00:00रात के करीब दो बज रहे थे और मैं वाश्रूम से निकल कर अचानक आइने के सामने रुख गया
00:06कमरे की लाइट बन थी, बस मोबाइल की हलकी रोशनी थी
00:11मैंने यूही मस्ती में आइने के सामने खड़े होकर हाथ हिलाया
00:15और देखा कि आइने ने मेरा हाथ दो सेकंड की देरी से हिलाया
00:21पहले सोचा शायद थकावट की वज़े से भरम हो रहा है
00:25लेकिन तभी आइने ने मुझे आख मारी
00:28मैं हक्का बक्का रह गया क्योंकि मैंने तो आख मारी ही नहीं थी
00:34और फिर आइने में मेरी परचाई मुस्कुरा रही थी
00:38जबकि मैं पूरी तरह से शांत खड़ा था
00:42अब सवाल ये है आइने में जो था वो मैं था या कोई और?
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