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  • 2 days ago
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने छात्रों के संसद मार्च के दौरान पुलिसिया कार्रवाई के आरोपों की जांच के लिए हाई-पावर्ड कमेटी बनाने की बात कही है. कोर्ट ने संकेत दिया कि इस समिति में सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व न्यायाधीश, एक हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और महानिदेशक स्तर से सेवानिवृत्त हुए एक अधिकारी के शामिल हो सकते हैं. कोर्ट कल इस पैनल के सदस्यों के नामों का एलान करेगा. सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया कि शिकायतें दोनों पक्षों की तरफ से दर्ज की गई थीं, अगर पुलिस की ओर से ड्यूटी में कोई लापरवाही हुई है, तो सरकार इस पर हाई-पावर्ड कमेटी के साथ परामर्श करके कार्रवाई करेगी. इस पर कोर्ट ने जवाब दिया कि एक बार जब वह हाई पावर्ड कमेटी का गठन कर रही है, तो फिर इसे उन्हीं पर छोड़ दिया जाना चाहिए. कोर्ट ने संकेत दिया कि वह निर्दोष प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल कर सकता है. लेकिन, आपराधिक इतिहास वाले प्रदर्शनकारियों के मामलों की अलग से जांच की जाएगी.

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