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कौवा चिड़िया कहानी | Crow Bird Story
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7 months ago
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00:00
एक जंगल में जोर की बारिश होने लगी थी
00:03
देखते देखते ही बिजलियां गरच कर वो तूफान बन चुका था
00:08
वो देख तोता अपने पती कबूतर से ऐसे कहती है
00:13
सुनिए ये देखकर मुझे तो तूफान के तरह लग रहा है
00:18
मेरा मन भी यही कह रहा है कि कुछ बुरा होने वाला है
00:21
हम अभी उस परवत पे मौझूद जंगल में चले जाते हैं
00:24
जैसे ये बारिश रुख जाएगा हम वापस आ जाएंगे
00:27
हाँ हाँ आई है देखो भविश्वानी
00:31
तुम्ही क्या लगता है मैंने इसी बरसाथ और तूफान नहीं देखा है
00:35
पहले ऐसे कही ना आते हैं और जाते हैं
00:39
जाओ जाओ जाओ जाकि काम करो
00:41
मैं जो भी कहूं आपको मजा की लगता है
00:45
अब कब सुनते हो मेरे बात
00:48
जाओ पहले यहां से जाकर पहले पकोड़े बनाओ
00:53
ऐसे तोटे की बात को अंसुना कर देता है कबूतर
00:58
तब ही वहाँ पहुचकर कववा ऐसे कहता है कबूतर से
01:02
अरे क्या हुआ जीजू सारा जंगल बारिश के वज़े से उपर नीचे हो रहा है
01:08
और आपके घर में से पकोड़े की सुगंदा रही है
01:11
हाँ हाँ तुमारी बेहन यहां आकर भविशवानी जो बन गई
01:16
मेरे ही भविशे के बारे में मुझे बता रही थी
01:19
इसलिए मैंने सोचे कि खाली रहेगी तो यही बोलेगी
01:22
तो काम बोल दिया मैंने
01:23
लगता है वही काम कर रही है अब तुम भी आ गए न दो पकोरे खा करी जाओ
01:28
अरे हाँ हाँ चीजू कह रहे हैं तो अभी रुकना ही बड़ेगा न खा करी जाओंगा
01:35
इतने में गर्मा गर्म पकोरे लाकर तोता ऐसे कहती है
01:40
अरे कवा भाई कवा है आप
01:44
अभी आया बहन, मैंने सोचा कि तेरे हाथ के पकौरे खा करी जाओ
01:50
हारेरे क्यों नहीं, बिल्कुल खाईए भीया
01:55
कवा पकौरे खाते हुए
01:58
और जीजू, बताओ क्या हाल चल
02:00
क्या है होगा, सब ठीठा
02:05
वैसे ऐसी बारिश में इतने गर्मा गर्म पकौरे खाने का मज़ा ही कुछ और है
02:10
कितना स्वादिष्ट है
02:14
ऐसे खाते रहता है कबूतर
02:16
देखो ना भाईया, मैं यहां इस बरसाथ से डर कर कह रही हूँ
02:23
कि उस परवत के जंगल पे चले जाते हैं
02:25
और यह यहां पकौरे खा रहे हैं
02:27
कम से कम आप बोलिये न
02:30
क्यों जीजू, बेहन के बाद के अनुसार हम भी उस परवत के जंगल पर चले जाएं क्या
02:37
उसकी बातों को ज्यादा भाव मत दो
02:39
हमने ऐसे कितने बरसाथ देखे हैं, यह दो कुछ भी नहीं है
02:43
बात तो सही है जीजू, लेकिन
02:50
ऐसे कुछ कहने ही वाला था की
02:52
वैसे तुमने कुछ देर पहले कहा था की हम भी उस परवत पर चले जाएंगे
02:57
मतलब इससे पहले तुम्हारी बेहन की तरह ढर कर कोई हमारे जंगल से गया है क्या
03:03
हां, बोलो
03:05
ऐसे जोर से हसने लगता है कबूतर
03:07
दरसल वो जीजू, जाने के सोच में नहीं, बलकि बहुत लोग पहले से चले भी गए
03:15
अरे रे हां क्या, दरपोक है सब, पहले से ही भाग गे
03:20
वो डरपोक नहीं, अकलमंद है, बारश अगर ज्यादा हुआ तो हम उड़ भी नहीं पाएंगे
03:26
अभी कम है तो कम से कम, परवत वाली जंगल पे कम से कम पहुँच पाएंगे
03:30
इसलिए मैं भी कह रही हूँ, लेकिन मेरी बाते तो आपको मजाक लगते है
