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S Iran War Update के बीच Iran के Foreign Minister Abbas Araghchi का China दौरा चर्चा में है। Beijing में Araghchi की अहम बैठक के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या Iran और China अमेरिका के खिलाफ अपनी रणनीति को और मजबूत कर रहे हैं? Trump की Iran Policy के बीच China का रुख क्या है और Araghchi की इस यात्रा का Iran-China Relations पर क्या असर पड़ेगा? इस वीडियो में Abbas Araghchi, China, Iran, Trump, US Iran War, Beijing Meeting और Middle East Crisis से जुड़े बड़े घटनाक्रम को आसान भाषा में समझिए। साथ ही जानिए Iran और China के बीच बढ़ती रणनीतिक नजदीकी का वैश्विक राजनीति पर क्या असर हो सकता है।

US Iran War Update has brought Iran-China relations into focus as Iranian Foreign Minister Abbas Araghchi travels to Beijing for a major meeting. His China visit comes amid growing tensions between Iran and the United States, raising questions about Tehran’s strategy and Beijing’s role. Is Iran seeking stronger support from China against Trump’s Iran policy? What was discussed during the Beijing meeting, and could this visit change the regional balance? This video explains the latest developments involving Abbas Araghchi, Iran, China, Trump, the US-Iran conflict, Iran-China relations and the wider Middle East crisis.

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00:00इरान और अमेरिका के बीच युद्ध चल रहा हो, पश्यमेशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा हो और दुनिया की नजर
00:06इस बात पर हो कि अगला कदम किसका क्या होगा।
00:10ऐसे वक्त में इरान के विदेश मंतरी अब्बास अराक्षी का चीन पहुचना सिर्फ एक सामान कूटनीतिक दोरा नहीं है।
00:17बीजिंग में उनकी मुलाकात चीन के विदेश मंतरी वांग यी से हो चुकी है और इस मुलाकात ने एक बड़ा
00:23सवाल भी खड़ा कर दिया है।
00:47की बात करता रहा है। ऐसे में बीजिंग की ये बैठक युद्ध के मैदान से जादा कूटनीती के मैदान में
00:54एहम दिखाई देती है।
00:55राक्षी और वांगी की बाचीत में इरान और चीन के रिष्टों के साथ साथ छेत्रिये और अंतराश्टिये हालात पर भी
01:02चर्चा हुई।
01:03दुनों देशों के बीच पहले से ही राजनीतिक और रणनीतिक संबंध हैं लेकिन मौझूदा हालात ने इस रिष्टे को और
01:10जादा महत्पूर बना दिया है।
01:12मुलकात के दौरान अमेरिका और इरान के बीच जारी संगर्ष, छेत्रिये तनाव और बाचीत की संभावनों पर भी चर्चा हुई।
01:19चीन लगातार ये कहता रहा है कि इरान और अमेरिका के बीच संकट का समाधान बाचीत के जरिये होना चाहिए।
01:26बीजिंग का कहना है कि सेन कारवाई से समस्या का स्थाई समाधान नहीं निकल सकता है।
01:32यहीं से इस पूरी कहानी का दूसरा पहलू भी सामने आता है।
01:36इरान के लिए चीन कोई नया साजिदार नहीं हैं।
01:39दोनों देशों के बीच लंबे वक्त से राजनीतिक, आर्थिक और रणीतिक संबन्ध हैं।
01:44मुश्किल वक्त में चीन इरान के लिए एक महतपूर कूटनीतिक संपर्क बना हुआ है।
