अशोक वाटिका के विध्वंस के बाद, हनुमान का तांडव लंका में जारी है! क्या रावण की सेना रोक पाएगी इस महाबली वानर को? इस रोमांचक कड़ी में, हनुमान का सामना होता है लंका के पराक्रमी योद्धाओं से, जहाँ वे अक्षय कुमार का वध करते हैं और अंततः इंद्रजीत के ब्रह्मास्त्र के सम्मान में स्वयं को बंधने देते हैं। रावण के दरबार में हनुमान, निर्भीकता से श्रीराम का संदेश देते हैं और विभीषण की चेतावनी को अनसुना कर रावण हनुमान की पूँछ में आग लगाने का आदेश देता है। इस अपमान के प्रतिशोध में, हनुमान अपनी पूँछ से पूरी सोने की लंका को जला देते हैं, जिससे युद्ध की नींव रखी जाती है! #PadmaPurana #Ramayana #Hanuman #LankaDahan #Ravana #Indrajit #HinduMythology #EpicStories #YouTubeSeries
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00:00:00कहानी का यह हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है
00:00:04हनुमान द्वारा अशोक वाटिका के विध्वन्स की खबर लंका में तेजी से फैलती है, जिससे रावन के सिपाही क्रोधित और
00:00:12भयभीत हो जाते हैं
00:00:14लंका के योध्धा हनुमान को पकड़ने या मारने के इरादे से उन पर आक्रमन करते हैं, लेकिन हनुमान अपनी अदमय
00:00:22शक्ती और गती से उन्हें आसानी से परास्त करते हुए लंका में अपनी उपस्थिती का भय फैलाते रहते हैं
00:00:31कहानी का यह हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है
00:00:35हनुमान द्वारा अशोक वाटिका के विध्वन्स की खबर लंका में तेजी से फैलती है
00:00:41जिससे रावन के सिपाही क्रोधित और भैभीत हो जाते हैं
00:00:45लंका के योध्धा हनुमान को पकड़ने या मारने के इरादे से उन पर आक्रमन करते हैं
00:00:52लेकिन हनुमान अपनी अदमय शक्ती और गती से उन्हें आसानी से परास्त करते हुए लंका में अपनी उपस्थिती का भै
00:00:59फैलाते रहते हैं
00:01:02कहानी का यह हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है
00:01:07हनुमान द्वारा अशोक वाटिका के विध्वन्स की खबर लंका में तेजी से फैलती है
00:01:12जिससे रावन के सिपाही क्रोधित और भैभीत हो जाते हैं
00:01:17लंका के योध्धा हनुमान को पकड़ने या मारने के इरादे से उन पर आक्रमन करते हैं
00:01:23लेकिन हनुमान अपनी अदमय शक्ती और गती से उन्हें आसानी से परास्त करते हुए लंका में अपनी उपस्थिती का भै
00:01:31फैलाते रहते हैं
00:01:34कहानी का यह हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है
00:01:38हनुमान द्वारा अशोक वाटिका के विध्वन्स की खबर लंका में तेजी से फैलती है
00:01:43जिससे रावन के सिपाही क्रोधित और भैभीत हो जाते हैं
00:02:05कहानी का यह हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है
00:02:09हनुमान द्वारा अशोक वाटिका के विध्वन्स की खबर लंका में तेजी से फैलती है
00:02:15जिससे रावन के सिपाही क्रोधित और भयभीत हो जाते हैं
00:02:20लंका के योध्धा हनुमान को पकड़ने या मारने के इरादे से उन पर आक्रमन करते हैं
00:02:26लेकिन हनुमान अपनी अदमय शक्ती और गती से उन्हें आसानी से परास्त करते हुए लंका में अपनी उपस्थिती का भई
00:02:34फैलाते रहते हैं।
00:02:36कहानी का यह हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
00:02:40हनुमान द्वारा अशोक वाटिका के विध्वन्स की खबर लंका में तेजी से फैलती है, जिससे रावन के सिपाही क्रोधित और
00:02:49भयभीत हो जाते हैं।
00:02:51लंका के योध्धा हनुमान को पकड़ने या मारने के इरादे से उन पर आक्रमन करते हैं, लेकिन हनुमान अपनी अदमय
00:02:59शक्ती और गती से उन्हें आसानी से परास्थ करते हुए लंका में अपनी उपस्थिती का भई फैलाते रहते हैं।
00:03:08कहानी का यह हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है
00:03:12हनुमान द्वारा अशोक वाटिका के विध्वन्स की खबर लंका में तेजी से फैलती है
00:03:17जिससे रावन के सिपाही क्रोधित और भैभीत हो जाते हैं
00:03:39कहानी का यह हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है
00:03:44हनुमान द्वारा अशोक वाटिका के विध्वन्स की खबर लंका में तेजी से फैलती है
00:03:49जिससे रावन के सिपाही क्रोधित और भयभीत हो जाते हैं
00:03:54लंका के योध्धा हनुमान को पकड़ने या मारने के इरादे से उन पर आक्रमन करते हैं
00:04:00लेकिन हनुमान अपनी अदमय शक्ती और गती से उन्हें आसानी से परास्त करते हुए लंका में अपनी उपस्थिती का भय
00:04:08फैलाते रहते हैं.
00:04:10कहानी का यह हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है.
00:04:15हनुमान द्वारा अशोक वाटिका के विध्वन्स की खबर लंका में तेजी से फैलती है, जिससे रावन के सिपाही क्रोधित और
00:04:23भयभीत हो जाते हैं
00:04:25लंका के योध्धा हनुमान को पकड़ने या मारने के इरादे से उन पर आक्रमन करते हैं, लेकिन हनुमान अपनी अदमय
00:04:33शक्ती और गती से उनहें आशानी से परास्ट करते हुए लंका में अपनी उपस्थिती का भय फैलाते रहते हैं
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00:04:46हनुमान द्वारा अशोक वाटिका के विध्वन्स की खबर लंका में तेजी से फैलती है
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00:04:56लंका के योध्धा हनुमान को पकड़ने या मारने के इरादे से उन पर आक्रमन करते हैं
00:05:03लेकिन हनुमान अपनी अदमय शक्ती और गती से उन्हें आसानी से परास्त करते हुए लंका में अपनी उपस्थिती का भै
00:05:10फैलाते रहते हैं
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00:05:18हनुमान द्वारा अशोक वाटिका के विध्वन्स की खबर लंका में तेजी से फैलती है जिससे रावन के सिपाही क्रोधित और
00:05:25भयभीत हो जाते हैं
00:05:28लंका के योध्धा हनुमान को पकड़ने या मारने के इरादे से उन पर आक्रमन करते हैं लेकिन हनुमान अपनी अदमय
00:05:36शक्ती और गती से उन्हें आसानी से परास्त करते हुए लंका में अपनी उपस्थिती का भय फैलाते रहते हैं
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00:05:49हनुमान द्वारा अशोक वाटिका के विध्वन्स की खबर लंका में तेजी से फैलती है, जिससे रावन के सिपाही क्रोधित और
00:05:57भैभीत हो जाते हैं
00:05:59लंका के योध्धा हनुमान को पकड़ने या मारने के इरादे से उन पर आक्रमन करते हैं, लेकिन हनुमान अपनी अदमय
00:06:08शक्ती और गती से उन्हें आसानी से परास्त करते हुए लंका में अपनी उपस्थिती का भै फैलाते रहते हैं
00:06:16कहानी का यह हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है
00:06:20हनुमान द्वारा अशोक वाटिका के विध्वन्स की खबर लंका में तेजी से फैलती है
00:06:26जिससे रावन के सिपाही क्रोधित और भैभीत हो जाते हैं
00:06:47कहानी का यह हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है
00:06:52हनुमान द्वारा अशोक वाटिका के विध्वन्स की खबर लंका में तेजी से फैलती है
00:06:57जिससे रावन के सिपाही क्रोधित और भयभीत हो जाते हैं
00:07:02लंका के योध्धा हनुमान को पकड़ने या मारने के इरादे से उन पर आक्रमन करते हैं
00:07:09लेकिन हनुमान अपनी अदमय शक्ती और गती से उन्हें आसानी से परास्थ करते हुए लंका में अपनी उपस्थिती का भई
00:07:16फैलाते रहते हैं।
00:07:19कहानी का यह हिस्सा अध्भुत और रहस्यमई है।
00:07:23हनुमान द्वारा अशोक वाटिका के विध्वन्स की खबर लंका में तेजी से फैलती है, जिससे रावण के सिपाही क्रोधित और
00:07:31भयभीत हो जाते हैं
00:07:33लंका के योध्धा हनुमान को पकड़ने या मारने के इरादे से उन पर आक्रमन करते हैं, लेकिन हनुमान अपनी अदमय
00:07:42शक्ती और गती से उन्हें आसानी से परास्त करते हुए लंका में अपनी उपस्थिती का भय फैलाते रहते हैं
00:07:50कहानी का यह हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है
00:07:55हनुमान द्वारा अशोक वाटिका के विध्वन्स की खबर लंका में तेजी से फैलती है
00:08:00जिससे रावन के सिपाही क्रोधित और भैभीत हो जाते हैं
00:08:21कहानी का यह हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है
00:08:26हनुमान द्वारा अशोक वाटिका के विध्वन्स की खबर लंका में तेजी से फैलती है
00:08:31जिससे रावन के सिपाही क्रोधित और भयभीत हो जाते हैं
00:08:36लंका के योध्धा हनुमान को पकड़ने या मारने के इरादे से उन पर आक्रमन करते हैं
00:08:43लेकिन हनुमान अपनी अदमशक्ती और गती से उन्हें आसानी से परास्त करते हुए लंका में अपनी उपस्थिती का भय फैलाते
00:08:51रहते हैं.
