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00:00जो सच का प्रेमी होता है उसके हाथ में थोड़ा सा संसाधन भी कमाल कर देता है
00:05एक तिनका था सीता के हाथ में और रावन की पूरी सेना और अस्त्र शस्त्र काम नहीं आये
00:11सीता का तिनका जीत गया सीता का तिनका जैसे राम की गिलहरी की रेत
00:17गिलहरी और क्या करती, इतनी सीतो है, तो उसको थोड़ी सी रेत मिल गई, तुम जो कर सकते हो सरवशेष्ट करो, राम के लिए करो, ये विचारनी है ही नहीं कि उड़ सकता है, नहीं उड़ सकता है, मुद्दे की बात पकड़ो, सीता से कह रहे हैं, जैसे उड़ की आया, आ�
00:47चलने को अपना जीवन बना लिया, वो थोड़ा भी अगर लक्ष्मन रेखा लांगेंगे, तो फिर उन्हें बड़ी सजा मिल जाती है,
00:54नमस्ते आचारे जी, मैंने आपकी किताब पढ़ी थी दुर्गा शब्चरती, जिसमें आपने मा दुर्गे के सारे रूपों के बारे में बताया गया है, लेकिन जैसे हम मा सीता को भी देखते हैं,
01:23उनको हम लोगों ने सिर्फ एक शान सौभाव या फिर एक ऐसी सहन शील सौभाव में देखा है,
01:29तो आपकी पुस्तक जो मैं बोल रही हूँ दुर्गा शब्चरती, उससे हमें मा दुर्गा की शक्तियों के बारे में पता चलता है, और उनसे कई सीखें मिली है,
01:37मा सीता से हमको क्या सीख लेनी चाहिए, क्योंकि हमने उनको सिर्फ सहन करते हुए देखा है, और थोड़ा कश्ट काटते हुए ही देखा है, लेकिन सीख आप कुछ बता सकेंगे तो,
01:49और क्या वो सही था जो उन्होंने देखा भी है, अर्थ को उठाना पड़ेगा, उठा दोगे तो सब सही दिखाई देने लग जाता है, जो शक्ति का संबंध है, वही रामसिता का संबंध है, सिया राम मैं सब जग जानी, ठीक है, एक बार ऐसे देख लिया फिर सारी बात स
02:19सीता, आत्मा है, राम, प्रक्रते को बोलो, यह है प्रक्रते, इसको बोलो पीछे पीछे चलती रहे आत्मा के, यही सत्य निष्ठा है, यही सतीत तो है,
02:41बहुत सुन्दर साखियां गाई हैं ग्यानियों ने, सती के लिए, सती माने वो नहीं, उसका संबंध सती प्रता से मत लगा देना, सती का अर्थी यही है, मन जो चलता ही आत्मा के पीछे है, उसको सती बोलते हैं,
03:02सीता उसी की प्रतीक हैं, प्रतिनिधी हैं, क्या सीखें हम, एक बार जान लिया कि सच क्या है, सही क्या है, अब किसी और दिशा में मत चल देना,
03:20न डर के मारे, न लोब लालच स्वार्थ के मारे, आप लोग गाते हो न, कि खीर खांड भोजन मिले, साकट संगन जाए, कबीर संगत साधु की जौकी रोटी खाए,
03:42वहाँ तो इतना ही कहा था, खीर खांड भोजन मिले, सीता का चरितर कहता है, दुनिया भर का सोना भी मिले, तो भी साकट संगन जाए, रावन संगन जाए,
03:57और ये जो प्रक्रती बैठी हुई है, इसमें बड़ा आकरशन आ जाता है, दुनिया की चीज़ों के लिए, जब अशुक वाटिका में कैद कर रखा है उनको, तो एक तरफ तो दुनिया भर की राक्षस नहीं आए, उनको ड़रा रही है हर तरीके से,
04:15क्या हो गया भय है, और दूसरी और रावन क्या बोल रहा है, अरे मंदोधरी वगरा एक तरफ रख दूँगा, आप पटरानी बनोगी, वो भी किसकी, हरे बाप, बाप, महा माहिम रावन की, दुनिया का जो एक्षत्र अधिपति है,