01:49वहीं चीन के लिए इरान पर्शिमेशिया की राजनीति, उर्जा और समुद्री रास्तों के लिहाद से महतपूर देश है।
01:57इसलिए अराक्ची का बीजिंग जाना सिर्फ इस सवाल तक सीमित नहीं है कि चीन इरान के साथ खड़ा है या
02:04फिर नहीं।
02:05असली सवाल ये है कि दोनों देश मौझूदा संकट में किस तरह की भून का चाहते हैं।
02:35क्योंकि ये दोरा ऐसे वक्त में हुआ है जब चीन और अमेरिका के बीच भी कई बड़े मुद्दों पर बातचीत
02:41चल रही है।
02:42अमेरिकी राश्पती डोनाल्ड ट्रम्प और चीनी राश्पती शी जिन्पिंग की संभावित मुलाकात भी चर्चा में हैं।
02:48ऐसे में इरान का मुद्दा चीन अमेरिका बातचीत में एक एहम विशय बन सकता है।
02:54यानि एक तरफ अराक्ची बीजिंग में चीन से बातचीत कर रहे हैं तो दूसरी तरफ वाशिंग्टन और बीजिंग के बीच
03:00भी इरान को लेकर बातचीत की जमीन तयार हो रही है।
03:04और ये सिर्फ कागज पर नहीं चल रही। ये सिर्फ पूतनीती नहीं है।
03:08युद्ध का असर अब उर्जा और समुद्री रास्तों तक पहुच चुका है।
03:12घुर्मूज की सुरक्षा को लेकर भी चिंता लगातार बनी हुई है।
03:15ये रास्ता दुनिया के लिए बेहत महटपूर उर्जा मार्ग है।
03:19अगर यहां तनाव लंबे वक्त तक बना रहता है तो इसका असर सिर्फ इरान, अमेरिका या इजराइल तक सीमित नहीं
03:26रहेगा।
03:26तेल की कीमतों से लेकर अंतराष्टिय व्यापार तक इसका असर पड़ सकता है।
03:56लाल सागर और होर्मुज की सुरक्षा। इन सभी घटनाओ का सर एक दूसरे पर पड़ रहा है।
04:01ऐसे में चीन के सामने भी एक बड़ा सवाल है कि वो इस पूरे संकट में कितनी सक्रिये भूम का
04:07निभाता है।
04:08चीन पहले ही पश्चिमेशिया में तनाव कम करने और बाचीत को आगे बढ़ाने की बात करता रहा है।
04:14इरान के साथ उसकी बाचीत में भी चीन ने राजनितिक समाधान और बाचीत के रास्ते को खुला रखने पर जोड
04:21दिया है।
04:22अब बीजिंग की नई बैठक उसी कहानी का अगला अध्या है।
04:26राक्षी के लिए ये दोरा इसलिए भी महतपूर है क्योंकि एरान को एक साथ युद्ध पूटनीतिक दबाओ और आर्थिक चुनोतियों
04:34का सामना करना पड़ रहा है।
04:35ऐसे समय में चीन के साथ समवाद बढ़ाना तेहरान के लिए एक एहम पूटनीतिक कदम हो सकता है।
04:41लेकिन इसे सीधे अमेरिका के खिलाफ किसी सैन गट जोड के तौर पर देखना अभी फिलहाल जल्दबाजी होगी।
04:48चीन और इरान के बीच ररणीतिक साज़ेदारी जरूर है लेकिन दोनों देशों के अपने-अपने हित भी हैं।
05:18शायत एक अमेरिका के लिए भी है एरान यह दिखाना चाहता है कि वह कूटणीतिक तौर पर अकेला नहीं पड़ा
05:24है चीन ये बताना चाहता है कि पश्री मेंशिया के संकट में उसकी भूमिका सिर्फ धर्शक की नहीं है
05:30और अमेरिका के सामने सवाल ये है कि अगर इरान के खिलाफ दबाव बढ़ता है तो चीन इस पूरे संकट
05:37में किस हद तक शामिल होगा?
05:38अब नजर इस बात पर रहेगी कि अराक्ची की बीजिंग यात्रा के बाद आगे क्या होता है? क्या चीन इरान
05:45और अमेरिका के बीच बादचीत की कोशिश टेज करेगा? क्या टरंप और शी जिनपिंग की बादचीत में इरान बड़ा मुद्दा
05:52बनेगा? और क्या बीजिं�
06:09अब कहानी सिर्फ मिसाइलों और हमलों तक की नहीं है असली लडाई का एक बड़ा हिस्सा बंद कमरों में भी
06:16चल दहा है और बातचीत में भी तै होने वाला है
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