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00:08:57हनुमान द्वारा अशोक वाटिका के विध्वन्स की खबर लंका में तेजी से फैलती है, जिससे रावन के सिपाही क्रोधित और
00:09:05भयभीत हो जाते हैं
00:09:07लंका के योध्धा हनुमान को पकड़ने या मारने के इरादे से उन पर आक्रमन करते हैं, लेकिन हनुमान अपनी अदमय
00:09:16शक्ती और गती से उन्हें आसानी से परास्त करते हुए लंका में अपनी उपस्थिती का भय फैलाते रहते हैं
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00:09:29हनुमान द्वारा अशोक वाटिका के विध्वन्स की खबर लंका में तेजी से फैलती है
00:09:34जिससे रावन के सिपाही क्रोधित और भैभीत हो जाते हैं
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00:10:00हनुमान द्वारा अशोक वाटिका के विध्वन्स की खबर लंका में तेजी से फैलती है
00:10:05जिससे रावन के सिपाही क्रोधित और भयभीत हो जाते हैं
00:10:10लंका के योध्धा हनुमान को पकड़ने या मारने के इरादे से उन पर आक्रमन करते हैं
00:10:17लेकिन हनुमान अपनी अदमय शक्ती और गती से उन्हें आसानी से परास्त करते हुए लंका में अपनी उपस्थिती का भई
00:10:24फैलाते रहते हैं।
00:10:27हनुमान का क्रोध प्रचंड अगने के समान भड़क रहा था और उनके हर प्रहार से लंका की नीन कांप उठती
00:10:34थी जैसे कोई दैत्य धरा को विदियन कर रहा हो।
00:10:38इस विध्वन्स की भीशन गूंज रावन के शाही दर्बार तक जा पहुँची जहां दर्बारियों के चहरे पर भय और चिंता
00:10:46की गहरी लकीरे खिंच गई।
00:10:49हनुमान अपनी विराट भुजाओं से विशालकाय व्रिक्षों और पत्थरों को उखाड कर रावन के हजारों सैनिकों पर मृत्यू बनकर बरसा
00:10:57रहे थे जिनकी चीखें लंका के आकाश में गूंज रही थी।
00:11:03हनुमान की अजे गर्जना ने लंका की शान्ती भंकर दी और हर क्षन यह स्पष्ट होता जा रहा था कि
00:11:10काल स्वयन एक वानर रूप में लंका के द्वार पर दस्तक दे रहा था।
00:11:15जब हनुमान का उत्पात लंका की हर दिशा में फैल गया, तो रावन के सबसे विश्वस्निय सेनाप्तियों ने चिंता से
00:11:23घिरे होकर समराट के कक्ष की ओर प्रस्थान किया।
00:11:27दर्बार में रावन का क्रोध भयानक रूप ले चुका था। उसकी लाल आखें प्रतिशोध की ज्वाला से धधक रही थी
00:11:34और वह इस अंसुनी चुनौती का स्रोत जानना चाहता था।
00:11:39रावन के आदेश पर उसकी सेना के सैकडों सैनिक भयानक अस्त्रशस्त्रों से लैस होकर हनुमान को घेरने के लिए अशोक
00:11:48वाटिका की ओर बढ़े जिनके पच्चाप से धर्ती थर्रा उठी।
00:11:53लेकिन हनुमान अपनी प्रचंड शक्ती में लीन उन सभी को एक जटके में धूल चटा रहे थे और लंका का
00:12:00हर महल उनकी अजयता का साक्षी बन रहा था।
00:12:04रावन का अहंकार आहत हुआ क्योंकि उसके सबसे कुशल योध्धा भी एक अकेले वानर के सामने टिक नहीं पाए जिससे
00:12:13लंका के भीतर चिंता का एक नया अध्याय शुरू हो गया।
00:12:16क्रोध से तमतमाय रावन ने अपने सबसे पराक्रमी पुत्रों को बुलाया। उसकी आवाज में एक ऐसी गरज थी जो लंका
00:12:25के सिनहासन कक्ष को भी कमपा रही थी।
00:12:29तब रावन के कनिष्ठ पुत्र अक्षय कुमार एक युवा योध्धा जो अपनी अधमय शक्ती और युध कौशल के लिए प्रसिद्ध
00:12:37था, अपने पिता के समक्ष आया।
00:12:40अक्षय कुमार के मुख पर एक निर्भीक मुस्कान थी, जैसे वह इस चुनौती को एक अवसर मान कर स्वयम को
00:12:47सिध्ध करने को आतुर हो।
00:12:50अक्षय कुमार, अपने भव्य रत पर आरूल, युध भूमी की ओर बढ़ा, उसके पीछे लनका के श्रेष्ठ युधाओं की एक
00:12:59विशाल सेना थी, जिनकी गरजना से वातावरन गूंज उठा।
00:13:04हनुमान ने अक्षय कुमार के आगमन को देखा, उनके चेहरे पर कोई भए नहीं था, बलकि एक शान्त आत्म विश्वास
00:13:13था जो आने वाले युध्ध की भीशनता को पहचानता था।
00:13:17दोनों महाबलियों के बीच युध्ध छिड़ गया, अक्षय कुमार ने अपनी अस्त्र शस्त्रों की वर्षा से हनुमान को रोकने का
00:13:25प्रयास किया, लेकिन सभी व्यर्थ सिधह हुए, हनुमान की गती और शक्ती अतुल्नियत ही, वे अक्षय कुमार के हर वार
00:13:35से बचते ह�
00:13:36वे बिजली की तेजी से उस पर पलटवार कर रहे थे, जैसे वे स्वयम काल हूं, अक्षय कुमार ने अपनी
00:13:44पूरी शक्ती का प्रयोग किया, अपने अस्त्रों से अगनी और वजर की वर्षा की, लेकिन हनुमान अपनी अटल द्रिर्था से
00:13:53हर चुनौती का सामना कर रहे थ
00:13:56युद्ध की यह भयनकरता रावन के दर्बार में भी महसूस की जा रही थी, जहां उसके मंत्रीगन भयभीत होकर एक
00:14:05दूसरे को देख रहे थे, अन्तता, हनुमान ने अक्षय कुमार के रथ को धवस्त कर दिया और उसे भूमी पर
00:14:13गिरा कर अपनी एक भयानक गदा के प्रह
00:14:22एक युवा राजकुमार का पतन जिसने रावन के हरिदय में प्रतिशोध की एक नई जवाला प्रजवलित कर दी।
00:14:52विशाल सेना को एकत्रित करने के लिए आगे बढ़ा, अपनी आँखों में एक भयानकर संकल्प लिए। इसी बीच, हनुमान, लंका
00:15:02के उपवन को धवस्त करते हुए, अपनी अजेय शक्ती का प्रदर्शन कर रहे थे, मानोवे राक्षसी सामराज्य की नीव हिला
00:15:11रहे हु
00:15:13अचानक, आकाश में एक भयानक गर्जना हुई और एक अद्रिश्य, प्रचंड शक्ती ने वातावरण को घेर लिया, जो आने वाले
00:15:22महाविनाश का संकेत दे रही थी।
00:15:25इंद्रजीत, अजेय योध्धा, अपनी प्रचंड शक्तियों के साथ हनुमान के सामने खड़ा हो गया, मानो दो ब्रम्हांडिय शक्तियां आमने सामने
00:15:36हुँ।
00:15:37रावन ने अपने सिंघासन पर बैठे हुए, इंद्रजीत की ओर एक द्रिड द्रिश्टी डाली, जिसमें बदले और विजय की अदम्य
00:15:46इच्छा जहलक रही थी।
00:15:48इंद्रजीत ने अपनी दिव्य भुजाओं को उठाया और वेदों के गूर मंत्रों का जाप करते हुए, ब्रहमास्तर का आवाहन किया,
00:15:57जिससे वायुमंडल में एक अलोकिक कमपन फैल गया, एक अविश्वस्निय चमक के साथ, ब्रहमास्तर प्रकट हुआ, उसकी उर्जा
00:16:07से आकाश और प्रिथवी दोनों काप उठे, एक भयनकर शक्ती का स्रोत, इंद्रजीत ने ब्रहमास्तर को हनुमान की ओर छोड़ा,
00:16:17जो एक जलते हुए तारे की भाती आकाश को चीरता हुआ, अपने लक्षय की ओर तेजी से बढ़ा, हनुमान ने
00:16:25ब्रहमास्तर की अलोकिक �
00:16:26शक्ती को पहचान लिया और उसके सम्मान में, स्वयम को उसके रहस्यमय बंधन में बांधने का निश्चय किया, जैसे ही
00:16:36ब्रहमास्तर ने हनुमान को छुआ, एक अद्रिश्य उर्जा ने उन्हें जकर लिया, उनके विशालकाय शरीर को एक क्षण के लिए
00:16:44स्थिर कर दिया
00:16:47ब्रहमास्तर के बंधन में भी, हनुमान के मुख पर कोई भय नहीं था, बलकि एक शांत मुसकान थी, क्योंकि वह
00:16:55अपने उद्देश्य की ओर एक कदम और बढ़ चुके थे
00:16:59लंका की सेना और राक्षसों ने हनुमान को बंधा देख विजय का उद्धोश किया, उनकी गर्जना से लंका के महल
00:17:08गूंज उठे
00:17:09इंद्रजीत ने गर्व से अपनी चाती चौड़ी की, उसे विश्वास था कि उसने एक अजेय शत्रू को परास्त कर दिया
00:17:17है
00:17:18राक्षस सैनिक, अपनी क्रूरता और बल का प्रदर्शन करते हुए, बंधे हुए हनुमान को रावन के दर्बार की ओर ले
00:17:27जाने लगे
00:17:28हनुमान, यद्यपी बंधे हुए थे, फिर भी उनकी चाल में एक अटूट द्रिरता थी, उनका उद्देश रावन के सामने प्रत्यक्ष
00:17:38उपस्थित होना था
00:17:40भव्यस्वर्न लंका के विशाल द्वार खुले और हनुमान को रावन के दर्बार के भयावे वैभव की ओर खीचा गया
00:17:49विभीशन, रावन के दर्बार में उपस्थित, हनुमान की स्थिती को देख कर चिंतित थे, क्योंकि वे इस बंधन के पीछे
00:17:57की दिव्य योजना को समझते थे
00:18:01हनुमान, अपने विशाल काय रूप में, रावन के आलीशान दर्बार में प्रवेश करते हैं, जहां उसकी भव्यता और राक्षसी शक्ती
00:18:10की आभाव व्याप्त थी
00:18:12रावन के सिंघासन के सामने खड़े होकर, हनुमान की निदर आँखे सीधे दस्शीर श्रावन की प्रचंद द्रिश्टी से मिली
00:18:21एक महाकाव ये तक्राव की शुरुआत का समकेत
00:18:25हनुमान की निर्भीक द्रिष्टी और रावन की प्रचन ज्वाला सी आँखें आमने सामने टिक्राईं
