00:00जम्मू कश्मीर में किश्तवार जिले की चशोती गाउं में कुछ वक्त पहली तक चहल पहल दिखती थी।
00:08अब यहां हर तरफ तबाही का मंजर है और खामोशी पस्टी हुई है।
00:13दुकाने बंध हैं, रेस्तरा खाली हैं और जो सडकी कभी तीर्थ यात्रियों से गुलजार रहती थी वे वीरान हैं।
00:2114 अगस्त को पवित्र मचैल माता मंदिर के मार्ग पर बसे आखरी मोटर योग्य गाउं चशोती में बादल फटने से भारी तबाही हुई।
00:29अब तक 65 लोगों की मौत हो चुकी है, लगभग 100 घायल हैं और 80 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं।
00:36इस आपदा की वजह से सालाना मचैल यात्रा को भी स्थगित करना पड़ा। इससे इलाके की अर्थ्विवस्ता को भारी नुकसान पहुचा है।
00:44यह पुरे पाडर और पुरे जमुएंट काश्मीर की इत्यास का सबसे काला दिन है।
01:14होटल चल रहे थे, यहाँ पर आप देख सकते हैं, कई लोग ट्रांसपोर्ट में, कई लोगों की, कई लोगोंने नई नई गारियां खरे दी हुई थी, सारी चीज़े अफेक्ट हुई।
01:44चोटे व्यापारी, ट्रांसपोर्टर और होटल व्यवसाईयों समेत, कई दूसरे लोग अपनी कमाई के लिए सालाना तीर्थ यात्रा पर निर्भर रहते हैं।
02:12उनका कहना है कि इलाके में हुई तबाही के बाद अब उनके सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
02:19पर मातारानिय के दरवार में जो यात्रा चल रही था बहुत रश्टा तो जो एक रोड़ प्रस्ट हुआ इस से फिर क्या करें कि लोगों की मीदे इस यात्रा पर थी।
02:27कि यहां लोगों का बिजनिस था वो भी ठप हुआ चलो बिजनिस बाद की बात है लेकिन जो यहां पर लोगों की बड़ी कीमती जाने गी हैं तो मैं अपने और से उनको शंधालने देता हूँ कि यह नहीं होना चाहे था लेकिन दुरभग तरीके से यह हुआ है अब क्या ह
02:57दिन भी स्थगित रही हाला कि अधिकारी 21 या 22 अगस्त को जम्बू से चड़ी लेकर आने वाले श्रधालू के एक समू को मंदिर तक पहुचने की अनुमती देंगे
03:079000 फुट की उचाई परिस्थित मचैल माता मंदिर तक जाने के लिए श्रधालू चशोती गाउं तक वाहन से पहुँच सकते हैं और उसके बाद उन्हें 8.5 किलो मीटर की पैदल यात्रा करनी होती है
03:20चशोती गाउं किश्तवार शहर से लगभग 90 किलो मीटर दूर है
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