04:45कितनी बुड़ी है, बोले तु क्या ही है तु वनवासी को पकड़ कर बैठी है, आ, तेरा स्थान यहाँ पर है, लंका नहीं पूरे विश्व पर राज करेगी, मैंने तो सब देवताओं को कैद कर रखा है,
05:04खीर खांड भोजन मिले साकट संगन जाए, यह स्वयम को समझाने की बात है, हमें सत के सामने सीता हो जाना है,
05:18राम क्या है, सत, हमें क्या हो जाना है, सीता, बिल्कुल वही बात, जो कह रहा था, गले राम की जेवरी, जित खीचे, तित जाओं, अब एक और चीज जोड़ो,
05:34तुलसी भरोसे राम के निर्भय होकर सोए, तुम पीछे चल दो, उसके बात तुम्हें बचाने वो आएंगे, तुम निर्भय होकर सो,
05:49ऐसा थोड़ी हुआ कि सीता को रावण ने हर लिया, तो राम कहें छोड़ो, और भी काम है जिन्दगी में करने के, और मैं तो राम हूँ मुझे, तो कितनी भी रानिया स्त्रिया मिल जाएंगी, मुझे क्या कमी है,
06:04सीता ने अगर कहा कि मैं सत्त के पीछे ही चलूँगी, तो सत्त ने फिर कहा कि सीता की मैं हर कश्ट से रक्षा भी करूँगा, तुलसी भरोसे राम के,
06:22तुम राम का भरोसा करो, राम तुम्हें बचाएंगे,
06:28बात दोनों और से बराबर किये,
06:34देखिए जो पूरा नेरेटिव होता है न, कथानक, उसको एक उचाई देनी होती है,
06:39अगर उससे लाव पाना है तो,
06:42समझना पड़ता है कि, यह जो महा काव्वी है, इसका इशारा किधर को है,
06:47उसमें घुस करके, बारीक बातों में नहीं फस जाते न, उसमें तृटियां खोजना शुरू कर देते हैं,
06:55कि अरे देखो, यह बात हो गई, ऐसा हो गया, अगनी परिच्छा क्यों करा दी, यह कर दिया, वनवास, यह वो,
06:59जो उसकी जो broad direction है, वो समझी जाती है, कि जो पूरी बात कही गई है, कि सुदेश से कही गई है, यह मान लिजे मैं आप से इतनी बातें बोल रहा हूँ,
07:09अब मैंने किसी शब्द का गलत उचारण कर दिया, तो आप उसको पकड़के बैठ जाओगे, क्या,
07:13यह मैंने आपको उधारण दे दिया, जो पूरे तरीके सा नुकूल नहीं, उसको पकड़के बैठ जाओगे, क्या और यह आप देखोगे, कि जो बात समझाना चाहरे हैं, वो क्या है,
07:24इसी तरीके से
07:27रमायन हो या मानस हो
07:30ये आपको क्या बात समझाना चारे
07:32उस बात पर ध्यान दो
07:33छोटी छोटी चीजों को पकड़ कर मत बैठो
07:37बात समझ रहे हैं
07:43तो सीता माने वही
07:46जिनकी आपने बात करी दुर्गास अप्शती में
07:49शक्ति
07:49उनका जो समर्पित रूप है
07:54सत्यनिष्ठ रूप है
07:55लॉयल रूप है
07:58वो हमको दिखाई देता है रमायन में
08:01और रूप जितने भी होंगे सब सीमित होंगे
08:05क्योंकि जो सगुण है उसे सीमित तो होना पड़ेगा
08:07तो आपको एक ही चरितर एक ही किरदार में
08:11सब तरह के रूप नहीं दिखाई दे सकते
08:12शक्तिमाने प्रक्रते का जो रूप
08:16आपको चामुंडा में दिखाई देता है वो सरस्वती में नहीं दिखाई दे सकता
08:21और जो सरस्वती में दिखाई देता है वो सीता में नहीं दिखाई दे सकता
08:25क्योंकि सब रूप सी मित होते है
08:27असीम तो निर्वन निराकार ही होता है