00:18:32मानो दो ब्रह्मान्डिय शक्तियां एक दूसरे को तौल रही हो
00:18:36सुदूर वैकुंट में भगवान विश्णू और ब्रमादेव इस क्षन की गंभीरता को समझते हुए
00:18:44अपने अपने लोकों से इस दिव्य लीला का अवलोकन कर रहे थे
00:18:49रावन अपने दस शीर्षों के साथ एक साथ अहनकार पूर्ण मुस्कान बिखेरते हुए
00:18:55एक हाथ से अपने स्वर्ण सिंघासन का विशाल बाजू प्रार करता है जिससे दर्बार में एक गूंज उठती है
00:19:03हनुमान के विराटकाए बंधे हुए रूप के चारों और एक सूक्षम दिव्य आभाव्याप्त थी जो रावन के दर्बार की तामसे
00:19:14कूर्जा के विप्रीत चमक रही थी
00:19:17दर्बार की खामोशी रावन की गंभीर गर्जनापूर्ण वानी से तूटती है जब वह हनुमान से उनके आने का कारण और
00:19:26परिचे जानने की आग्या देता है
00:19:29कैलाश परवत पर भगवान शिव अपनी गेहन समाधी से बाहरा कर देवी पारवती के साथ इस अद्वितिय टक्राव को शांत
00:19:39भाव से देख रहे थे
00:19:40जिसके परिनाम से वे भली भाती परिचित थे
00:19:44रावन अपनी एक भुजा से अट्टहास करते हुए हनुमान की ओर तिरसकार भरी द्रिश्टी से देखता है
00:19:52मानो एक शक्तिशाली राजा एक साधारन बंदी का उफास कर रहा हो
00:19:59सिंघासन के विशालकाई अलनकरणों की जटिल नकाशी से उत्पन छायाएं दर्बार के विशालकाई स्तंभूं पर नाच रही
00:20:07थी जो एक अशुभ और भव्य प्रिश्ट भूमी बना रही थी
00:20:12हनुमान अपनी द्रिर्ता और साहस को बनाए रखते हुए
00:20:16रावन की चुनोती का सामना करने के लिए पुनरतह तत पर शान्ती और शक्ती का प्रतीक बनकर खड़े थे
00:20:24नारद मुनी अपनी वीना के तारों पर उंगलियां फिराते हुए
00:20:29अन्य देवशियों के साथ आकाशगंगा के मध्य से इस अद्भुत द्रिश्य को उत्सुकता से निहार रहे थे
00:20:38हनुमान के मुख पर एक शान्त पर द्रिड अभिव्यक्ती थी
00:20:42उनकी आँखे रावन की क्रोधित द्रिश्टी का सामना कर रही थी
00:20:46मानोवे उसे उसके भविश्य की चेतावनी दे रही हूँ
00:20:50हनुमान के शरीर से एक अद्रिश्य प्रचंट उर्जा का आभा मंडल निकल रहा था
00:20:57जो रावन के दर्बार की राक्षसी भव्यता के बीच एक पवित्र द्वीप के समान प्रतीत होता था
00:21:04हनुमान ने अपनी शांत पर प्रभावशाली वानी में बोलना आरंब किया
00:21:10उनके शब्द रावन के विशालकाए दर्बार की प्रत्येक राक्षसी आत्मा तक गुंचते हुए पहुँचे
00:21:18भगवान विश्नु अपने शेशनाग पर विराजमान एक सूक्षम और संतोषचनक मुस्कान के साथ अपने गरूर को देखते हैं
00:21:27मानोवे जानते हुँ कि यह धर्म की विजय का एक और कदम है
00:21:33रावन के दस मुखों पर धीरे धीरे आश्चर्य और क्रोध का मिश्रन उभराया
00:21:38जब हनुमान के शब्दों में छिपी चुनौती ने उसके अहनकार को भेदना शुरू किया
00:21:46दर्बार में उपस्थित राक्षसों के बीच एक फुस्फुसाहट और बेचैनी फैल गई
00:21:51कुछ भईभीत थे, कुछ क्रोधित और कुछ हनुमान की निदर्ता पर अविश्वास कर रहे थे
00:21:58हनुमान ने अपने स्वामी भगवान राम का संदेश सुनाना जारी रखा
00:22:15इस अप्रत्याशित दूत की वापटुता और साहस को देख कर विस्मित थे, जो ब्रम्हान्डिय योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था
00:22:24विभीशन, चिंता और आशा के मिश्रण के साथ हनुमान की ओर देख रहे थे
00:22:30ये समझते हुए कि यह छोटा वानर ही लंका के भविश्य का निर्धारन करेगा
00:22:37बंधे हुए होने के बावजूद
00:22:39हनुमान का विराटकाय रूप और निदर आत्मा
00:22:43रावन के दरबार में एक ज्वलंत मशाल की तरह चमक रही थी
00:22:48जो अंधकार को चुनौती दे रही थी
00:22:51कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है
00:22:55हनुमान
00:22:56रावन के सामने निर्भीकता से अपना परिचय श्रीराम के दूत के रूप में देते हैं
00:23:02और उसे सीता को तुरंत वापस
00:23:04लोटाने की चेतावनी देते हैं
00:23:07वे रावन को श्रीराम की शक्ती और धर्म का मार्ग अपनाने का उपदेश देते हैं
00:23:13जिसके बाद दर्बार में गहरा सन्नाटा च्छा जाता है
00:23:17लेकिन रावन का अहनकार उसे ये सलाह मानने से रोकता है
00:23:21कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है
00:23:25हनुमान
00:23:37वे रावन को श्रीराम की शक्ती और धर्म का मार्ग अपनाने का उपदेश देते हैं
00:23:43जिसके बाद दर्बार में गहरा सन्नाटा च्छा जाता है
00:23:48लेकिन रावन का अहनकार उसे ये सलाह मानने से रोकता है
00:23:52कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है
00:23:56हनुमान
00:24:23रावन के सामने निर्भीकता से अपना परिचय श्रीराम के दूत के रूप में देते हैं
00:24:33और उसे सीता को तुरंत वापस
00:24:36लोटाने की चेतावनी देते हैं
00:24:39वे रावन को श्रीराम की शक्ती और धर्म का मार्ग अपनाने का उपदेश देते हैं
00:24:45जिसके बाद दरबार में गहरा सन्नाटा च्छा जाता है
00:24:49लेकिन रावन का अहनकार उसे ये सलाह मानने से रोकता है
00:24:53कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है
00:24:57हनुमान
00:24:58रावन के सामने निर्भीकता से अपना परिचय श्रीराम के दूत के रूप में देते हैं
00:25:04और उसे सीता को तुरंत वापस
00:25:06लोटाने की चेतावनी देते हैं
00:25:10वे रावन को श्रीराम की शक्ती और धर्म का मार्ग अपनाने का उपदेश देते हैं
00:25:15जिसके बाद दर्बार में गहरा सन्नाटा च्छा जाता है
00:25:19लेकिन रावन का अहनकार उसे ये सलाह मानने से रोकता है
00:25:24कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है
00:25:28हनुमान
00:25:29रावन के सामने निर्भीकता से अपना परिचय श्रीराम के दूट के रूप में देते हैं
00:25:35और उसे सीता को तुरंत वापस
00:25:37लोटाने की चेतावनी देते हैं
00:25:40वे रावन को श्रीराम की शक्ती और धर्म का मार्ग अपनाने का उपदेश देते हैं
00:25:46जिसके बाद दर्बार में गहरा सन्नाटा चा जाता है
00:25:50लेकिन रावन का अहनकार उसे ये सलाह मानने से रोकता है
00:25:54कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है
00:25:58हनुमान
00:26:00रावन के सामने निर्भीकता से अपना परिचए श्रीराम के दूत के रूप में देते हैं
00:26:05और उसे सीता को तुरंथ वापस
00:26:07लोटाने की चेतावनी देते हैं
00:26:11वे रावन को श्रीराम की शक्ती और धर्म का मार्ग अपनाने का उपदेश देते हैं
00:26:17जिसके बाद दर्बार में गहरा सन्नाटा चा जाता है। लेकिन रावन का अहनकार उसे ये सलाह मानने से रोकता है।
00:26:26कहानी का ये हिस्सा अध्भुत और रहस्यमई है।
00:26:29हनुमान, रावन के सामने निर्भीकता से अपना परिचय श्रीराम के दूत के रूप में देते हैं और उसे सीता को
00:26:37तुरंत वापस लोटाने की चेतावनी देते हैं।
00:26:42वे रावन को श्रीराम की शक्ती और धर्म का मार्ग अपनाने का उपदेश देते हैं।
00:26:47जिसके बाद दर्बार में गहरा सन्नाटा चा जाता है।
00:26:51लेकिन रावन का अहनकार उसे ये सलाह मानने से रोकता है।
00:26:56कहानी का ये हिस्सा अध्भुत और रहस्यमई है।
00:27:00हनुमान
00:27:01रावन के सामने निर्भीकता से अपना परिचय श्रीराम के दूत के रूप में देते हैं और उसे सीता को तुरंत
00:27:08वापस लोटाने की चेतावनी देते हैं।
00:27:12वे रावन को श्रीराम की शक्ती और धर्म का मार्ग अपनाने का उपदेश देते हैं।
00:27:18जिसके बाद दर्बार में गहरा सन्नाटा चा जाता है।
00:27:22लेकिन रावन का अहनकार उसे ये सलाह मानने से रोकता है।
00:27:27कहानी का ये हिस्सा अध्भुत और रहस्यमई है।
00:27:30हनुमान
00:27:31रावन के सामने निर्भीकता से अपना परिचय श्रीराम के दूत के रूप में देते हैं और उसे सीता को तुरंत
00:27:39वापस लोटाने की चेतावनी देते हैं।
00:27:43वे रावन को श्रीराम की शक्ती और धर्म का मार्ग अपनाने का उपदेश देते हैं।
00:27:49जिसके बाद दर्बार में गहरा सन्नाटा चा जाता है।
00:27:52लेकिन रावन का अहनकार उसे ये सलाह मानने से रोकता है।
00:27:57कहानी का ये हिस्सा अध्भुत और रहस्यमई है।
00:28:01हनुमान
