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क्या Iran और America के बीच हुई Peace Deal दुनिया की राजनीति बदल देगी?Donald Trump और Iran के नेतृत्व की तरफ से आए संकेतों ने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है।सालों की दुश्मनी के बाद दोनों देशों के बीच रिश्तों में नरमी की चर्चा तेज हो गई है।क्या इससे Middle East में शांति की नई शुरुआत होगी?क्या Oil Prices में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है?Israel, Saudi Arabia और China जैसे देशों पर इसका क्या असर पड़ेगा?क्या इस समझौते से वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार को फायदा होगा?इस वीडियो में जानिए Iran-US Deal के पीछे की पूरी कहानी और इसके वैश्विक प्रभाव।वीडियो को अंत तक देखें और कमेंट में बताएं कि इस समझौते का सबसे बड़ा फायदा किसे होगा।

Could the Iran-US Peace Deal reshape global politics?
Recent announcements from Donald Trump and Iranian leadership have sparked worldwide debate.
After decades of tensions, both sides appear to be moving toward a new phase of engagement.
Will this agreement bring greater stability to the Middle East?Could global oil prices fall as tensions ease?
How will countries like Israel, Saudi Arabia, China, and Russia react to this development?What impact could this deal have on international trade and energy markets?In this video, we break down the significance of the Iran-US Peace Deal and its global consequences.
Watch till the end for a complete geopolitical analysis.

#IranUSDeal #Iran #USA #Trump #MiddleEast #WorldPolitics #Geopolitics #OilPrices #BreakingNews

