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  • 5 weeks ago
तमिलनाडु में तस्वीरें के लोगों ने कंक्रीट से बढ़ते जंगल और पेड़ों की घटती संख्या का विकल्प ढूंढ निकाला है. यहां जापानी तकनीक मियावाकी से जंगल उगाए जा रहे हैं. शहर में बढ़ती गर्मी और स्वच्छ हवा की कमी की समस्या से निपटने के लिए लोगों ने ये तरीका अपनाया है.  चेन्नई नगर निगम और सामाजिक संगठनों की मदद से शहर में खाली पड़ी जमीनों, सरकारी परिसरों, जल निकायों के आसपास के क्षेत्रों छोटे-छोटे घने जंगल बनाए जा रहे हैं. अड्यार, सचिवालय पार्क, चेपॉक, शोलिंगनल्लूर और विरुगंबक्कम जैसे इलाकों में पहले ही मियावाकी जंगल तैयार किए जा चुके हैं. जिससे आसपास के इलाकों में हरियाली और ठंडक बढ़ी है. मियावाकी जंगल को चेन्नई जैसे शहरों के लिए वरदान माना जा रहा है.  इस पद्धति का नाम जापान के प्रसिद्ध वनस्पति वैज्ञानिक अकीरा मियावाकी के नाम पर रखा गया है.. उन्होंने कम जगह में ज्यादा से ज्यादा देशी पेड़-पौधों को उगाने की तकनीक विकसित की. मियावाकी जंगल सामान्य जंगलों की तुलना में 10 गुना तेजी से विकसित होते हैं और जैव विविधता को बढ़ावा देते हैं.

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00:00चाडों तरफ पेड ही पेड हर तरफ फैली हर याली ये तस्वीरें चिन्ने की हैं जहां लोगोंने कंक्रीत के बरते जंगल और पेडों की घरती संख्या का विकल्प ढून निकाला है यहां जापानी तकनीक मियावाकी से जंगल उगाए जा रहे हैं
00:19शेहर में बरती गडमी और स्वच्छ हवा की कमी की समस्या से निपटने के लिए लोगोंने ये तरीका अपनाया है इस पद्धती का नाम जापान के प्रसिद्ध वैग्यानिक अकीरा मियावाकी के नाम पर रखा गया है उन्होंने कम जगा में ज्यादा से ज्यादा देशी प
00:49बढ़ावा देते हैं चैन्नाई नगर निगम और सामाजिक संगटनों की मदस से शहर में खाली पड़ी जमीनों सरकारी परिसरों जल निकाय के आसपास के शेत्रों में छोटे छोटे जंगल बनाये जा रहे हैं अडियार सचिवाले पार्क चेपॉक सोलिंग नलूर और वि
01:19मियावाकी जंगल को चैन्ने जैसे शहरों के लिए वर्दान माना जा रहा है मियावाकी जंगल लगाने के लिए कम से कम 1000 से 1500 वर्ग मीटर जमीन की ज़रुरत होती है इस जगा में पेड जाडियां बेले और छोटे छोटे पौधे मिला कर लगबग 110 या उससे अधिक पौ�
01:49नियामित रूप से पानी देना और खर पत्वार हटाना जरूरी होता है इसके बाद जंगल अपने आव विक्सित होने लगता है
01:57राष्ट्रिय हरित नीति के अनुसार किसी भी शहर का 33 प्रतीशत हिस्सा हरित होना चाहिए लेकिन चेन्ने में या केवल 12 प्रतीशत है
02:11जहनकारों का मानना है कि यदि मियावाकी जंगलों की संख्या बढ़ाई जाए तो स्वक्षवा और बेहतर जीवन गुनवत्ता सुनिश्चित की जा सकती है
02:20बियोर रिपोर्ट एटेवी भारत
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