00:28:02रावन के सामने निर्भीकता से अपना परिचय श्री राम के दूत के रूप में देते हैं और उसे सीता को
00:28:09तुरंत वापस, लोटाने की चेतावनी देते हैं, वे रावन को श्री राम की शक्ती और धर्म का मार्ग अपनाने का
00:28:17उबदेश देते हैं, जिसके बाद दरबार में �
00:28:21गेहरा सन्नाटा च्छा जाता है, लेकिन रावन का अहनकार उसे ये सलाह मानने से रोकता है, कहानी का ये हिस्सा
00:28:29अध्भुत और रहस्यमई है, हनुमान, रावन के सामने निर्भीकता से अपना परिचय श्रीराम के दूत के रूप में देते हैं
00:28:38और उसे सीता को तुरंत वाप
00:28:41लोटाने की चेतावनी देते हैं, वे रावन को श्रीराम की शक्ती और धर्म का मार्ग अपनाने का उपदेश देते हैं,
00:28:50जिसके बाद दर्बार में गेहरा सन्नाटा च्छा जाता है, लेकिन रावन का अहनकार उसे ये सलाह मानने से रोकता है,
00:28:59कहानी का ये हिस्सा अध्भ�
00:29:01और रहस्यमई है, हनुमान, रावन के सामने निर्भीकता से अपना परिचय श्रीराम के दूत के रूप में देते हैं और
00:29:09उसे सीता को तुरंत वापस, लोटाने की चेतावनी देते हैं, वे रावन को श्रीराम की शक्ती और धर्म का मार्ग
00:29:18अपनाने का उपदेश देते हैं
00:29:20जिसके बाद दर्बार में गहरा सन्नाटा चा जाता है, लेकिन रावन का अहनकार उसे ये सलाह मानने से रोकता है,
00:29:29कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है, हनुमान, रावन के सामने निर्भीकता से अपना परिचय श्रीराम के दूत के
00:29:38रूप में देते हैं और उ
00:29:51जिसके बाद दर्बार में गहरा सन्नाटा चा जाता है, लेकिन रावन का अहनकार उसे ये सलाह मानने से रोकता है,
00:29:59कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है, हनुमान, रावन के सामने निर्भीकता से अपना परिचय श्रीराम के दूत के
00:30:09रूप में देते हैं और उ
00:30:21जिसके बाद दर्बार में गहरा सन्नाटा चा जाता है, लेकिन रावन का अहनकार उसे ये सलाह मानने से रोकता है,
00:30:30कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है, हनुमान, रावन के सामने निर्भीकता से अपना परिचय श्रीराम के दूत के
00:30:39रूप में देते हैं और उ
00:30:52जिसके बाद दर्बार में गहरा सन्नाटा चा जाता है, लेकिन रावन का अहनकार उसे ये सलाह मानने से रोकता है,
00:31:01कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है, हनुमान, रावन के सामने निर्भीकता से अपना परिचय श्रीराम के दूत के
00:31:10रूप में देते हैं और उ
00:31:22जिसके बाद दर्बार में गहरा सन्नाटा चा जाता है, लेकिन रावन का अहनकार उसे ये सलाह मानने से रोकता है,
00:31:31कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है, हनुमान, रावन के सामने निर्भीकता से अपना परिचय श्रीराम के दूत के
00:31:40रूप में देते हैं और उ
00:31:44लोटाने की चेतावनी देते हैं, वे रावन को श्रीराम की शक्ती और धर्म का मार्ग अपनाने का उपदेश देते हैं,
00:31:53जिसके बाद दर्बार में गहरा सन्नाटा चा जाता है, लेकिन रावन का अहनकार उसे ये सलाह मानने से रोकता है,
00:32:01कहानी का ये हिस्सा अद्भुत औ
00:32:04और रहस्यमई है, हनुमान, रावन के सामने निर्भीकता से अपना परिचय श्रीराम के दूत के रूप में देते हैं और
00:32:12उसे सीता को तुरंत वापस, लोटाने की चेतावनी देते हैं, वे रावन को श्रीराम की शक्ती और धर्म का मार्ग
00:32:21अपनाने का उपदेश देते हैं
00:32:23जिसके बाद दर्बार में गहरा सन्नाटा चा जाता है, लेकिन रावन का अहनकार उसे ये सलाह मानने से रोकता है,
00:32:33कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है, हनुमान, रावन के सामने निर्भीकता से अपना परिचय श्रीराम के दूत के
00:32:42रूप में देते हैं और उ
00:32:54जिसके बाद दर्बार में गहरा सन्नाटा चा जाता है, लेकिन रावन का अहनकार उसे ये सलाह मानने से रोकता है,
00:33:03हनुमान के अटलवचनों के बाद, दर्बार में पस्रे गहन सन्नाटे को तोड़ते हुए, धर्म प्रायन विभीशन ने अपने जियेश्ठ प्राता
00:33:13राव
00:33:22धीर गंभीर स्वर में रावन को संबोधित करते हुए, उसे काल के भय और श्रीराम की अविनाशी शक्ती से अवगत
00:33:31कराने लगे।
00:33:52अनिश्चित्ता के भाव स्पष्ट थे, जबकि विभीशन का शांत और अडिक धैर्य उनकी विचलित आत्माओं के विप्रीत चमक रहा था।
00:34:22उभरने लगे थे, क्योंकि उसके ही भाई ने भरे दर्बार में उसे उसकी तुटियों से अवगत कराने का साहस किया
00:34:30था।
00:34:31पवन पुत्र हनुमान, अपने बलशाली शरीर में शांत मुद्रा धारन किये, विभीशन के धर्म प्रायन वचनों को ध्यान पूर्वक सुन
00:34:41रहे थे, उनके मुख पर एक सूक्षम स्वीकृती का भाव जहलक रहा था।
00:34:46दर्बारी दीपक की लौ, अंधकार भरे दर्बार में टिम्टिमाते हुए, शांती की क्षीन आशा का प्रतीक बन गई, जो रावन
00:34:56के बढ़ते क्रोध की छाया में धीरे-धीरे बुझती जा रही थी।
00:35:01विभीशन ने रावन के विनाशकारी अहनकार के परिनामों को स्पष्ट करते हुए, लनका के भविश्य पर आने वाले घोर संकट
00:35:10की कलपना करने का आग्रह किया, यदि उसने अपनी भूल स्वीकार नहीं की, विभीशन के अंतिम शब्द अभी पूरे भी
00:35:19नहीं हुए थे
00:35:20की रावन, अपने अहनकार से अंधा होकर, एक भयानक गरजना के साथ अपने सिंघासन से उठ खड़ा हुआ, उसकी आँखें
00:35:29आग बरसा रही थी, रावन के मुख से विशैले शब्द फूट पड़े, उसने विभीशन के हर तर्क को अपनी क्रोधाग्मी
00:35:38में भस्म करते ह�
00:35:49और उसके आसन के समीप लगे ब्राजिय से अगनी की लप्टे भयावेह रूप से उपर उठ रही थी, मानो स्वयम
00:35:58प्रकृती भी उसके रोश का अनुभव कर रही हो, भरे दर्बार में, रावन ने अपने छोटे भाई विभीशन को अपमानित
00:36:06करते हुए, उसकी वफादा
00:36:08पर प्रशन चिनह लगाया और उसे कायरता का प्रतीक घोशित किया, जिससे सभी दर्बारी स्तब्ध रह गए, विभीशन, अपने भाई
00:36:19के तीखे वचनों और अपमान को धैर्य पूर्वक सहते हुए, उनके मुख पर अब गेहन दुख और त्याग का भाव
00:36:26था, परंतु �
00:36:28उनका धर्म पर विश्वास अटल रहा, हनुमान ने अपने भीतर उचती क्रोध की लहरों को नियंतरित करते हुए, अपने स्वामी
00:36:37श्रीराम के दूत के रूप में अपनी मर्यादा बनाए रखी, परंतु उनकी मुठी द्रिर्ता से भींच गई थी, दर्बार की
00:36:46विशाल �
00:36:46और अंधकार में वास्तुकला, जिसके कोनों में छायाएं मंडरा रही थी, रावन के अत्याचारी शासन और उसके दर्बार में व्याप्त
00:36:55उत्पीरन के माहौल को दर्शा रही थी, अहनकार में चूर रावन ने क्रोधित होकर विभीशन को आदेश दिया कि वह
00:37:04तुरंत द
00:37:05दर्बार छोड़ दे, और दोबारा ऐसी बाते कहने पर गंभीर परिनामों की चेतावनी दी, गहरे दुख में दूबे विभीशन ने
00:37:14अपने क्रोधी ब्राता रावन की ओर अंतिम द्रिश्टी डाली, उसके मुख पर अपने प्रिय लनका और परिवार के भविश्य की
00:37:22चि
00:37:35अपने भाई के क्रोधित नेत्रों से दूर, दर्बार से बाहर निकल रहे थे, उनके हर कदम में एक शांत दिरता
00:37:43थी, दर्बार का वह रिक्त स्थान जहां विभीशन खड़े थे, अब सूना था, जो रावन के अहनकार के कारण परिवार
00:37:52और सामराज्य में उत्पन हुई �
00:37:54विभाजन की गहरी खाई का प्रतीक बन गया, कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है, रावन, हनुमान के निर्भीकता
00:38:04और उनके वानर रूप का अपमान करने के लिए, उनकी पूँच में आग लगाने का आदेश देता है, लनका के
00:38:12सैनिक हनुमान की पूँच को
00:38:14कपड़े और तेल से लपेट कर, उसमें आग लगा देते हैं, जिससे पूरे दर्बार में उफास का माहौल बन जाता
00:38:22है, लेकिन हनुमान इस अपमान को अपनी शक्ती का प्रदर्शन करने के अफसर में बदल देते हैं, कहानी का ये
00:38:31हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है, र
00:38:44अनका के सैनिक हनुमान की पूँच को कपड़े और तेल से लपेट कर, उसमें आग लगा देते हैं, जिससे पूरे
00:38:52दर्बार में उफास का माहौल बन जाता है, लेकिन हनुमान इस अपमान को अपनी शक्ती का प्रदर्शन करने के अफसर