03:35
रे रे रेने दोग, थोड़ा सा धील छोड़ दिया तो मुझे सिखाने आ जाती है
03:42
बेहन की बातों में तो सच है जीजू
03:46
या तुम लोग भी ना, और वैसे, वैसे अगर उतना ही डर लग रहा है, तो तुझे भी जाना था ना
03:53
ऐसे कबूतर कवे से कहता है
03:55
ऐसे कैसे कह दिया जीजू, आपको बताये बिना क्या मैंने कभी कुछ कहा या किया
04:02
तुम लोग जाना हो, मैं भी वही रहूंगा ना
04:06
ऐसे ही, पेट पे मौजूद ये तीनों पक्षियां दूर से बरसात को देखते रहते हैं
04:13
देखते देखते ही बारश बहुत बहुत बढ़ जाता है
04:16
बिजनियां गरजने लगी जोर जोर से
04:19
और दिन दहाडे भी इतना बारश आ गया था कि सूरज दिखी नहीं रहा था
04:25
और क्यूकि वो पेड़े घाट में था, पानी पूरा जमा होने लग गया
04:30
इतना भरने लगा कि पेड़ तक पहुँच गया
04:32
ये देख कबूतर अपने आप में सोचता है कि जितना उतने सोचा था उतना छोटा बारश तो नहीं है ये
04:39
लेकिन उसे डर था कि अगर बाहर ये कह गया तो उसके बीवी के सामने ये छोटा बन जाएगा
04:45
इसलिए कुछ ने कहता है और बस ये ही सोचता है कि जो होगा देखा जाएगा
04:49
कवा तो अंदर ही अंदर डरने लग गया
04:53
कुछ और देर बीट गया तो पानी पेड़ के उपर तक आ जाएगा
04:59
ये भगवान मुझे ता भी चले जाना था जब मेरे दोस्त बुला रहे थे
05:04
मैं जीजु के साथ यहाँ ठक गया आए भगवान ये सोचते हुए वो निराश होकर रो बैटता है
05:17
इतने में किसी की जोर की चीके सुनकर तीनों पक्षी बाहर देखते हैं
05:24
तब वो देखते हैं कि एक गौरया उसके पती गौरया के साथ एक नाव लेकर सारे उन पक्षियों को बिठाते हैं
05:36
जो इन बरसात के कारण घायल हो गए हैं और उन सब को एक नाव में बिठाकर वो कबूतर और तोते के घर की और बढ़ने लगते हैं
05:46
तब वो तोते को देखकर ऐसे कहते हैं
05:48
हम यहां तुम लोगों को बचाने आए हैं बहुत पक्षियों को अब तक बचा कर हम उने सही सलामत उस परणत के जंगल पे छोड़ गए हैं तुम लोग भी हमारे साथ आओ
06:00
ऐसे कहते हैं
06:02
ओह मुझे इसका चेहरा कभी नहीं देखना था लेकिन देखना पड़ गया चाह ऐसे कहता है कपूतर गुसे में
06:14
अरे यह सब तो पुरानी बाते हैं जी इसको छोड़ दीजिए यह सब वोकर बहुत समय बीट गया है
06:21
अरे चुप तुम मुझे क्या समझा रही हो उसका चेहरा देखना ही पाप है और उसके नाव में चड़ना होगा ही नहीं
06:29
अब उस सब से क्या लेना देना जीचू कुछ देर में लगता है हम सब दूप जाएंगे जीचू चलेंगे ना उनके साथ
06:37
ऐसे कहता है कवा
06:39
देखो मैं ऐसे कोई एरे गेरे से मदद नहीं लूँगा अगर जाना है तो तुम दोनों चले जाओ मैं तो यही रहूँगा
06:48
ये सुनकर उसका बूतर को अकेले ना चुड़ने के कारण तीनों वहीं रह जाते हैं
06:54
ये देख गुराया को लगता है कि जो लोग पहले नाव में हैं उनको बचाना ज़रूरी है इसलिए उनको लेकर वहां से चले जाती है
07:09
मुझे पता था कि मेरा जीजू मूर्ग है लेकिन इतना मूर्ग है ये तो नहीं पता था
07:15
कई साल पहले उनकी बेटी उने चोड़ कर चली गई उसका गुस्ता तो नहीं अब तक है हाई भगवान नजाने क्या ही होगा
07:24
ये सोचकर सभी एक ही बार अतीत को याद करते हैं गौराया कबूतर और तोते की इकलौती बेटी थी और उसको बहुत प्यार से वो दोनों बड़ा करते हैं
07:36
