00:00इरान और अमेरिका के बीच युद्ध चल रहा हो, पश्यमेशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा हो और दुनिया की नजर
00:06इस बात पर हो कि अगला कदम किसका क्या होगा।
00:10ऐसे वक्त में इरान के विदेश मंतरी अब्बास अराक्षी का चीन पहुचना सिर्फ एक सामान कूटनीतिक दोरा नहीं है।
00:17बीजिंग में उनकी मुलाकात चीन के विदेश मंतरी वांग यी से हो चुकी है और इस मुलाकात ने एक बड़ा
00:23सवाल भी खड़ा कर दिया है।
00:47की बात करता रहा है। ऐसे में बीजिंग की ये बैठक युद्ध के मैदान से जादा कूटनीती के मैदान में
00:54एहम दिखाई देती है।
00:55राक्षी और वांगी की बाचीत में इरान और चीन के रिष्टों के साथ साथ छेत्रिये और अंतराश्टिये हालात पर भी
01:02चर्चा हुई।
01:03दुनों देशों के बीच पहले से ही राजनीतिक और रणनीतिक संबंध हैं लेकिन मौझूदा हालात ने इस रिष्टे को और
01:10जादा महत्पूर बना दिया है।
01:12मुलकात के दौरान अमेरिका और इरान के बीच जारी संगर्ष, छेत्रिये तनाव और बाचीत की संभावनों पर भी चर्चा हुई।
01:19चीन लगातार ये कहता रहा है कि इरान और अमेरिका के बीच संकट का समाधान बाचीत के जरिये होना चाहिए।
01:26बीजिंग का कहना है कि सेन कारवाई से समस्या का स्थाई समाधान नहीं निकल सकता है।
01:32यहीं से इस पूरी कहानी का दूसरा पहलू भी सामने आता है।
01:36इरान के लिए चीन कोई नया साजिदार नहीं हैं।
01:39दोनों देशों के बीच लंबे वक्त से राजनीतिक, आर्थिक और रणीतिक संबन्ध हैं।
01:44मुश्किल वक्त में चीन इरान के लिए एक महतपूर कूटनीतिक संपर्क बना हुआ है।
01:49वहीं चीन के लिए इरान पर्शिमेशिया की राजनीति, उर्जा और समुद्री रास्तों के लिहाद से महतपूर देश है।
01:57इसलिए अराक्ची का बीजिंग जाना सिर्फ इस सवाल तक सीमित नहीं है कि चीन इरान के साथ खड़ा है या
02:04फिर नहीं।
02:05असली सवाल ये है कि दोनों देश मौझूदा संकट में किस तरह की भून का चाहते हैं।
02:35क्योंकि ये दोरा ऐसे वक्त में हुआ है जब चीन और अमेरिका के बीच भी कई बड़े मुद्दों पर बातचीत
02:41चल रही है।
02:42अमेरिकी राश्पती डोनाल्ड ट्रम्प और चीनी राश्पती शी जिन्पिंग की संभावित मुलाकात भी चर्चा में हैं।
02:48ऐसे में इरान का मुद्दा चीन अमेरिका बातचीत में एक एहम विशय बन सकता है।
02:54यानि एक तरफ अराक्ची बीजिंग में चीन से बातचीत कर रहे हैं तो दूसरी तरफ वाशिंग्टन और बीजिंग के बीच
03:00भी इरान को लेकर बातचीत की जमीन तयार हो रही है।
03:04और ये सिर्फ कागज पर नहीं चल रही। ये सिर्फ पूतनीती नहीं है।
03:08युद्ध का असर अब उर्जा और समुद्री रास्तों तक पहुच चुका है।
03:12घुर्मूज की सुरक्षा को लेकर भी चिंता लगातार बनी हुई है।
03:15ये रास्ता दुनिया के लिए बेहत महटपूर उर्जा मार्ग है।
03:19अगर यहां तनाव लंबे वक्त तक बना रहता है तो इसका असर सिर्फ इरान, अमेरिका या इजराइल तक सीमित नहीं
03:26रहेगा।
03:26तेल की कीमतों से लेकर अंतराष्टिय व्यापार तक इसका असर पड़ सकता है।
03:56लाल सागर और होर्मुज की सुरक्षा। इन सभी घटनाओ का सर एक दूसरे पर पड़ रहा है।
04:01ऐसे में चीन के सामने भी एक बड़ा सवाल है कि वो इस पूरे संकट में कितनी सक्रिये भूम का
04:07निभाता है।
04:08चीन पहले ही पश्चिमेशिया में तनाव कम करने और बाचीत को आगे बढ़ाने की बात करता रहा है।
04:14इरान के साथ उसकी बाचीत में भी चीन ने राजनितिक समाधान और बाचीत के रास्ते को खुला रखने पर जोड
04:21दिया है।
04:22अब बीजिंग की नई बैठक उसी कहानी का अगला अध्या है।
04:26राक्षी के लिए ये दोरा इसलिए भी महतपूर है क्योंकि एरान को एक साथ युद्ध पूटनीतिक दबाओ और आर्थिक चुनोतियों
04:34का सामना करना पड़ रहा है।
04:35ऐसे समय में चीन के साथ समवाद बढ़ाना तेहरान के लिए एक एहम पूटनीतिक कदम हो सकता है।
04:41लेकिन इसे सीधे अमेरिका के खिलाफ किसी सैन गट जोड के तौर पर देखना अभी फिलहाल जल्दबाजी होगी।
04:48चीन और इरान के बीच ररणीतिक साज़ेदारी जरूर है लेकिन दोनों देशों के अपने-अपने हित भी हैं।
05:18शायत एक अमेरिका के लिए भी है एरान यह दिखाना चाहता है कि वह कूटणीतिक तौर पर अकेला नहीं पड़ा
05:24है चीन ये बताना चाहता है कि पश्री मेंशिया के संकट में उसकी भूमिका सिर्फ धर्शक की नहीं है
05:30और अमेरिका के सामने सवाल ये है कि अगर इरान के खिलाफ दबाव बढ़ता है तो चीन इस पूरे संकट
05:37में किस हद तक शामिल होगा?
05:38अब नजर इस बात पर रहेगी कि अराक्ची की बीजिंग यात्रा के बाद आगे क्या होता है? क्या चीन इरान
05:45और अमेरिका के बीच बादचीत की कोशिश टेज करेगा? क्या टरंप और शी जिनपिंग की बादचीत में इरान बड़ा मुद्दा
05:52बनेगा? और क्या बीजिं�
06:09अब कहानी सिर्फ मिसाइलों और हमलों तक की नहीं है असली लडाई का एक बड़ा हिस्सा बंद कमरों में भी
06:16चल दहा है और बातचीत में भी तै होने वाला है
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