00:39:00में बदल देते हैं, कहानी का ये हि
00:39:15अनका के सैनिक हनुमान की पूँच को कपड़े और तेल से लपेट कर, उसमें आग लगा देते हैं, जिससे पूरे
00:39:24दर्बार में उफास का माहौल बन जाता है, लेकिन हनुमान इस अपमान को अपनी शक्ती का प्रदर्शन करने के अफसर
00:39:32में बदल देते हैं, कहानी का ये हि
00:39:35अध्भुत और रहस्यमई है, रावन, हनुमान के निर्भीकता और उनके वानर रूप का अपमान करने के लिए, उनकी पूँच में
00:39:45आग लगाने का आदेश देता है, लनका के सैनिक हनुमान की पूँच को कपड़े और तेल से लपेट कर, उसमें
00:39:53आग लगा देते हैं, जि
00:40:05कहानी का ये हिस्सा अध्भुत और रहस्यमई है, रावन, हनुमान के निर्भीकता और उनके वानर रूप का अपमान करने के
00:40:15लिए, उनकी पूँच में आग लगाने का आदेश देता है, लनका के सैनिक हनुमान की पूँच को कपड़े और तेल
00:40:23से लपेट कर, उसमें आग �
00:40:25लगा देते हैं, जिससे पूरे दर्बार में उफास का माहौल बन जाता है, लेकिन हनुमान इस अपमान को अपनी शक्ती
00:40:34का प्रदर्शन करने के अफसर में बदल देते हैं, कहानी का ये हिस्सा अध्भुत और रहस्यमई है, रावन, हनुमान के
00:40:43निर्भीकता और उनके वान
00:40:55कर, उसमें आग लगा देते हैं, जिससे पूरे दर्बार में उफास का माहौल बन जाता है, लेकिन हनुमान इस अपमान
00:41:05को अपनी शक्ती का प्रदर्शन करने के अफसर में बदल देते हैं, कहानी का ये हिस्सा अध्भुत और रहस्यमई है,
00:41:13रावन, हनुमान के निर्भीकत
00:41:16और उनके वानर रूप का अपमान करने के लिए, उनकी पूँच में आग लगाने का आदेश देता है, लनका के
00:41:24सैनिक हनुमान की पूँच को कपड़े और तेल से लपेट कर, उसमें आग लगा देते हैं, जिससे पूरे दर्बार में
00:41:32उफास का माहौल बन जाता है, लेकिन ह
00:41:35हनुमान इस अपमान को अपनी शक्ती का प्रदर्शन करने के अफसर में बदल देते हैं, कहानी का ये हिस्सा अद्भुत
00:41:44और रहस्यमई है, रावन, हनुमान के निर्भीकता और उनके वानर रूप का अपमान करने के लिए, उनकी पूँच में आग
00:41:53लगाने का आदेश देत
00:41:54है, लनका के सैनिक हनुमान की पूँच को कपड़े और तेल से लपेट कर, उसमें आग लगा देते हैं, जिससे
00:42:03पूरे दर्बार में उफास का माहौल बन जाता है, लेकिन हनुमान इस अपमान को अपनी शक्ती का प्रदर्शन करने के
00:42:11अफसर में बदल देते हैं, कहानी का य
00:42:24उनकी पूँच में आग लगाने का आदेश देता है, लनका के सैनिक हनुमान की पूँच को कपड़े और तेल से
00:42:31लपेट कर, उसमें आग लगा देते हैं, जिससे पूरे दर्बार में उफास का माहौल बन जाता है, लेकिन हनुमान इस
00:42:40अपमान को अपनी शक्ती का प्रदर्
00:42:42करने के अफसर में बदल देते हैं।
00:43:17कहानी का ये हिस्सा अध्भुत और रहस्यमई है।
00:43:42लेकिन हनुमान इस अपमान को अपनी शक्ती का प्रदर्शन करने के अफसर में बदल देते हैं।
00:43:49कहानी का ये हिस्सा अध्भुत और रहस्यमई है।
00:43:53रावन हनुमान के निर्भीकता और उनके वानर रूप का अपमान करने के लिए उनकी पूँच में आग लगाने का आदेश
00:44:02देता है।
00:44:03लनका के सैनिक हनुमान की पूँच को कपड़े और तेल से लपेट कर उसमें आग लगा देते हैं, जिससे पूरे
00:44:11दर्बार में उफास का माहौल बन जाता है।
00:44:14लेकिन हनुमान इस अपमान को अपनी शक्ती का प्रदर्शन करने के अफसर में बदल देते हैं।
00:44:21कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
00:44:25रावन, हनुमान के निर्भीकता और उनके वानर रूप का अपमान करने के लिए, उनकी पूँच में आग लगाने का आदेश
00:44:34देता है।
00:44:35लनका के सैनिक हनुमान की पूँच को कपड़े और तेल से लपेट कर, उसमें आग लगा देते हैं, जिससे पूरे
00:44:43दर्बार में उफास का माहौल बन जाता है।
00:44:46लेकिन हनुमान इस अपमान को अपनी शक्ती का प्रदर्शन करने के अफसर में बदल देते हैं।
00:44:53कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
00:44:57रावन, हनुमान के निर्भीकता और उनके वानर रूप का अपमान करने के लिए, उनकी पूँच में आग लगाने का आदेश
00:45:06देता है।
00:45:07लनका के सैनिक हनुमान की पूँच को कपड़े और तेल से लपेट कर, उसमें आग लगा देते हैं, जिससे पूरे
00:45:15दर्बार में उफास का माहौल बन जाता है।
00:45:18लेकिन हनुमान इस अपमान को अपनी शक्ती का प्रदर्शन करने के अफसर में बदल देते हैं।
00:45:25कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
00:45:29रावन, हनुमान के निर्भीकता और उनके वानर रूप का अपमान करने के लिए, उनकी पूँच में आग लगाने का आदेश
00:45:38देता है।
00:45:39लनका के सैनिक हनुमान की पूँच को कपड़े और तेल से लपेट कर, उसमें आग लगा देते हैं, जिससे पूरे
00:45:47दर्बार में उफास का माहौल बन जाता है।
00:45:50लेकिन हनुमान इस अपमान को अपनी शक्ती का प्रदर्शन करने के अफसर में बदल देते हैं।
00:45:57कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
00:46:01रावन, हनुमान के निर्भीकता और उनके वानर रूप का अपमान करने के लिए, उनकी पूँच में आग लगाने का आदेश
00:46:09देता है।
00:46:11लनका के सैनिक हनुमान की पूँच को कपड़े और तेल से लपेट कर, उसमें आग लगा देते हैं, जिससे पूरे
00:46:19दर्बार में उफास का माहौल बन जाता है।
00:46:22लेकिन हनुमान इस अपमान को अपनी शक्ती का प्रदर्शन करने के अफसर में बदल देते हैं।
00:46:29कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
00:46:32रावन, हनुमान के निर्भीकता और उनके वानर रूप का अपमान करने के लिए, उनकी पूँच में आग लगाने का आदेश
00:46:41देता है।
00:46:43लनका के सैनिक हनुमान की पूँच को कपड़े और तेल से लपेट कर, उसमें आग लगा देते हैं, जिससे पूरे
00:46:51दर्बार में उफास का माहौल बन जाता है।
00:46:54लेकिन हनुमान इस अपमान को अपनी शक्ती का प्रदर्शन करने के अफसर में बदल देते हैं।
00:47:01कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
00:47:05रावन, हनुमान के निर्भीकता और उनके वानर रूप का अपमान करने के लिए, उनकी पूँच में आग लगाने का आदेश
00:47:13देता है।
00:47:14लनका के सैनिक हनुमान की पूँच को कपड़े और तेल से लपेट कर, उसमें आग लगा देते हैं, जिससे पूरे
00:47:23दर्बार में उफास का माहौल बन जाता है।
00:47:26लेकिन हनुमान इस अपमान को अपनी शक्ती का प्रदर्शन करने के अफसर में बदल देते हैं।
00:47:33कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
00:47:37रावन, हनुमान के निर्भीकता और उनके वानर रूप का अपमान करने के लिए, उनकी पूँच में आग लगाने का आदेश
00:47:45देता है।
00:47:46लनका के सैनिक हनुमान की पूँच को कपड़े और तेल से लपेट कर, उसमें आग लगा देते हैं, जिससे पूरे
00:47:55दर्बार में उफास का माहौल बन जाता है।
00:47:58लेकिन हनुमान इस अपमान को अपनी शक्ती का प्रदर्शन करने के अफसर में बदल देते हैं।
00:48:05कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
00:48:08रावन, हनुमान के निर्भीकता और उनके वानर रूप का अपमान करने के लिए, उनकी पूँच में आग लगाने का आदेश
00:48:17देता है।
00:48:18लनका के सैनिक हनुमान की पूँच को कपड़े और तेल से लपेट कर, उसमें आग लगा देते हैं, जिससे पूरे
00:48:27दर्बार में उफास का माहौल बन जाता है।
00:48:30लेकिन हनुमान इस अपमान को अपनी शक्ती का प्रदर्शन करने के अफसर में बदल देते हैं।
00:48:37कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
00:48:40अपनी पूँच में लगी आग के साथ।
00:48:43हनुमान अपने आकार को बढ़ा कर लनका के हर घर, मेहल और सनरचना पर कूदते हैं।
00:48:50अपनी पूँच से पूरी सोने की लनका को जला डालते हैं।
00:48:54लनकावासी भैभीत होकर भागते हैं।
00:48:57और एक पल में रावन की अभेद्य नगरी आग की लपटों में घिर जाती है।
00:49:03केवल विभीशन के घर को छोड़ कर, जिसे हनुमान ने अपनी बुद्धी से बचा लिया था।
00:49:10कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
00:49:13अपनी पूँच में लगी आग के साथ।
