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  • 5 months ago
राजस्थान के जयपुर से ध्रुपद गायकी का पुराना नाता है. यहां के बाबा बहराम खान डागर के वंशज इस विरासत को आगे बढ़ाने में जुटे हैं. सीऊद्दीन डागर को साल 2010 में इस गायकी के लिए पद्म श्री अवार्ड भी मिल चुका है. इस गायकी को लेकर आज की युवा पीढ़ी क्या सोचती है, इस सवाल का जवाब देते हुए अनीसीद्दीन डागर कहते हैं कि युवा पीढ़ी शास्त्रीय संगीत को भूली नहीं है लेकिन भटक जरुर गई है. वरिष्ठ पत्रकार इकबाल अहमद खान जो आर्ट और कल्चर पर 45 साल से लिख रहे हैं और 50 साल से ध्रुपद भी इस हवेली में सीख रहे हैं,  इसके महत्व को बताते हैं कि ये गायकी साम वेद से निकली है, देवी देवताओं के लिएं गाई जाती है. भगवान को शयन से उठाना, उनको नहलाने और श्रंगार करने से संबंधित है,  ध्रुपद गायकी तमाम गायकी की मां है. वैसेे तो ध्रुपद गायकी तबला सहित अलग-अलग वाद्य यंत्रों से की जाती है. लेकिन ये घराना ध्रुपद गायकी के लिए तानपुरा का इस्तेमाल करता है.

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00:27from
00:30Wasiyuddin ڈاغر को साल 2010 में इस गायकी के लिए पदम स्री अवार्ड भी मिल चुका है
00:39इस गायकी को लेकर आज की युवा पेढ़ी क्या सोचती है
01:00इस सवाल का जवाब अनिसुदीन डागर कुछ हिऊं देते हैं
01:04सिर्फ सोचने का फरक हो गया है
01:08देखें एक बड़ी हम एक परंपरा को लेकर चल रहे हम दोनों भाई
01:15तो यह नहीं बोल सकते कि धुर्पत सुनने वाले या सीखने वाले नहीं है
01:24लेकिन क्या हो रहाए आज के टाइम में जो थोड़ा सा डिसपॉइंट है
01:29कि आप म्यूजिक को सिफ बड़ा लाइटली ले लिया है
01:35आप गाने भी पसंद करते हैं घजले पसंद करते हैं पिक्छरों के गाने पसंद करते हैं
01:41But if you don't hear the sound, then you will find out how to speak.
01:45The artist of the artist of the artist of the artist, who art and culture
01:49has been written for 45 years and has been written for 50 years,
01:53has been taught by the artist of the artist.
01:57He tells us about the artist of the artist.
01:59The artist of the artist of the artist and artist of the artist
02:01is the artist of the artist.
02:03It is exciting because we will be able to make it our lives, to get into it, to get into it, to get into it, to get into it, to get into it.
02:28Baba Bahram Khan's attitude is very cool.
02:31Jaipur ke maharaj Ram Singh inko Punjab ke maharaj Ranjit Singh se gift ke tawar par maang kar layethe
02:38Maharaj Ranjit Singh nai, Ranjit Singh se Ranjit Singh ji nai, inko abo Bheiram Khan saab ko, maharaj Ranjit Singh ji ko kaha ke, yeh amara yanke anmol moti hai, yeh hum aap ko get karate hai, yeh aap inka samahal rakhye ka inki
02:54वैसे तो धुरूपत गाय की तबला सहीत अलग-अलग वाधियंत्रों से किया जाता है, लेकिन ये घराना धुरूपत गाय की के लिए तानपुरा का इस्तिमाल करता है
03:04फिरोज सैफी, जैपूर, ETV, भारत
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