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कृत्तिका नक्षत्र — वैदिक ज्योतिष का तीसरा नक्षत्र।
इसका स्वामी सूर्य और देवता अग्नि हैं, जो शुद्धि और परिवर्तन के प्रतीक हैं।
👉 व्यक्तित्व: आत्मविश्वासी, प्रखर बुद्धि और नेतृत्व गुणों से सम्पन्न
👉 करियर: सेना, प्रशासन, राजनीति, कुकिंग और तकनीकी क्षेत्र
👉 स्वास्थ्य: गला और पाचन तंत्र से संबंधित प्रभाव
👉 संबंध: स्पष्टवादी स्वभाव, परंतु मधुरता बनाए रखना ज़रूरी

इस वीडियो में जानिए Krittika Nakshatra का असली प्रभाव और जीवन में संतुलन लाने के उपाय — जैसे सूर्य उपासना, अग्निहोत्र और गायत्री मंत्र जप।

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Transcript
00:00कृत्ती का नक्षत्र वैदिक जोतिश का तीसरा नक्षत्र है।
00:04इसका स्वामी सूर्य और देवता अगनी हैं,
00:08जो शुद्धी वपरिवर्तन के प्रतीक हैं।
00:12इसका प्रतीक अगनी की जवाला या छुरी है,
00:16जो साहस और दृढ निश्चय दर्शाता है।
00:19इस नक्षत्र के जातक आत्म विश्वासी, प्रखर बुद्धी वाले और नेत्रित्व गुनों से संपन्न होते हैं. करियर में इन्हे सेना, प्रशासन, राजनीती, कुकिंग और तक्नीकी क्षेत्रों में सफलता मिल सकती है.
00:34स्वास्थिकी द्रिष्टी से यह नक्षत्र गला और पाचन तंत्र को प्रभावित करता है. संबंधों में ये जातक स्पष्टवादी होते हैं. परंतु मधूर्ता बनाय रखना जरूरी है. इसकी उर्जा संतुलित करने हेतू, सूर्य उपासना, अगनी होत्र और गायत्री
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