00:49:16हनुमान अपने आकार को बढ़ा कर लनका के हर घर, मेहल और सनरचना पर कूदते हैं।
00:49:23अपनी पूँच से पूरी सोने की लनका को जला डालते हैं।
00:49:27लनकावासी भैभीत होकर भागते हैं।
00:49:30और एक पल में, रावन की अभेद्य नगरी आग की लपटों में घिर जाती है।
00:49:36केवल विभीशन के घर को छोड़ कर, जिसे हनुमान ने अपनी बुद्धी से बचा लिया था।
00:49:42कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
00:49:46अपनी पूंच में लगी आग के साथ।
00:49:49हनुमान अपने आकार को बढ़ा कर लनका के हर घर, मेहल और सनरचना पर कूदते हैं।
00:49:56अपनी पूंच से पूरी सोने की लनका को जला डालते हैं।
00:50:00लनकावासी भैभीत होकर भागते हैं।
00:50:03और एक पल में रावन की अभेद्य नगरी आग की लप्टों में घिर जाती है।
00:50:08केवल विभीशन के घर को छोड़ कर, जिसे हनुमान ने अपनी बुद्धी से बचा लिया था।
00:50:15कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
00:50:19अपनी पूंच में लगी आग के साथ।
00:50:21हनुमान अपने आकार को बढ़ा कर लनका के हर घर, मेहल और संरचना पर कूदते हैं।
00:50:28अपनी पूंच से पूरी सोने की लनका को जला डालते हैं।
00:50:32लनकावासी भैभीत होकर भागते हैं।
00:50:36और एक पल में, रावन की अभेद्यनगरी आग की लप्टों में घिर जाती है।
00:50:41केवल विभीशन के घर को छोड़ कर, जिसे हनुमान ने अपनी बुद्धी से बचा लिया था।
00:50:48कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
00:50:52अपनी पूंच में लगी आग के साथ।
00:50:54हनुमान अपने आकार को बढ़ा कर लनका के हर घर, मेहल और सनरचना पर कूदते हैं।
00:51:01अपनी पूंच से पूरी सोने की लनका को जला डालते हैं।
00:51:05लनकावासी भैभीत होकर भागते हैं।
00:51:08और एक पल में रावन की अभेद्यनगरी आग की लप्टों में घिर जाती है।
00:51:14केवल विभीशन के घर को छोड़ कर, जिसे हनुमान ने अपनी बुद्धी से बचा लिया था।
00:51:21कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
00:51:24अपनी पूंच में लगी आग के साथ।
00:51:27हनुमान अपने आकार को बढ़ा कर लनका के हर घर, मेहल और सनरचना पर कूदते हैं।
00:51:34अपनी पूंच से पूरी सोने की लनका को जला डालते हैं।
00:51:38लनकावासी भैभीत होकर भागते हैं।
00:51:41और एक पल में, रावन की अभेद्य नगरी आग की लपटों में घिर जाती है।
00:51:47केवल विभीशन के घर को छोड़ कर, जिसे हनुमान ने अपनी बुद्धी से बचा लिया था।
00:51:53कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
00:51:57अपनी पूंच में लगी आग के साथ।
00:52:00हनुमान अपने आकार को बढ़ा कर लनका के हर घर, मेहल और सनरचना पर कूदते हैं।
00:52:07अपनी पूंच से पूरी सोने की लनका को जला डालते हैं।
00:52:11लनकावासी भैभीत होकर भागते हैं।
00:52:14और एक पल में रावन की अभेद्य नगरी आग की लपटों में घिर जाती है।
00:52:19केवल विभीशन के घर को छोड़ कर, जिसे हनुमान ने अपनी बुद्धी से बचा लिया था।
00:52:26कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
00:52:30अपनी पूंच में लगी आग के साथ।
00:52:33हनुमान अपने आकार को बढ़ा कर लनका के हर घर, मेहल और सनरचना पर कूदते हैं।
00:52:39अपनी पूंच से पूरी सोने की लनका को जला डालते हैं।
00:52:44लनकावासी भैभीत होकर भागते हैं।
00:52:47और एक पल में, रावन की अभेद्य नगरी आग की लपटों में घिर जाती है।
00:52:52केवल विभीशन के घर को छोड़ कर, जिसे हनुमान ने अपनी बुद्धी से बचा लिया था।
00:52:59कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
00:53:02अपनी पूंच में लगी आग के साथ।
00:53:05हनुमान अपने आकार को बढ़ा कर लनका के हर घर, मेहल और सनरचना पर कूदते हैं।
00:53:12अपनी पूंच से पूरी सोने की लनका को जला डालते हैं।
00:53:16लनकावासी भैभीत होकर भागते हैं।
00:53:20और एक पल में रावन की अभेद्यनगरी आग की लपटों में घिर जाती है।
00:53:25केवल विभीशन के घर को छोड़ कर, जिसे हनुमान ने अपनी बुद्धी से बचा लिया था।
00:53:32कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
00:53:35अपनी पूंच में लगी आग के साथ।
00:53:38हनुमान अपने आकार को बढ़ा कर लनका के हर घर, मेहल और सनरचना पर कूदते हैं।
00:53:45अपनी पूंच से पूरी सोने की लनका को जला डालते हैं।
00:53:49लनकावासी भैभीत होकर भागते हैं।
00:53:52और एक पल में, रावन की अभेद्य नगरी आग की लपटों में घिर जाती है।
00:53:58केवल विभीशन के घर को छोड़ कर, जिसे हनुमान ने अपनी बुद्धी से बचा लिया था।
00:54:05कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
00:54:08अपनी पूंच में लगी आग के साथ।
00:54:11हनुमान अपने आकार को बढ़ा कर लनका के हर घर, मेहल और सनरचना पर कूदते हैं।
00:54:18अपनी पूंच से पूरी सोने की लनका को जला डालते हैं।
00:54:22लनकावासी भैभीत होकर भागते हैं।
00:54:25और एक पल में, रावन की अभेद्यनगरी आग की लप्टों में घिर जाती है।
00:54:31केवल विभीशन के घर को छोड़ कर, जिसे हनुमान ने अपनी बुद्धी से बचा लिया था।
00:54:37कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
00:54:41अपनी पूंच में लगी आग के साथ।
00:54:44हनुमान अपने आकार को बढ़ा कर लनका के हर घर, मेहल और सनरचना पर कूदते हैं।
00:54:51अपनी पूंच से पूरी सोने की लनका को जला डालते हैं।
00:54:55लनकावासी भैभीत होकर भागते हैं।
00:54:58और एक पल में रावन की अभेद्य नगरी आग की लपटों में घिर जाती है।
00:55:04केवल विभीशन के घर को छोड़ कर, जिसे हनुमान ने अपनी बुद्धी से बचा लिया था।
00:55:10कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
00:55:14अपनी पूंच में लगी आग के साथ।
00:55:16हनुमान अपने आकार को बढ़ा कर लनका के हर घर, मेहल और सनरचना पर कूदते हैं।
00:55:23अपनी पूंच से पूरी सोने की लनका को जला डालते हैं।
00:55:28लनकावासी भैभीत होकर भागते हैं।
00:55:31और एक पल में रावन की अभेद्यनगरी आग की लप्टों में घिर जाती है।
00:55:36केवल विभीशन के घर को छोड़ कर, जिसे हनुमान ने अपनी बुद्धी से बचा लिया था।
00:55:43कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
00:55:46अपनी पूंच में लगी आग के साथ।
00:55:49हनुमान अपने आकार को बढ़ा कर लनका के हर घर, मेहल और सनरचना पर कूदते हैं।
00:55:56अपनी पूंच से पूरी सोने की लनका को जला डालते हैं।
00:56:00लनकावासी भैभीत होकर भागते हैं।
00:56:03और एक पल में रावन की अभेद्यनगरी आग की लप्टों में घिर जाती है।
00:56:09केवल विभीशन के घर को छोड़ कर, जिसे हनुमान ने अपनी बुद्धी से बचा लिया था।
00:56:16कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
00:56:19अपनी पूँच में लगी आग के साथ।
00:56:22हनुमान अपने आकार को बढ़ा कर लनका के हर घर, मेहल और सनरचना पर कूदते हैं।
00:56:29अपनी पूँच से पूरी सोने की लनका को जला डालते हैं।
00:56:33लनकावासी भैभीत होकर भागते हैं।
00:56:36और एक पल में, रावन की अभेद्य नगरी आग की लप्टों में घिर जाती है।
00:56:42केवल विभीशन के घर को छोड़ कर, जिसे हनुमान ने अपनी बुद्धी से बचा लिया था।
00:56:49कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
00:56:52अपनी पूंच में लगी आग के साथ।
00:56:55हनुमान अपने आकार को बढ़ा कर लनका के हर घर, मेहल और सनरचना पर कूदते हैं।
00:57:02अपनी पूंच से पूरी सोने की लनका को जला डालते हैं।
00:57:06लनकावासी भैभीत होकर भागते हैं।
00:57:09और एक पल में रावन की अभेद्यनगरी आग की लप्टों में घिर जाती है।
00:57:15केवल विभीशन के घर को छोड़ कर, जिसे हनुमान ने अपनी बुद्धी से बचा लिया था।
00:57:21कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
00:57:25अपनी पूंच में लगी आग के साथ।
00:57:28हनुमान अपने आकार को बढ़ा कर लनका के हर घर, मेहल और सनरचना पर कूदते हैं।
00:57:35अपनी पूंच से पूरी सोने की लनका को जला डालते हैं।
00:57:39लनकावासी भैभीत होकर भागते हैं।
