना
03:47आज नहीं, कल है गौरी, और उसके लिए कल तुम लोगों को कॉलेज भी बिलाया है
03:52ओ, कल, कल तो मेरी मिटिंग है, मैं नहीं जा सकती
03:57और मेरी भी एक जरूरी इंटर्व्यू है, मैं नहीं जा पाऊंगा
04:02तब ही वहाँ राजू आ जाता है
04:05चाची, कल के तैयारी है ना, कल आपको और दादू को मेरे कॉले जाना है
04:09अरे, मुझे क्यों बेटा?
04:12क्योंकि दादू एक सर्प्राइज है आपके लिए
04:16क्यों? फेल हो गया है क्या भाई तू?
04:20अरे, चुपकर, बेरा राजू तो तुझसे भी अच्छे नमबर लाएगा
04:25क्या बात है राजू? मम्मी पापा के लिए कुछ नहीं
04:28हमें नहीं आना है क्या कल?
04:31आप तो बिजी होंगे ना, इसलिए नहीं का आपको
04:34गौरी को बुरा लगता है
04:36नहीं, नहीं, मैं तो फ्री हूँ
04:39हाँ, हाँ, मैं भी
04:40कल, आ जाएंगे हम सब तुमारे कॉलेज में
04:43अगले दिन कॉलेज की कारेकरम में
04:46स्टेज से प्रिंसिपल कहते हैं
04:48और हमारे कॉलेज में
04:50आउट्स्टेंडिंग परफॉर्मेंस से
04:52इंजिनियरिंग की परिक्षा
04:54सबसे अच्छे नमबरों से पास की
04:56राजू ने
04:57राजू स्टेज पर आकर अपना पुरुसकार लो
05:00और दो शब्द बोलो
05:02राजू स्टेज पर जाता है
05:04और माइक पर कहता है
05:06मैं आज स्टेज पर बुलाना चाहूंगा
05:09उनको जिसके कारण
05:10मैं आज इस मकाम तक पहुँचा हूँ
05:12मैं आज जो कुछ भी हूँ
05:14वो हूँ मेरी सबसे प्यारी
05:17गौरी को लगता है
05:18कि उसका बेटा अब उसे स्टेज पर बुलाएगा
05:20वो खड़ी हो जाती है
05:23वो है मेरी सबसे प्यारी
05:26प्यारी प्यारी प्यारी सी चाची के कारण
05:28मैं चाहूंगा कि मेरा ये पुरसकार
05:31मेरे चाची के हाथों से मुझे मिले
05:33गौरी का मुँ उतर जाता है
05:35सब लोग घर वापस लाटते हैं
05:39वा, ये तो वही बात हो गई, कि खात कोई और डाले, फसल कोई और खाए, मेरे बेटे ने मुझसे
05:45तू पुछा ही नहीं, कमाई धमाई तो सब धरी की धरी रहेगी
05:50मैं राज्यू से बात करूंगी गौरी, तुम परिशान ना हो
05:54अरे भावी जो होना था वो तो हो गया, अब क्या बात करेंगी, अच्छा होता कि मैं इंटर्वी में ही
06:00चला जाता
06:04अरे बेटा, कमाई सिर्फ पैसो की ही नहीं, बलकि असली कमाई तो आपके संसकारों की होती है, जो सुधा बोहु
06:12ने कमाया
06:13बच्चों के लिए दिया उसका त्याग और बलिदान, तो रंग तो आना ही था एक दिन
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