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  • 18 minutes ago
 केंद्र सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के हाल ही में अधिसूचित किए गए नियमों की समीक्षा के लिए एक कमेटी बनाने पर विचार कर रहा है. इसका मकसद उच्च शिक्षण संस्थान में जातिगत भेदभाव को रोकना है. इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने की. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बेंच के सामने केंद्र सरकार की तरफ से पैरवी की. बेंच यूजीपी नियमों के खिलाफ कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी. सुनवाई के दौरान मेहता ने बेंच को बताया कि सरकार इस मुद्दे की जांच कर रही है. बेंच ने कहा कि हर छात्र के हितों की रक्षा करना और यह पक्का करना जरूरी है कि युवा पीढ़ी का ध्यान रखा जाए.

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00:02किंद्र सरकार UGC के नियमों की समिक्षा के लिए एक कमीटी बनाने पर विचार कर रहा है।
00:30कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
00:33सुनवाई के दौरान महता ने बेंच को बताया कि सरकार इस मुद्दे की जाच कर रही है।
00:38बेंच ने कहा कि हर छात्र के हितों की रक्षा करना और ये पक्का करना जरूरी है कि युवा पेढ़ी
00:44का ध्यान रखा जाए।
00:47UGC के नए नियमों को सुप्रीम कोट में चुनोती दी गई थी क्योंकि जनरल केटेगरी के छात्रों को इसके शिकायत
00:54निवारन प्रणाली के तहट शिकायत करने से बाहर रखा गया था।
00:58सुप्रीम कोट ने जनवरी 2026 में इन नियमों पर रोक लगा दी थी, जिसके बाद से ही मामले को लेकर
01:04सुनवाई चल रही है।
01:28जनरल वर्ग के छात्रों और विभिन्द संगठनों का कहना है कि नए नियमों में जूठी या अधार हीन शिकायत करने
01:35वालों के खिलाफ दंडनात्मक करवाई या जुर्माने का कोई कड़ा प्रवधान नहीं है जिससे नए नियमों के दुरुपयों की आशंका
01:43है।

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