00:57:42और एक पल में रावन की अभेद्य नगरी आग की लपटों में घिर जाती है।
00:57:47केवल विभीशन के घर को छोड़ कर, जिसे हनुमान ने अपनी बुद्धी से बचा लिया था।
00:57:54कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
00:57:58अपनी पूंच में लगी आग के साथ।
00:58:01हनुमान अपने आकार को बढ़ा कर लनका के हर घर, मेहल और सनरचना पर कूदते हैं।
00:58:07अपनी पूंच से पूरी सोने की लनका को जला डालते हैं।
00:58:12लनकावासी भैभीत होकर भागते हैं।
00:58:15और एक पल में रावन की अभेद्यनगरी आग की लप्टों में घिर जाती है।
00:58:20केवल विभीशन के घर को छोड़ कर, जिसे हनुमान ने अपनी बुद्धी से बचा लिया था।
00:58:27कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
00:58:30अपनी पूंच में लगी आग के साथ।
00:58:33हनुमान अपने आकार को बढ़ा कर लनका के हर घर, मेहल और सनरचना पर कूदते हैं।
00:58:40अपनी पूंच से पूरी सोने की लनका को जला डालते हैं।
00:58:44लनकावासी भैभीत होकर भागते हैं।
00:58:47और एक पल में रावन की अभेद्य नगरी आग की लपटों में घिर जाती है।
00:58:53केवल विभीशन के घर को छोड़ कर, जिसे हनुमान ने अपनी बुद्धी से बचा लिया था।
00:59:00कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
00:59:03अपनी पूंच में लगी आग के साथ।
00:59:06हनुमान अपने आकार को बढ़ा कर लनका के हर घर, मेहल और सनरचना पर कूदते हैं।
00:59:13अपनी पूंच से पूरी सोने की लनका को जला डालते हैं।
00:59:17लनकावासी भैभीत होकर भागते हैं।
00:59:20और एक पल में, रावन की अभेद्यनगरी आग की लप्टों में घिर जाती है।
00:59:26केवल विभीशन के घर को छोड़ कर, जिसे हनुमान ने अपनी बुद्धी से बचा लिया था।
00:59:32कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
00:59:36लनका को जला कर, हनुमान एक बार फिर अशोक वॉटिका जाते हैं और सीता को अंतिम बार प्रणाम करते हैं।
00:59:45वे उन्हें आश्वासन देते हैं कि श्रीराम जल्द ही उन्हें बचाने आएंगे और पूरी लनका को नश्ट कर देंगे।
00:59:53इसके बाद हनुमान विशाल समुद्र को पार कर वापस लोटते हैं।
00:59:58श्रीराम को सारी घटना सुनाने के लिए कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
01:00:05लनका को जला कर हनुमान एक बार फिर अशोक वॉटिका जाते हैं और सीता को अंतिम बार प्रणाम करते हैं।
01:00:14वे उन्हें आश्वासन देते हैं कि श्रीराम जल्द ही उन्हें बचाने आएंगे और पूरी लनका को नश्ट कर देंगे।
01:00:22इसके बाद हनुमान विशाल समुद्र को पार कर वापस लोटते हैं।
01:00:27श्रीराम को सारी घटना सुनाने के लिए कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
01:00:34लनका को जलाकर हनुमान एक बार फिर अशोक वॉटिका जाते हैं और सीता को अंतिम बार प्रणाम करते हैं।
01:00:43वे उन्हें आश्वासन देते हैं कि श्रीराम जल्द ही उन्हें बचाने आएंगे और पूरी लनका को नश्ट कर देंगे।
01:00:51इसके बाद हनुमान विशाल समुद्र को पार कर वापस लोटते हैं।
01:00:56श्रीराम को सारी घटना सुनाने के लिए कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
01:01:03लनका को जलाकर हनुमान एक बार फिर अशोक वॉटिका जाते हैं और सीता को अंतिम बार प्रणाम करते हैं।
01:01:12वे उन्हें आश्वासन देते हैं कि श्रीराम जल्द ही उन्हें बचाने आएंगे और पूरी लनका को नश्ट कर देंगे।
01:01:20इसके बाद हनुमान विशाल समुद्र को पार कर वापस लोटते हैं।
01:01:25श्रीराम को सारी घटना सुनाने के लिए कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
01:01:32लनका को जलाकर हनुमान एक बार फिर अशोक वॉटिका जाते हैं और सीता को अंतिम बार प्रणाम करते हैं।
01:01:41वे उन्हें आश्वासन देते हैं कि श्रीराम जल्द ही उन्हें बचाने आएंगे और पूरी लनका को नश्ट कर देंगे।
01:01:49इसके बाद हनुमान विशाल समुद्र को पार कर वापस लोटते हैं।
01:01:54श्रीराम को सारी घटना सुनाने के लिए कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
01:02:01लनका को जलाकर हनुमान एक बार फिर अशोक वॉटिका जाते हैं और सीता को अंतिम बार प्रणाम करते हैं।
01:02:10वे उन्हें आश्वासन देते हैं कि श्रीराम जल्द ही उन्हें बचाने आएंगे और पूरी लनका को नश्ट कर देंगे।
01:02:18इसके बाद हनुमान विशाल समुद्र को पार कर वापस लोटते हैं।
01:02:23श्रीराम को सारी घटना सुनाने के लिए कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
01:02:31लनका को जलाकर हनुमान एक बार फिर अशोक वॉटिका जाते हैं और सीता को अंतिम बार प्रणाम करते हैं।
01:02:39वे उन्हें आश्वासन देते हैं कि श्रीराम जल्द ही उन्हें बचाने आएंगे और पूरी लनका को नश्ट कर देंगे।
01:02:47इसके बाद हनुमान विशाल समुद्र को पार कर वापस लोटते हैं।
01:02:52श्रीराम को सारी घटना सुनाने के लिए कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
01:03:00लनका को जलाकर हनुमान एक बार फिर अशोक वॉटिका जाते हैं और सीता को अंतिम बार प्रणाम करते हैं।
01:03:08वे उन्हें आश्वासन देते हैं कि श्रीराम जल्द ही उन्हें बचाने आएंगे और पूरी लनका को नश्ट कर देंगे।
01:03:16इसके बाद हनुमान विशाल समुद्र को पार कर वापस लोटते हैं।
01:03:21श्रीराम को सारी घटना सुनाने के लिए कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
01:03:29लनका को जला कर हनुमान एक बार फिर अशोक वॉटिका जाते हैं और सीता को अंतिम बार प्रणाम करते हैं।
01:03:37वे उन्हें आश्वासन देते हैं कि श्रीराम जल्द ही उन्हें बचाने आएंगे और पूरी लनका को नश्ट कर देंगे।
01:03:45इसके बाद हनुमान विशाल समुद्र को पार कर वापस लोटते हैं।
01:03:50श्रीराम को सारी घटना सुनाने के लिए कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
01:03:58लनका को जला कर हनुमान एक बार फिर अशोक वॉटिका जाते हैं और सीता को अंतिम बार प्रणाम करते हैं।
01:04:06वे उन्हें आश्वासन देते हैं कि श्रीराम जल्द ही उन्हें बचाने आएंगे और पूरी लनका को नश्ट कर देंगे।
01:04:15इसके बाद हनुमान विशाल समुद्र को पार कर वापस लोटते हैं।
01:04:20श्रीराम को सारी घटना सुनाने के लिए कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
01:04:27लनका को जलाकर हनुमान एक बार फिर अशोक वॉटिका जाते हैं और सीता को अंतिम बार प्रणाम करते हैं।
01:04:35वे उन्हें आश्वासन देते हैं कि श्रीराम जल्द ही उन्हें बचाने आएंगे और पूरी लनका को नश्ट कर देंगे।
01:04:43इसके बाद हनुमान विशाल समुद्र को पार कर वापस लोटते हैं।
01:04:48श्रीराम को सारी घटना सुनाने के लिए कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
01:04:56लनका को जलाकर हनुमान एक बार फिर अशोक वॉटिका जाते हैं और सीता को अंतिम बार प्रणाम करते हैं।
01:05:04वे उन्हें आश्वासन देते हैं कि श्रीराम जल्द ही उन्हें बचाने आएंगे और पूरी लनका को नश्ट कर देंगे।
01:05:13इसके बाद हनुमान विशाल समुद्र को पार कर वापस लोटते हैं।
01:05:18श्रीराम को सारी घटना सुनाने के लिए कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
01:05:25लनका को जला कर हनुमान एक बार फिर अशोक वॉटिका जाते हैं और सीता को अंतिम बार प्रणाम करते हैं।
01:05:33वे उन्हें आश्वासन देते हैं कि श्रीराम जल्द ही उन्हें बचाने आएंगे और पूरी लनका को नश्ट कर देंगे।
01:05:41इसके बाद हनुमान विशाल समुद्र को पार कर वापस लोटते हैं।
01:05:47श्रीराम को सारी घटना सुनाने के लिए कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
01:05:54लनका को जलाकर हनुमान एक बार फिर अशोक वॉटिका जाते हैं और सीता को अंतिम बार प्रणाम करते हैं।
01:06:02वे उन्हें आश्वासन देते हैं कि श्रीराम जल्द ही उन्हें बचाने आएंगे और पूरी लनका को नश्ट कर देंगे।
01:06:10इसके बाद हनुमान विशाल समुद्र को पार कर वापस लोटते हैं।
01:06:15श्रीराम को सारी घटना सुनाने के लिए कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