कुछ दिन बाद गौराया के पास के रिष्टेदार एक कवे से उसका रिष्टा पक्का होता है।
07:44
लेकिन गौराया को ये रिष्टा मंजूर नहीं था। तब वो ऐसे कहती है।
07:48
भापा, मुझे ये शादी मंजूर नहीं है, मुझे ये शादी नहीं करना है।
07:54
क्या बच्पन से तुम्हारा मर्जी पूछ कर ये सब कर रहा हूं मैं।
07:58
चुप चाप जो कह रहा हूं सुन लो बस।
08:01
मैंने एक और गराया से प्यार किया है।
08:04
मुझे उसी से शादी करना है।
08:06
ओ, तुम मुझे पूछे बगैर शादी भी करने का फैसरा तुमने खुद कर लिया।
08:11
इतनी बड़ी बन गई तुम।
08:14
हम। मैंने उनको मेरा वचन दिया है।
08:17
वचन नहीं निभाऊंगा, तो मेरा इज़त घट जाएगा।
08:21
तुम्हारे दिल से कई ज्यादा मैंने मेरा इज़त रखता है।
08:24
इसलिए चुप चाप मेरी बात सुनकर शादी कर लो उससे।
08:28
ये कहकर कबूतर वहां से गुस्से में चले जाता है।
08:31
आगले दन गौराईया वहां से चुप चाप भागकर
08:35
अपने दोस्तों के समक्ष में उसके गौराईया प्यार से शादी कर लेती है।
08:41
उसके बाद वो अपने पती के साथ अपने माबाग का आशरवात लेने घर आती है।
08:46
ये कहकर कबूतर वहां से चले जाता है।
08:59
उसके बाद वो गौराईया अपने प्यार के साथ परवत्वे मौजूद जंगल में बचों के साथ खुश रहती है।
09:07
ऐसे वो बारिश में अपने पती के साथ नीचे घाट वाले जंगल में अटके पक्षियों को बचाने नाम लेकर आती है।
09:17
और ऐसे ही उसके घर तक जाती है। उसे पता था कि उसके माबाप नहीं आएंगे।
09:23
इसलिए वहां से चले जाती है वो। उन सारे पक्षियों को परवत के जंगल पर पहुंचाने के बाद।
09:29
उसे लगता है कि उसे एक और बार अपने माबाप के पास जाकर उन्हें बचाने की कोशिश करना होगा।
09:35
इसलिए वो वहां नाम लेकर आके उसके माँ को पकारती है।
09:39
तब तोता कववा भाया चलो हम यहां से चले जाते हैं। उन्हें अगर नहीं आना है तो रहने दो। उनको यहां पे मरना है तो मरने दो।
09:49
यह कहकर कववा और तोता दोनों नाव में बैठ जाते हैं। नाव में बैठ कर सभी उनका थोड़ा इंतजार करते हैं।
09:58
तब क्योंकि यह कबूतर और कुछ कर नहीं पाता वो आकर नाव में बैठ जाता है
10:02
तब वो सब घरचते हुए बरसते हुए उस बारिश में उस परवत के जंगल तक पहुंचते हैं
10:10
सब भी उस गौराया के घर में जाकर खाना खाके आराम करते हैं
10:15
तोता अपनी बेटी को प्यार से गले लगा कर
10:17
आज तुमने इतने लोगों का चान बचाया है बेटी हमेशा खुश रहो
10:24
आरे मा इतनी बड़ी बाते क्यों
10:29
तुमने जो किया वो तुम्हें कभी नहीं कर पाती बेटा
10:33
जितना भी बड़ा आशिरवाद तो कम ही पड़ जाएगा
10:36
मुझे तो मेरे पती का सहारा है मा इसलिए आज ये सब कर पाई
10:40
बात तो सही है जो पती हमारे जीवन का ही साथ ही नहीं
10:46
बलकि बातों में और फैसलों में हमारे साथ तो वो मिलने में मुश्किल है
10:51
और जब ऐसे लोग मिलते हैं और हमारे भगल में होते हैं तब अपने आपको किस्मत वाले कह सकते हैं
10:58
कुछ लोग रहते हैं सिर्फ अपने जित पे अड़े रहते हैं और कभी किसी और की सुनते नहीं है
11:03
मूर खोते हैं वो
11:04
ऐसे उसके पती कपूतर के सामने ही कहती है तोता
11:08
जीजु की साई टक्कर है मेरी बहन
11:12
तब सब बारिश कम होने तक वही गोराया के घर पे आराम करते रहते हैं
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