00:00पचास साल केके मंजु ने अपनी मा की अलमारी से एक पुरानी लाल साड़ी निकाली, वही जो उनकी अंतिम पूजा में थी, उसने सोचा एक बार पहन कर देख लो, जैसे ही उसने साड़ी ओड़ी, ठंडी हवा कमरे में फैल गई, शीशे में उसने खुद को देखा, लेकिन
00:30कमरे की बक्ती जपकने लगी, दर्वाजा अपने आप बंध हो गया, अगली सुबह पडोसी जब अंदर गए, मंजु जमीन पर पड़ी थी, साड़ी गले में बंधी हुई थी, और दीवार पर लिखा था, मा की ममता कभी नहीं मरती
Comments