00:00रोहन ने पुरानी हवेली में एक बड़ा शीशा पाया।
00:04जब भी वो उस शीशे में देखता, उसमें एक परचाई नजर आती, लेकिन पीछे कोई नहीं होता।
00:11एक दिन उसने शीशे के सामने खड़े होकर पूछा, तु कौन है?
00:15परचाई मुस्कुराई, और शीशे से बाहर आ गई, अब तु उधर रहेगा, और मैं इधर, अब हवेली में जो भी उस शीशे में देखता है, वो गायब हो जाता है, और उसकी जगह नई परचाई आ जाती है।
Comments