08:30पर ये अलग अलग रूप हो सकते हैं
08:34और सब रूप हमसे कुछ कहना चाहते हैं
08:38सब रूप हमें संदेश दे के कुछ सिखाना चाहते हैं
08:41जो सीखने वाली बात है उसको सीखिए
08:42सीता के रूप में शक्त हमको सिखा रही है
08:49कि राम को अपने आगे आगे चलने दो
08:51गले राम की जेवरी जित खीचे तित जाओ
08:54जीवन में एक बार राम आ जाए
08:57उसके बाद बेवफाई मत करना
09:00भले ही लुभाने वाला रावन क्यों न बैठाओ
09:03मनोहर प्रतीक है जरा सा एक त्रण ले लेती है इतनी सी
09:12कुशा और उससे कह रहे भस्म कर दूँगी तुझे
09:16रावन आकर स्पर्श करने की कोशिश कर रावन ने स्पर्श नहीं किया
09:23तथ की तरह मतलो इसको समझो की समझाया क्या जा रहा है
09:26आपको इतिहास नहीं पढ़ाया जा रहा है आपको जीवन की उच्चेतम सीख दी जा रही है
09:31उसे ग्रहन करो
09:32जो सच का प्रेमी होता है उसके हाथ में थोड़ा सा संसाधन भी कमाल कर देता है
09:44एक तिनका था सीता के हाथ में
09:48और रावण की पूरी सेना और अस्त्र शस्त्र काम नहीं आए
09:54सीता का तिनका जीत गया
09:56सीता का तिनका जैसे राम की गिलहरी की रेत
10:07तुहारे पास थोड़ा है तो थोड़ा ही करो
10:12पर जितना कर सकते हो पूरा करो
10:14वो और वहाँ क्या करती
10:16वहाँ वाल्टिका में बैठी है वहाँ उनको बस इतना सा एक मिल गया तिनका बोली इसी से इसी से
10:21भसम होगा तू
10:23गिलहरी और क्या करती
10:25इतनी सी तो है
10:26तो उसको थोड़ी सी रेत मिल गई
10:28इतनी से तुम जो कर सकते हो
10:31सरवशेष्ट करो
10:32राम के लिए करो
10:34उसके बाद कमाल देखो
10:37जादू होता है कि नहीं होता है
10:39लोग वेर्थ के प्रश्णों में उलज जाते हैं
10:47अच्छा हनुमान उड़के कैसे लांग है
10:49कैसे उड़ा सकता है
10:50कैसे उड़ेगा कोई उड़ सकता है कि न उड़ सकता है
10:52हटाओ ये मुद्दा
10:54ये विचारनी है ही नहीं कि उड़ सकता है
10:57नहीं उड़ सकता है
10:58मुद्दे की बात पकड़ो
10:59सीता से कह रहे है
11:02जैसे उड़की आया आप ऐसे ही उड़की चला भी जाओंगा बैठो मेरी पीठवे
11:05बोल रही है जब राम के भरोसे हूँ तो लेने भी वही आए
11:10मैं पुत्र समान हूँ मा
11:19मुझे परपुरूश मत मानो
11:22मैं पुत्र समान हूँ आओ बैठो पीठवे
11:24राम आएंगे यह होती है शद्धा
11:33कश्ट सहना स्विकार है सत्थ के अलावा किसी और को साधन बनाना भी स्विकार नहीं है
11:43कितने भी कश्ट में रह लेंगे
11:45और जब थोड़े से विचलित होते हो विमुख होते हो तो फिर क्या होता है फिर वही होता है
11:55कि लक्ष्मन रेका लांग दी
11:59इसोनम्रत के पीछे भेज़ दिया स्वय मी
12:03इतना सा विचलन भी बड़े वियोग का कारण बन गया न
12:10इतनी इसी विचलिन
12:12बस तो जो लोग साधारण जीवन जी रहे हैं
12:17उनको अगर दंड सजा भी मिलती है तो साधारण ही मिलती है
12:23पर जिन्होंने अब सच्चाई को अपना हर्दय दे दिया
12:31जिन्होंने सच के साथ चलने को अपना जीवन बना लिया
12:35वो थोड़ा भी अगर लक्षमन रेखा लांगेंगे