01:06:23लनका को जलाकर हनुमान एक बार फिर अशोक वॉटिका जाते हैं और सीता को अंतिम बार प्रणाम करते हैं।
01:06:32वे उन्हें आश्वासन देते हैं कि श्रीराम जल्द ही उन्हें बचाने आएंगे और पूरी लनका को नश्ट कर देंगे।
01:06:40इसके बाद हनुमान विशाल समुद्र को पार कर वापस लोटते हैं।
01:06:45श्रीराम को सारी घटना सुनाने के लिए कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
01:06:52लनका को जलाकर हनुमान एक बार फिर अशोक वॉटिका जाते हैं और सीता को अंतिम बार प्रणाम करते हैं।
01:07:01वे उन्हें आश्वासन देते हैं कि श्रीराम जल्द ही उन्हें बचाने आएंगे और पूरी लनका को नश्ट कर देंगे।
01:07:09इसके बाद हनुमान विशाल समुद्र को पार कर वापस लोटते हैं।
01:07:14श्रीराम को सारी घटना सुनाने के लिए कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
01:07:21लनका को जलाकर हनुमान एक बार फिर अशोक वॉटिका जाते हैं और सीता को अंतिम बार प्रणाम करते हैं।
01:07:29वे उन्हें आश्वासन देते हैं कि श्रीराम जल्द ही उन्हें बचाने आएंगे और पूरी लनका को नश्ट कर देंगे।
01:07:38इसके बाद हनुमान विशाल समुद्र को पार कर वापस लोटते हैं।
01:07:43श्रीराम को सारी घटना सुनाने के लिए कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
01:07:50लनका को जलाकर हनुमान एक बार फिर अशोक वॉटिका जाते हैं और सीता को अंतिम बार प्रणाम करते हैं।
01:07:58वे उन्हें आश्वासन देते हैं कि श्रीराम जल्द ही उन्हें बचाने आएंगे और पूरी लनका को नश्ट कर देंगे।
01:08:07इसके बाद हनुमान विशाल समुद्र को पार कर वापस लोटते हैं।
01:08:12श्रीराम को सारी घटना सुनाने के लिए कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
01:08:19लनका को जलाकर हनुमान एक बार फिर अशोक वॉटिका जाते हैं और सीता को अंतिम बार प्रणाम करते हैं।
01:08:27वे उन्हें आश्वासन देते हैं कि श्रीराम जल्द ही उन्हें बचाने आएंगे और पूरी लनका को नश्ट कर देंगे।
01:08:36इसके बाद हनुमान विशाल समुद्र को पार कर वापस लोटते हैं।
01:08:41श्रीराम को सारी घटना सुनाने के लिए कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
01:08:48लनका को जला कर हनुमान एक बार फिर अशोक वॉटिका जाते हैं और सीता को अंतिम बार प्रणाम करते हैं।
01:08:57वे उन्हें आश्वासन देते हैं कि श्रीराम जल्द ही उन्हें बचाने आएंगे और पूरी लनका को नश्ट कर देंगे।
01:09:05इसके बाद हनुमान विशाल समुद्र को पार कर वापस लोटते हैं।
01:09:10श्रीराम को सारी घटना सुनाने के लिए कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
01:09:17हनुमान सफलता पूर्वक समुद्र पार कर वापस आते हैं और जामवान अगद तथा अन्यवानरों से मिलते हैं जो उनकी वापसी
01:09:27का बेसबरी से इंतजार कर रहे थे।
01:09:30वे सभी मिलकर उत्साह पूर्वक श्रीराम और लक्षमन के पास लोटते हैं जहां हनुमान उन्हें लन्का में सीता से अपनी
01:09:38भेप और लन्का देहन की पूरी कहानी सुनाते हैं जिससे लन्का पर आक्रमन की योजना बनती है।
01:09:46कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
01:09:50हनुमान सफलता पूर्वक समुद्र पार कर वापस आते हैं और जामवान अगद तथा अन्यवानरों से मिलते हैं जो उनकी वापसी
01:10:00का बेसबरी से इंतजार कर रहे थे।
01:10:03वे सभी मिलकर उत्साह पूर्वक श्रीराम और लक्षमन के पास लोटते हैं जहां हनुमान उन्हें लन्का में सीता से अपनी
01:10:11भेप और लन्का देहन की पूरी कहानी सुनाते हैं जिससे लन्का पर आक्रमन की योजना बनती है।
01:10:19कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है। हनुमान सफलता पूर्वक समुद्र पार कर वापस आते हैं और जामवान अगद
01:10:29तथा अन्यवानरों से मिलते हैं, जो उनकी वापसी का बेसबरी से इंतजार कर रहे थे।
01:10:35वे सभी मिलकर उत्साह पूर्वक श्रीराम और लक्ष्मन के पास लोटते हैं, जहां हनुमान उन्हें लन्का में सीता से अपनी
01:10:44भेप और लन्का देहन की पूरी कहानी सुनाते हैं, जिससे लन्का पर आक्रमन की योजना बनती है।
01:10:52कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
01:11:29हनुमान सफलता पूर्वक समुद्र पार कर वापस आते हैं और जामवान अगद तथा अन्यवानरों से मिलते हैं, जो उनकी वापसी
01:11:38का बेसबरी से इंतजार कर रहे थे।
01:11:41वे सबी मिलकर उत्साह पूर्वक श्रीराम और लक्षमन के पास लोटते हैं, जहां हनुमान उन्हें लन्का में सीता से अपनी
01:11:50भेट और लन्का देहन की पूरी कहानी सुनाते हैं, जिससे लन्का पर आक्रमन की योजना बनती है।
01:11:58कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
01:12:35हनुमान सफलता पूर्वक समुद्र पार कर वापस आते हैं और जामवान अगद तथा अन्यवानरों से मिलते हैं, जो उनकी वापसी
01:12:44का बेसबरी से इंतजार कर रहे थे।
01:12:47वे सबी मिलकर उत्साह पूर्वक श्रीराम और लक्षमन के पास लोटते हैं, जहां हनुमान उन्हें लन्का में सीता से अपनी
01:12:56भेट और लन्का देहन की पूरी कहानी सुनाते हैं, जिससे लन्का पर आक्रमन की योजना बनती है।
01:13:04कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
01:13:41हनुमान सफलता पूर्वक समुद्र पार कर वापस आते हैं और जामवान अगद तथा अन्यवानरों से मिलते हैं, जो उनकी वापसी
01:13:50का बेसबरी से इंतजार कर रहे थे।
01:13:53वे सबी मिलकर उत्साह पूर्वक श्रीराम और लक्षमन के पास लोटते हैं, जहां हनुमान उन्हें लन्का में सीता से अपनी
01:14:02भेप और लन्का देहन की पूरी कहानी सुनाते हैं, जिससे लन्का पर आक्रमन की योजना बनती है।
01:14:09कहानी का ये हिस्सा अद्भुत और रहस्यमई है।
01:14:46हनुमान सफलता पूर्वक समुद्र पार कर वापस आते हैं और जामवान अगद तथा अन्यवानरों से मिलते हैं, जो उनकी वापसी
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01:14:59वे सबी मिलकर उत्साह पूर्वक श्रीराम और लक्षमन के पास लोटते हैं, जहां हनुमान उन्हें लन्का में सीता से अपनी
01:15:08भेट और लन्का देहन की पूरी कहानी सुनाते हैं, जिससे लन्का पर आक्रमन की योजना बनती है।
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01:15:52हनुमान सफलता पूर्वक समुद्र पार कर वापस आते हैं और जामवान अगद तथा अन्यवानरों से मिलते हैं, जो उनकी वापसी
01:16:02का बेसबरी से इंतजार कर रहे थे।
01:16:05वे सबी मिलकर उत्साह पूर्वक श्रीराम और लक्षमन के पास लोटते हैं, जहां हनुमान उन्हें लन्का में सीता से अपनी
01:16:14भेप और लन्का देहन की पूरी कहानी सुनाते हैं, जिससे लन्का पर आक्रमन की योजना बनती है।
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01:16:35का बेसबरी से इंतजार कर रहे थे।
01:16:38वे सभी मिलकर उत्साह पूर्वक श्रीराम और लक्षमन के पास लोटते हैं, जहां हनुमान उन्हें लन्का में सीता से अपनी
01:16:47भेट और लन्का देहन की पूरी कहानी सुनाते हैं, जिससे लन्का पर आक्रमन की योजना बनती है।
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01:17:41का बेसबरी से इंतजार कर रहे थे।
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01:17:52भेट और लन्का देहन की पूरी कहानी सुनाते हैं, जिससे लन्का पर आक्रमन की योजना बनती है।
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01:18:49वे सभी मिलकर उत्साह पूर्वक श्रीराम और लक्षमन के पास लोटते हैं, जहां हनुमान उन्हें लन्का में सीता से अपनी
01:18:58भेट और लन्का देहन की पूरी कहानी सुनाते हैं, जिससे लन्का पर आक्रमन की योजना बनती है।
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01:19:43हनुमान सफलता पूर्वक समुद्र पार कर वापस आते हैं और जामवान अगद तथा अन्यवानरों से मिलते हैं, जो उनकी वापसी
01:19:52का बेसबरी से इंतजार कर रहे थे।
01:19:55वे सभी मिलकर उत्साह पूर्वक श्रीराम और लक्षमन के पास लोटते हैं, जहां हनुमान उन्हें लन्का में सीता से अपनी
01:20:04भेप और लन्का देहन की पूरी कहानी सुनाते हैं, जिससे लन्का पर आक्रमन की योजना बनती है।
01:20:12झाल