00:00राद गहराई हुई थी, गाव के पुराने घर में बस एक धीमी दस्तक सुनाई देती है, ठक, ठक, ठक, मैं डरते डरते दर्वाजे के करीब गया, बाहर पूरा अंधेरा था, अचानक एक ठंडी हवा अंदर आई, और दर्वाजा अपने आप खुल गया, सामने कोई नहीं �
00:30के फुसफुसानी की आवाज आई, मत मुड़ना, लेकिन मैं रुका नहीं, मुड़ गया, और जो देखा, उसे देखकर मेरे होश उड़ गय, अंधेरे में एक साया था, जिसकी आखे जलती आग जैसी लाल थी, और वो मेरी ओर बढ़ रहा था,
Comments