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  • 1 year ago
राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक अनोखी जवाहरात मंडी लगती है, यहां घाटगेट के पास नवाब चौराहे पर पर खुले आसमान के नीचे हफ्ते में 6 दिन, शाम 5 बजे से 7 बजे तक, 2 घंटे में करोड़ों का कारोबार होता है. यहां रूबी,पन्ना से लेकर एक से एक बेशकीमती रत्नों का सौदा होता है. यहां बड़ी संख्या में कारोबारी माल खरीदने के लिए पहुंचते हैं. मोलभाव से लेकर माल के लेनदेन तक सब कुछ विश्वास पर टिका होता है. गुलाबी नगरी में देश-विदेश से पर्यटकों के कम पहुंचने और मंदी की मार का असर इस कारोबार पर भी पड़ा है. हालांकि कारोबारियों को आनेवाले समय में स्थिति बेहतर होने की उम्मीद है. ये मंडी करीब 30 साल से यहां लग रही है. इस मंडी का इतिहास जयपुर नगरी के बनने के साथ जुड़ा है. मिर्जा राजा जयसिंह द्वितीय ने अलग-अलग हुनरमंद कारीगरों को यहां लाकर बसाया, तब से यहां रत्नों का काम हो रहा है. पहले यह काम केवल जयपुर की चार दिवारी तक सीमित था. लेकिन आज के दौर में इस मंडी से विदेशों तक रत्नों का निर्यात किया जाता है.

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00:00यहाँ न कोई दुकान न कोई शोरूम दो घंटे में करोडों का कारोबार राजिस्थान की राजधानी जैपूर के सबसे बिजी चोराहों में से एक यह है गाट गेट के पास नवाब चोराहा
00:13खुले आसमान के नीचे जावारात की मंडी यहां रूबी पन्ना से लेकर एक से एक बेश कीमती रतनों का सौधा होता है
00:22कि देश की अनोखी जवारात मंडी इस चोराहे के दूनों तरप शाम पांच बजे से साथ बजे तक लगती है
00:42यहां बड़ी संख्या में कारोबारी माल खरीदने के लिए पहुंचते हैं और मोलभाव से लेकर माल के लेंदेन तक सब कुछ हिश्वास पर टिका है
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