~HT.410~PR.512~ED.104~GR.538~VG.HM~

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Transcript
00:00तो अमेरिका एरान समझोते के बाद दुनिया कैसे बदलेगी?
00:03नमस्कार मैं हूँ पंगजबार मिश्र, कई महिनों की जंग, मिसाइल हमलों, तेल संकट और वैश्विक तनाव के बाद अब अमेरिका
00:11और एरान के बीच एक समझोते की शुरुआत दिखाई दे रही है।
00:15लेकिन सवाल ये है कि क्या ये सिर्फ युद्ध विराम है या फिर मिडल इस्ट में एक नए वेश्व विवस्ता
00:22की शुरुआत हो रही है।
00:23और इससे भी बड़ा सवाल है इस समझोते से सबसे ज्यादा फाइदा किसे होगा?
00:29अमेरिका को, इरान को, इसराइल को या फिर पूरी दुनिया को। आएए इसे आसान भाशा में समझते हैं।
00:47सबसे पहले ये समझे कि अमेरिका और इरान के बीच जो समझोता सामने आया है उसका सबसे बड़ा उदेश युद
00:55रोखना था।
00:55अमेरिका चाहता है कि इरान परमानो हत्यार की दिशा में आगे न बढ़े।
01:00दूसरे तरफ इरान चाहता है कि उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंद धीरे धीरे हटें।
01:05उसके फ्रीज किये गए अर्बो डॉलर के फंड बापस मिलें और उसकी सुरक्षा की गारंटी दी जाए।
01:11यानि दोनों पक्ष एक दूसरे को पूरी तरह हराने नहीं बलकि एक दूसरे को नियंतरित करने की कोशिश कर रहे
01:18हैं।
01:18अब सवाल है कि अमेरिका को क्या मिलेगा।
01:21अमेरिका की सबसे बड़ी चिंता थी कि कहीं ये युद्ध पूरे मिडलीस्ट में न फैल गाए।
01:26अगर स्टेट ओफ हॉर्मूज लंबे समय तक बंद रहता है तो तेल की किमते आस्मान छू सकती थी।
01:33दुनिया के करीब 20% समुद्री तेल व्याफार का रास्ता इसी जल डमरू मध्य से होकर गुजरता है।
01:40इसलिए अमेरिका को इस समझोते से सबसे बड़ी राहत ये मिलेगी कि उर्जा आपूर्ती सामान्य होने लगेगी और तेल बाजार
01:49स्थिर होंगे जिसके संकेत नजर भी आ रहे हैं।
01:51दूसरा फायदा वाशिंग्टन ये दिखा सेकेगा कि उसने युद्ध के बजाए कूट नीती के जरिये संकट को समहा लिया।
01:59अब बात इरान की। इरान ने दुनिया को दिखा दिया कि वो केवल रक्षात्मक शक्ती नहीं है।
02:05उसने अमेरिकी हितों और क्षेत्रिय सुरक्षा धाचे को चुनोती देने की क्षमता प्रदर्शित की।
02:10लेकिन इरान की अत्विवस्ता युद्ध का बोज लंबे समय तक नहीं जहिल सकती।
02:16उसे निवेश चाहिए, व्यापार चाहिए, तेल निर्यात चाहिए और सबसे बढ़कर उसे प्रतिबंधों से राहत चाहिए।
02:24यही कारण है कि तेहरान भी बातचीत की मेज पर आया।
02:28अब सबसे दिल्चस्प सवाल, इस समझोते का सबसे बड़ा राजनितिक असर किस पर पड़ेगा।
02:35जवाब है, आपने सही पैचाना, इसराइल।
02:38कई वर्षों से इसराइल की रणनीती ये रही है कि इरान की परमानू और सेनिक शमता को सीमित रखा जाए।
02:46लेकिन यदि अमेरिका और इरान के बीच प्रत्यक्ष संबाद बढ़ता है, तो इसराइल की भूमी का पहले जैसे निरनायक नहीं
02:54रहेगी।
02:54इसका मतलब ये नहीं कि इसराइल कमजोर पड़ जाएगा।
02:58लेकिन मिडल इस्ट की राजनीती अब केवल तेल अवीव और वाशिंग्टन के इर्दगिर्द नहीं घुमेंगी।
03:05इरान फिर से एक मानेत अप्राप्त शक्ति केंदर के रूप में उभर सकता है।
03:09यही बात इसराइल की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ाई गी। और अब बात तेल की।
03:15युद्ध के दोरान दुनिया को डर था कि हुर्मूज स्ट्रेट बंध हो सकता है।
03:20तेल की ख्यमतें 100 डॉलर प्रती बैरल से उपर चली गई थी। लेकिन जैसे ही समझोहते की खबर आई तेल
03:27बाजार में गिरावट शुरू हो गई।
03:29क्यों? क्योंकि बाजार युद्ध नहीं स्थिर्ता पसंद करता है।
03:33अगर हुर्मूज पूरी तरह खुलता है और इरानी तेल दोबारा वैश्विक बाजार में आता है तो तेल की ख्यमतों पर
03:40और दवाब आ सकता है।
03:42इसका फाइदा भारत, यूरोप और एशिया जैसे बड़े आयातकों को मिलेगा।
03:47अब शेयर बाजारों की बात।
03:49बाजारों को सबसे जादा डर अनिश्चित्ता से लगता है अनसर्टेंटी युद्ध खतम होने की उमीद ने एशियाई और वैश्विक बाजारों
03:58में सकरात्मक महौल पैदा किया है जैसा कि आप भारतिय बाजारों में देख सकते हैं।
04:02निवेशकों को लग रहा है कि उर्जा संकट कम होगा, महगाई पर दवाब घटेगा और वैश्विक विकासदर को रहात मिलेगी।
04:10लेकिन यहाँ एक चेतावनी भी है। ये स्थाई शान्ती नहीं है। ये केवल एक अवसर है, it's an opportunity। अगर
04:18बाजचीत विफल होती है तो �
04:20बाजार फिर से जटके खा सकता है। अब सबसे बड़ा सवाल, क्या विश्व विवस्था बदल रही है? मेरा मानना है
04:28हाँ, बदल रही है। लेकिन धीरे थिये। इस संकट ने दिखा दिया कि मिडल इस्ट में अब केवल अमेरिका की
04:35इच्छा नहीं चलेगी। इरान, त�
04:40शेत्री शक्तियां भी समीकरण बदल रही है। दूसरी तरफ अमेरिका भी अब हर संकट का समाधान केवल सैन्य ताकत से
04:47नहीं करना चाहता और ना कर सकेगा जो स्थिति अमेरिका की हुई इरान से युद्ध में। यानि आने वाले वर्षों
04:54में दुनिया शायद एक ऐसी �
04:56जवस्ता की और बढ़े जहां शक्ती कई केंद्रों में बटी होगी। इसे ही कई भी शशग्य मल्टी पोलर वर्ल्ड और
05:05कहते हैं। अंत में ये समझोता युद्ध का अंत नहीं है। ये बात तय है। ये अगले दौर की शुरुवात
05:12है। अमेरिका को सुरक्षा चाहिए
05:17इसराइल को सुरक्षा का आश्वासन चाहिए, दुनिया को सस्ता तेल और स्थेर बाजार चाहिए और इन चारों लक्षों को एक
05:26साथ हासिल करना आसान नहीं होगा। इसलिए असली परिक्षा, अगनी परिक्षा अब शुरू हो रही है। अगले साथ दिन केवल
05:36अमेरिका
05:36और इरान के लिए नहीं बलकि पूरे मिडलीस्ट और वैश्विक अर्थविवस्ता के भविशे के लिए निरनायक सावित हो सकते। नमस्कार।
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