Skip to playerSkip to main content
Supreme Court On Hindi Controversy: 'तमिलनाडु में हिंदी नहीं पढ़ाई जा सकती, ऐसा नहीं हो सकता'— जानिए सुप्रीम कोर्ट के इस बड़े फैसले का पूरा सच! सुप्रीम कोर्ट ने जवाहर नवोदय विद्यालयों को लेकर तमिलनाडु सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए सख्त टिप्पणी की है।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने तमिलनाडु सरकार से कहा कि उसे हिंदी को लेकर अपना नजरिया बदलना होगा। अदालत ने कहा कि तमिलनाडु की धरती पर हिंदी कभी नहीं पढ़ाई जाएगी, ऐसा रवैया नहीं हो सकता। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह हर जिले में नवोदय विद्यालय स्थापित करने के लिए उपयुक्त जमीन की पहचान करे और इसके लिए तीन महीने का अतिरिक्त समय दिया है।
तमिलनाडु में 1968 से दो-भाषा नीति (तमिल और अंग्रेजी) लागू है, जबकि जवाहर नवोदय विद्यालयों में तीन-भाषा फार्मूला चलता है जिसमें हिंदी भी शामिल है। राज्य सरकार ने तर्क दिया कि किसी केंद्रीय मॉडल को थोपना उनके प्रशासनिक और भाषाई अधिकारों के खिलाफ है। हालांकि, केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि एक अतिरिक्त शैक्षणिक विकल्प मिलने से राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर कोई विपरीत असर नहीं पड़ेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसने राज्य की दो-भाषा नीति को रद्द नहीं किया है, बल्कि दोनों पक्षों को संवाद के जरिए समाधान निकालने और सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) का पालन करने की हिदायत दी है। मामले की अगली सुनवाई 14 दिसंबर को होगी। देखिए वनइंडिया हिंदी की यह विशेष रिपोर्ट।

About the Story:
The Supreme Court of India directed the Tamil Nadu government to identify suitable land in every district for setting up Jawahar Navodaya Vidyalayas, observing that the state must change its rigid stance on Hindi education. The bench emphasized cooperative federalism while granting the state three months to comply with the directive without altering Tamil Nadu's two-language policy.

#HindiRow #SupremeCourt #TamilNaduNews #NavodayaVidyalaya

~PR.514~HT.408~GR.508~VG.HM~

Category

🗞
News
Comments

Recommended