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  • 4 months ago
लाइन से लगे ये हाथ रिक्शा कोलकाता के दुर्गा पूजा पंडाल में लोगों को खूब भा रहे हैं. ये रिक्शा कभी शहर में आवाजाही के अहम जरिया हुआ करते थे लेकिन अब ये धीरे धीरे गुमनामी के गर्त में खोते जा रहे हैं. साल्ट लेक के जीडी ब्लॉक दुर्गा पूजा पंडाल में इन रिक्शा को खास जगह दी गई है. इस साल की थीम के तहत इस पूजा पंडाल में हाथ से खींचे जाने वाले रिक्शे और उन्हें खींचने वाले लोगों को प्रतिकृतियां बनाई गई हैं. इस पंडाल में आने वाले लोग इन रिक्शा के साथ खूब तस्वीरें ले रहे हैं. साथ ही इनमें किए गए सफर की उनकी पुरानी यादें भी ताजा हो गई हैं. आयोजकों का कहना है कि पंडाल की ये थीम लोगों को खूब पसंद आ रही है. नए जमाने में हाथ से खींचे जाने वाले ये रिक्शा भले ही पुराने लगें लेकिन कभी कोलकाता इन रिक्शों के जरिये ही दौड़ता और मंजिल तक पहुंचता था.

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00:30इस पंडाल में आने वाले लोग इन रिक्षाओं के साथ खूब तस्वीरें ले रहे हैं।
00:36साथ ही इनमें किये गए सफर की उनकी पुरानी यादे भी ताजा हो गई है।
00:41आये जोकों को कहना है कि पंडाल की ये थीम लोगों को खूब पसंदा रही है।
00:46This year's theme is hand-pulled rickshah. As you know, this is the only tradition or the, you can say, the medium of transport in the world.
00:58We can see only hand-pulled rickshah in Kolkata and it started in the British era and it still continues.
01:06So it is our, basically, a small way of honoring their service rendering to the society.
01:16It is phenomenal.
01:21नई जमाने में हाथ से खीच जाने वाले ये रिक्षा भले ही पुरानी लगें लेकिन कभी Kolkata इन रिक्षों के जरीए ही दोड़ता और मंजर तक पहुँचता था.
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