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00:2918 नवंबर 1727 को आमेर यासत के महराजा सवाई जैसिंग दोईती ने जैपुर शहर की नीव रखी थी
00:50तब उन्होंने अलग-अलग कलाओं में निपून कारिग्रों को यहां लाकर बसाया
00:54मनिहारों को त्रिपोलिया गेट के पास इसी गली में बसाया गया
00:58तब से मनिहारी समाज इस विरासत को संजोई हुए है
01:02होली पर खेले जाने वाले गुलाल गोटे भी मनिहार समाज के लोग तयार करते हैं
01:16रियासत काल्मी राजपरिवार के लोग होली खेलने में इसका इस्तेमाल करते थे
01:21और आज के दौन में शादियों की मेंदी और हल्दी के रस्मों में इसका चलन बढ़ गया है
01:26मनिहारों के गली में आज भी पारंपरिक तरीके से ही लाग की चूडियां बनाई जाती है
01:49मशनरी का बिलकुल भी प्रियोग नहीं होता है
01:52कारिगर कॉले की भट्टी पर प्राकृतिक लाग को पिगला कर इनरंग विरंगी चूडियों को आकार देते हैं
01:59और यहाँ आने वाले पर्येटक इन चूडियों को खुब पसंद करते हैं
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