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  • 3 hours ago
ओडिशा के संबलपुर के मानेस्वर के बदुआपाली गांव में 56 साल के बीर किशोर बिस्वाल के बगीचे में थाई पिंक, थाई-7, थाई सुपर किरण और प्रीमियम जापानी ब्लैक डायमंड अमरूद के पेड़ों की लाइनें लगी हुई हैं. उनके 2021 के एक्सपेरिमेंट ने फल देना शुरू कर दिया है. आज यह एक फलता-फूलता ऑर्गेनिक बिज़नेस बन गया है. जिससे सालाना लगभग 50 लाख रुपये की कमाई हो रही है. दो एकड़ में फैले बिस्वाल के बगीचे में लगभग 2,000 अमरूद के पेड़ हैं. जिनमें देसी VNR किस्मों के साथ-साथ बाहर से मंगाए गए थाई और जापानी नस्ल के पौधे भी शामिल हैं. थाई वैरायटी के पौधे जहां उन्हें 250 रुपये प्रति पीस के हिसाब से मिलते हैं. वहीं जापानी ब्लैक डायमंड के पौधे 4,500 रुपये प्रति पीस के हिसाब से मिलते हैं. 14 लाख रुपये के शुरुआती इन्वेस्टमेंट के बावजूद, रिटर्न बहुत अच्छा रहा है. किशोर पहले अपने खेत में टमाटर उगाते थे लेकिन खास कामयाबी नहीं मिली. जिसके बाद मन बदला, अमरुद के बगीचे लगाए. जिसके लिए इन्होंने यू ट्यूब वीडियो का सहारा लिया. बागवानी के लिए एडवांस्ड टेक्नीक सीखीं. उनका ये काम चल पड़ा. आज वो अपने बगीचे से कई परिवारों की रोजी रोटी चला रहा हैं. गुड़, बेसन, दही, पेड़ों के नीचे से इकट्ठा की गई मिट्टी और गाय के गोबर का इस्तेमाल करके बायो-कम्पोस्ट और ऑर्गेनिक खाद तैयार करते है. इसी खाद का प्रयोग वो अपने बगीचे में करते हैं. तो एक पारंपरिक टमाटर उगाने वाले से लेकर ऑर्गेनिक एग्जॉटिक फल उगाने तक. किशोर बिस्वाल की कड़ी मेहनत और फसल ने साबित कर दिया है कि डायवर्सिफिकेशन और साइंटिफिक क्रॉप मैनेजमेंट, किसी भी किसान के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है.

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00:04उडिसा के संबलपूर के मानेस्वर के बदुआ पाली गाउं में 56 साल के बीर किसोर विस्वाल के बगीचे में थाई
00:11पिंक, थाई सेवें, थाई सूपर किरन और प्रीमियम जपानी ब्लैक डाइमंड अमरुत के पेडों की लाइने लगी हुई हैं।
00:30दो एकड में फैले बिस्वाल के बगीचे में लगबग दो हजार अमरुत के पेड़ हैं। जिन में देशी बीर किस्मों
00:37के साथ साथ बाहर से मंगाए गए थाई और जापानी नसल के पौधे भी सामिल हैं।
00:47मैं कोलकता की एक नरसरी से पौधे लेता हूँ।
00:50ग्राकों की बहारी डिमांड को देखते हुए मैं खेती को च्छा एकर तक बढ़ाने की योजना मना रहा हूँ।
00:58थाई वेराइटी के पौधे जहां उन्हें धाई सो रुपे प्रतिपीस के हिसाब से मिलते हैं।
01:03जापानी ब्लैक डाइमंड के पौधे पैताली सो रुपे प्रतिपीस के हिसाब से मिलते हैं।
01:0814 लाक रुपे के सुरुवाती इंवेस्टमेंट के बावजूद रिटर्न बहुत अच्छा रहा है।
01:17जापानी ब्लैक डाइमंड अमरूद की बराइटी की प्रीमियम मार्केट में बहुत डिमांड है।
01:22मैं जल्द ही जापानी रेट डाइमंड बराइटी की खेती करूँगा।
01:26किसो और पहले अपने खेत में टमाटर उगाते थें।
01:29लेकिन खास काम्याबी नहीं मिली।
01:31जिसके बाद मन बदला अमरूद के बगीचे लगाए।
01:34जिसके लिए इन्होंने यूटूब वीडियो का सहारा लिया।
01:37बागवानी के लिए एडवांस टेकनिक सीखी।
01:39उनका ये काम चल पड़ा।
01:41आज वो अपने बगीचे से कई परिवारों की रोजी रोटी चला रहे हैं।
02:03गुड बेसं दही, पेड़ों के नीचे से कठा की गई मीटी और गाय के गोबर का इस्तमाल करके बायो कमपोस्ट
02:09और और और्गेनिक खाद तयार करते हैं।
02:11इसी खाद का प्रयोग वो अपने बगीचे में करते हैं।
02:14तो एक पारंप्रिक टमाटर उगाने से लेकर और्गेनिक इक्जॉटिक फल उगाने तक बीर किसोर बिस्वाल की कड़ी मेहनत और फसल
02:21ने सावित कर दिया है कि डैवर्सिफिकेशन और साइन्टिफिक क्रोप मैनेजमेंट किसी भी किसान के लिए बहुत फैयदे मन सावित
02:28हो
02:35पूदू
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