00:00दिल्ली के पहारगंज में एक पुराना लॉज है, शान्ती गेस्थाउस। उसका रूम नंबर 302 पिछले 20 साल से बंध है। कहते हैं, वहाँ तेई साल की माया की मौत हुई थी। जब उसने दरपण में अपनी परचाई को चलते देखा।
00:16एक बार 28 साल का अनिरुद वहाँ ठारा, क्योंकि बाकी कमरे फुल थे। रात के दो बजे आईने में देखा। उसके पीछे कोई खड़ा है, वो मुड़ा, कोई नहीं था। लेकिन आईने में अब भी माया मुस्कुरा रही थी। सुबह दरवाजा अंदर से बंद मिला और �
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