12:39तो फिर उन्हें बड़ी सजा मिल जाती है
12:41साधारण आदमी तो कितनी रेखाएं लांगता रहता है
12:46उसे कोई दंड मिलता है कुछ नहीं मिलता
12:48पर ये नियत ही कैसी
12:55कि सीता जो इतने वर्षों से राम के पीछे पीछे चल रही है
12:59वही सुकुमारी सीता
13:01जनक की लाडली सीता
13:05उन्होंने कुछ नहीं करा इतने ही कर दिया कि
13:08अब आया है वो ब्रामण है
13:11भिक्षा मांग रहा है बुढ़ा
13:14और कह mountain है कि ये सीमा पहले के पीछे से नहीं लेते हम
13:19तो इतनी ही तो करना है कि जा के इसको ऐसे दे दो
13:23इतने में ही दंड मिल गया
13:26जो लुग सच की रहा चल रहे हो
13:33उन्हें इतना भी नहीं लांगना चाहिए अपनी मर्यादा को
13:37इतना भी नहीं
13:37और मर्यादा लांग हो तो उसके बाद शिकायत मत करना
13:43कि हमने थोड़ा सा ही तो अपराध करा था
13:48हमें इतनी भारी सजा क्यों मिली
13:50खीक वैसे जैसे
13:57सौ किलो तुम रेत भी खोदो
14:02तो कुछ नहीं खो दिया
14:07लेकिन दस ग्राम सोना खोदोगे तो सजा पा जाओगे
14:10प्रशन यह है ना कि तुम्हें मिल क्या गया है
14:14जिसको रेत ही रेत मिली है
14:15जीवन से जिसने रेत ही रेत चुनी है जीवन से
14:19वो सौ किलो रेत भी खोदे तो उसे क्या सजा मिलेगी
14:21पर जिसने जीवन से अब सुना चुन लिया, सत्य चुन लिया, राम चुन लिया, अगर थोड़ा सा भी खोएगा तो बड़ी सजा पाएगा, तुम थोड़ा सा भी मत खो न, क्योंकि तुम्हें कुछ बहुत बहुत जरूरी मिल गया है, उसको थोड़ा सा भी खोगे, पेश्
14:51सीता कच्चरित्र अनूठा है
15:01अनुगामिनी
15:02अहम
15:05जो कह रहा है
15:07मेरा अपना कोई रास्ता ही नहीं
15:10जो तेरी राहा है
15:14वही मेरी राहा है
15:15जिधर तू जा रहा है
15:16उधर मैं जा रही हूँ
15:21ये सीता है
15:26मेरा तो जो भी कदम है
15:34वो तेरी राह में है
15:37ये सीता है
15:37सीता माने कोई व्यक्ति विशेश नहीं
15:42सीता माने कोई लिंग विशेश भी नहीं
15:45जो भी कोई जीवन में सत्य के पथ पर चलने लग जाए
15:49वो सीता हो गया
15:51उसको बस उस पत्से विचलित नहीं होना है
15:57समझ में आ रही है बात ही है
16:04व्यक्ति तो करोणों और बो हुए हैं
16:10सीता कोई व्यक्ति थोड़े ही है
16:12व्यक्तियों में
16:17कुछ थोड़ा विशेश हो सकता है
16:20पर प्रतीकों में
16:28जो उचाई हो सकती है वो अलग चीज है
16:31आपके सामने जब व्यक्तित तो भी लाए जाते हैं
16:38धार्मिक साहित्य में
16:40तो वो व्यक्तित तो इसलिए लाए जाते हैं
16:42ताकि आप उनसे
16:44जो उच्चतम है वो सीख सको
16:50व्यक्तियों से व्यक्तित तो नहीं सीखना होता
16:53व्यक्तियों से
16:58जो उच्चतम है वो सीखना होता है
17:02ऐसे हो जाओ कि जिसके साथ चल रहे हो जिसके पीछे चल रहे हो वो तुम्हें हटाए भी तब भी न हटो
17:12राम उत्सुक थे ही नहीं कि सीता साथ आए
17:17कम उम्रकी है बड़े लाड़ प्यार से पली है
17:27अभी अभी ब्याहता होकर आई है
17:33राम बोले ये मुझे मिला है न वनवास इनको थोड़े ही मिला है ये काय के लिए जाएंगी
