00:00रात के दो बजे, साक्षी, 25 वर्षिय भारतिय यूफती, बातरूम में आई, आइने में उसने अपनी जलक देखी, लेकिन उसकी मुश्कान उसके चेहरे पर नहीं थी, धीरे धीरे आइने में खून की लकीरे उभरने लगी, साक्षी डर के मारे कदम पीछे खींच रही थी,
00:30रहा था, सारा बातरूम ठंडा और खाली लग रहा था, वो समझ गई कि आईना सिर्फ प्रतिविम नहीं है, बलकि किसी अन्य दुनिया का रास्ता दिखा रहा है, उस रात से साक्षी ने कभी भी अकेले बातरूम का दर्वाजा नहीं खोला,
Comments