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  • 16 hours ago
तमिलनाडु के चेन्नई के पास तांबरम नगर निगम के 'कन्नडापालयम' इलाके लोग गंदगी, बदबू और खराब पानी से परेशान हैं. इलाके में कचरे के पहाड़ी की वजह से जमीन के नीचे का पानी जहरीला हो गया है. नल से निकलने वाला पानी या तो काला होता है या पीला. यहां के करीब 30 हजार लोग पिछले 40 सालों बदतर जिंदगी जीने को मजबूर हैं.कभी ये इलाका हरियाली और झीलों के लिए जाना जाता था, करीब 60 साल पहले कन्नड़ बोलने वाले लोग यहां आकर बसे थे, जिसकी वजह से इस इलाके का नाम 'कन्नडापालयम' पड़ा. लोग प्रकृति, झील और खेतों के बीच खुशी-खुशी रहते थे, लेकिन फिर यहां कचरा फेंकना शुरू कर दिया गया... और अब यहां एक हजार टन कचरा जमा हो चुका है. इस वजह से  यहां की मिट्टी, हवा और पानी अपनी शुद्धता खो चुके हैं. बच्चों और बुजुर्गों में डेंगू, त्वचा रोग, सांस लेने में तकलीफ और दमा जैसी बीमारियां होने लगीं.कचरे के ढेर के पास ही एक आंगनबाड़ी केंद्र, एक मिडिल स्कूल और एक प्राथमिक केंद्र है, लेकिन बीमारी की डर से लोग वहां अपने बच्चों को नहीं भेजते हैं.  2018 में ग्रीन ट्रिब्यूनल ने यहां से कचरा हटाने का आदेश दिया था. तब थोड़े समय के लिए स्थिति सुधरी लेकिन बाद में फिर से कचरे का पहाड़ जमा हो गया. लोगों ने दफ्तरों के चक्कर काटे, विरोध प्रदर्शन किया, लेकिन नतीजा कुछ भी नहीं निकला.

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Transcript
00:02इन महिलाओं के हाथ में पानी की बोतल तो है लेकिन ये पानी पीने लाइक नहीं है।
00:08इनके पास रहने के लिए घर तो है लेकिन इन घरों में रहना मुश्किल है।
00:18This story is found in a village in Karcher in Karcher.
00:26Here are now about 30,000 people ago in 40 years of living with 42 people.
00:31These people wild gimpers автом for their whole body.
00:41पिछली 15 सालों से हमारी बोर्विल का पानी पीने लायक नहीं है पानी का रंग मिट्टी जैसा मटमेला होता है
00:47और बारिश के मौसम में तो यह बिल्कुल काला हो जाता है हम इसका इस्तमाल सिर्फ नहाने और शौचालाई के
00:53लिए कर रहे है हमारे इलाके से गुजनने वाले �
00:55लोग अपनी नाक बंद कर लेते हैं अगर वे दो मिनिट के लिए ऐसा कर सकते हैं तो कोई हमारी
01:00किस्मत के बारे में क्यों नहीं सोचता जिने 40 साल से इस बदबूदार गंदगी में रहना पड़ रहा है हमें
01:06चैन कम मिलेगा
01:08कभी ये इलाका हरियाली और जीलों के लिए जाना जाता था करिब 60 साल पहले कंड़ बोलने वाले लोग यहां
01:15आकर बसे थे जिसकी वज़ा से इस इलाके का नाम कंड़ा पालयम पड़ गया
01:20लोग प्रकिर्ती जील और खेतों के बीच खुशी खुशी रहते थे लेकिन फिर यहां कचरा फेकना शुरू कर दिया गया
01:27और अब यहां 1000 टन कचरा जमा हो चुका है इस वज़ा से यहां की मिट्टी हबा और पानी अपनी
01:34शुदता खो चुके हैं
01:35जमीन के अंदर का पानी जहरीला हो गया है बच्चों और बुजुर्गों में डेंगू, तवचा रोग, सांस लेने में तकलीफ
01:43और दमा जैसी बिमारियां होने लगी हैं
01:47पिछले 40 सालों से हम इस डंपिंग याड की वज़े से कई समस्याओं का सामना कर रही हैं
01:53खास कर बच्चों में सांस फूलना, खांसी, तवचा रोग और बार-बार बुखार जैसी बिमारियां फैल रही हैं
01:58अकसर कच्रे के धेर में आग लगा दी जाती है जिससे निकलने वाली धुए की कारण लोगों का दम घुटने
02:04लगता है
02:04अलम यह है कि अगर हम घर के अंदर एसी भी चला लें तो भी कच्रे की बदवू हमारा पीछा
02:09नहीं छोड़ती
02:11कच्रे के धेर के पास ही एक आंगणवारी केंद्र, एक मिडले स्कूल और एक प्रात्मिक केंद्र है
02:17लेकिन बिमारी की दर से लोग यहां अपने बच्चों को नहीं भेजते
02:202018 में Green Tribunal ने यहां से कच्रा हटाने का आदेश दिया
02:26तब थोड़े समय के लिए यहां इस्तिती सुद्री थी लेकिन बाद में फिर से कच्रे का पहार जमा हो गया
02:32लोगों ने दफ्तरों के चक्कर काटे विरोध प्रदर्शन किया लेकिन नतीजा कुछ भी नहीं निकला
02:38Bureau Report ETV भारत
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