17:43और लोटा हूँगा चौधा बरस है बीतेंगे तुम महल में रहो
17:54नहीं तुम महल में रहो नहीं ये सीता है नहीं
18:10दुनिया की नहीं सुनेंगे अगर दुनिया हमें तुमसे दूर करेगी तुम्हारी भी नहीं सुनेंगे अगर तुम हमें तुमसे दूर करोगे
18:16नहीं
18:23अरे रुख जाओ यहीं पर
18:26नहीं
18:27अच्छा चलो फिर
18:30उसके आगे फिर
18:38मानस को अब देखें तो संतुलसी दास का जो कवी है
18:42बड़े
18:43मधुर तरीके से वर्णित करता है
18:46अब उनको चलना ही नहीं आता था
18:49वो तो महलों में चली थी
18:51और वो चल रही है वहाँ नंगे पैर जंगल में
18:55तो कभी यहाँ उल्जें कभी वहाँ गिरें
19:00अब पाउं रक्तिम हो गए है
19:03फिर उनको उचे पत्थर पे बैठा दिया है
19:07राम कह रहे हैं दिखाओ
19:13काटे ही काटे बैठा के उनके काटे ही निकाल रहे हैं
19:20फिर वो जितनी भी दूरी थी
19:31बहुत लोग इस बात पे आपत्ति करते हैं कि
19:35कोई पैदल पैदल कैसे बिलकुल उत्तर से लेकर के
19:38नीचे पहुँच जाएगा वहाँ रामेश्वरम और लंका
19:41कैसे हो सकता है कोई पद्यात्रा इतनी लंबी कैसे
19:45उस समय में वो भी बीच में ऐसे जंगल थे सब
19:48अरे तुम सौई किलो मीटर मान लो भाई
19:51अपने तर्क को शांत करो
19:54तुम सौ किलो मीटर रंगे पहुँच चलके दिखा दो
19:59मतमानों की धाई हदार किलो मीटर है
20:02तुम सौ किलो मीटे नंगे पहुँच चलके दिखा दो
20:04और वो भी राजकुमारी होके
20:11ऐसा प्रेम जो सब जहल जाता है
20:17जामारग साहब मिलें प्रेम कहावे सोए
20:25ये सीता है
20:26ऐसा प्रेम जो सब जहल जाता है
20:28इतना जहलता है कि एक बिंदु पर आ करके
20:35कहते हैं कि कोई मा अपनी बेटी का नाम सीता न रखे
20:41क्योंकि सीता माने कश्ट
20:45राम के लिए बहुत दुख जहलना पड़ता है
20:55मेरी माताजी का नाम सीता है
20:57और मैं छोटा था तो मैंने घर में
21:02चर्चाएं सुनी थी
21:04कई बार
21:05ये नाम
21:10अपने साथ दुख लेकर आता है
21:13फिर मैं बड़ा होने लगा मुझे समझ में आया कि जिन्होंने नाम रखा उन्होंने
21:22उनका नाम सीता है इसलिए रखा है क्योंकि ये नाम अपने साथ शायद राम भी लेकर आता है
21:26पर सीता का मतलब ही यही हो गया कि जिसको दुख बहुत छेलना पड़ेगा
21:34और दुख सुईकार है क्योंकि राम के लिए है ना
21:40समझे आरी बात यह है
21:45अचारे जी अन्त में बस दो बात एक करके कहना चाहती हूं अब लोकन ही होगा आपकी काफी सारी पुस्तक है फिलाल तक काफी सारी तो नहीं मतलब हाँ
22:03अचार पाज तो पड़ी अच्छे से और दुर्गा शप्षती तो बहुत ही सुंदर है साथ साथ में एक स्री है और क्यूंकि मैं अभी खुद स्री हूं तो मैं काफी रिलेट कर पा रही हूं उस बुक को भी मैं पढ़कर के काफी प्रेली थूई हूं और साथ साथ मैं मैं
22:33अपने भी बात कही है कि सीता आती हैती तो साथ में राम में लेके आती है अब में यह नहीं चांद आती आप लेकी आरह
22:54mom
22:54झाल झाल
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