00:00तो अमेरिका एरान समझोते के बाद दुनिया कैसे बदलेगी?
00:03नमस्कार मैं हूँ पंगजबार मिश्र, कई महिनों की जंग, मिसाइल हमलों, तेल संकट और वैश्विक तनाव के बाद अब अमेरिका
00:11और एरान के बीच एक समझोते की शुरुआत दिखाई दे रही है।
00:15लेकिन सवाल ये है कि क्या ये सिर्फ युद्ध विराम है या फिर मिडल इस्ट में एक नए वेश्व विवस्ता
00:22की शुरुआत हो रही है।
00:23और इससे भी बड़ा सवाल है इस समझोते से सबसे ज्यादा फाइदा किसे होगा?
00:29अमेरिका को, इरान को, इसराइल को या फिर पूरी दुनिया को। आएए इसे आसान भाशा में समझते हैं।
00:47सबसे पहले ये समझे कि अमेरिका और इरान के बीच जो समझोता सामने आया है उसका सबसे बड़ा उदेश युद
00:55रोखना था।
00:55अमेरिका चाहता है कि इरान परमानो हत्यार की दिशा में आगे न बढ़े।
01:00दूसरे तरफ इरान चाहता है कि उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंद धीरे धीरे हटें।
01:05उसके फ्रीज किये गए अर्बो डॉलर के फंड बापस मिलें और उसकी सुरक्षा की गारंटी दी जाए।
01:11यानि दोनों पक्ष एक दूसरे को पूरी तरह हराने नहीं बलकि एक दूसरे को नियंतरित करने की कोशिश कर रहे
01:18हैं।
01:18अब सवाल है कि अमेरिका को क्या मिलेगा।
01:21अमेरिका की सबसे बड़ी चिंता थी कि कहीं ये युद्ध पूरे मिडलीस्ट में न फैल गाए।
01:26अगर स्टेट ओफ हॉर्मूज लंबे समय तक बंद रहता है तो तेल की किमते आस्मान छू सकती थी।
01:33दुनिया के करीब 20% समुद्री तेल व्याफार का रास्ता इसी जल डमरू मध्य से होकर गुजरता है।
01:40इसलिए अमेरिका को इस समझोते से सबसे बड़ी राहत ये मिलेगी कि उर्जा आपूर्ती सामान्य होने लगेगी और तेल बाजार
01:49स्थिर होंगे जिसके संकेत नजर भी आ रहे हैं।
01:51दूसरा फायदा वाशिंग्टन ये दिखा सेकेगा कि उसने युद्ध के बजाए कूट नीती के जरिये संकट को समहा लिया।
01:59अब बात इरान की। इरान ने दुनिया को दिखा दिया कि वो केवल रक्षात्मक शक्ती नहीं है।
02:05उसने अमेरिकी हितों और क्षेत्रिय सुरक्षा धाचे को चुनोती देने की क्षमता प्रदर्शित की।
02:10लेकिन इरान की अत्विवस्ता युद्ध का बोज लंबे समय तक नहीं जहिल सकती।
02:16उसे निवेश चाहिए, व्यापार चाहिए, तेल निर्यात चाहिए और सबसे बढ़कर उसे प्रतिबंधों से राहत चाहिए।
02:24यही कारण है कि तेहरान भी बातचीत की मेज पर आया।
02:28अब सबसे दिल्चस्प सवाल, इस समझोते का सबसे बड़ा राजनितिक असर किस पर पड़ेगा।
02:35जवाब है, आपने सही पैचाना, इसराइल।
02:38कई वर्षों से इसराइल की रणनीती ये रही है कि इरान की परमानू और सेनिक शमता को सीमित रखा जाए।
02:46लेकिन यदि अमेरिका और इरान के बीच प्रत्यक्ष संबाद बढ़ता है, तो इसराइल की भूमी का पहले जैसे निरनायक नहीं
02:54रहेगी।
02:54इसका मतलब ये नहीं कि इसराइल कमजोर पड़ जाएगा।
02:58लेकिन मिडल इस्ट की राजनीती अब केवल तेल अवीव और वाशिंग्टन के इर्दगिर्द नहीं घुमेंगी।
03:05इरान फिर से एक मानेत अप्राप्त शक्ति केंदर के रूप में उभर सकता है।
03:09यही बात इसराइल की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ाई गी। और अब बात तेल की।
03:15युद्ध के दोरान दुनिया को डर था कि हुर्मूज स्ट्रेट बंध हो सकता है।
03:20तेल की ख्यमतें 100 डॉलर प्रती बैरल से उपर चली गई थी। लेकिन जैसे ही समझोहते की खबर आई तेल
03:27बाजार में गिरावट शुरू हो गई।
03:29क्यों? क्योंकि बाजार युद्ध नहीं स्थिर्ता पसंद करता है।
03:33अगर हुर्मूज पूरी तरह खुलता है और इरानी तेल दोबारा वैश्विक बाजार में आता है तो तेल की ख्यमतों पर
03:40और दवाब आ सकता है।
03:42इसका फाइदा भारत, यूरोप और एशिया जैसे बड़े आयातकों को मिलेगा।
03:47अब शेयर बाजारों की बात।
03:49बाजारों को सबसे जादा डर अनिश्चित्ता से लगता है अनसर्टेंटी युद्ध खतम होने की उमीद ने एशियाई और वैश्विक बाजारों
03:58में सकरात्मक महौल पैदा किया है जैसा कि आप भारतिय बाजारों में देख सकते हैं।
04:02निवेशकों को लग रहा है कि उर्जा संकट कम होगा, महगाई पर दवाब घटेगा और वैश्विक विकासदर को रहात मिलेगी।
04:10लेकिन यहाँ एक चेतावनी भी है। ये स्थाई शान्ती नहीं है। ये केवल एक अवसर है, it's an opportunity। अगर
04:18बाजचीत विफल होती है तो �
04:20बाजार फिर से जटके खा सकता है। अब सबसे बड़ा सवाल, क्या विश्व विवस्था बदल रही है? मेरा मानना है
04:28हाँ, बदल रही है। लेकिन धीरे थिये। इस संकट ने दिखा दिया कि मिडल इस्ट में अब केवल अमेरिका की
04:35इच्छा नहीं चलेगी। इरान, त�
04:40शेत्री शक्तियां भी समीकरण बदल रही है। दूसरी तरफ अमेरिका भी अब हर संकट का समाधान केवल सैन्य ताकत से
04:47नहीं करना चाहता और ना कर सकेगा जो स्थिति अमेरिका की हुई इरान से युद्ध में। यानि आने वाले वर्षों
04:54में दुनिया शायद एक ऐसी �
04:56जवस्ता की और बढ़े जहां शक्ती कई केंद्रों में बटी होगी। इसे ही कई भी शशग्य मल्टी पोलर वर्ल्ड और
05:05कहते हैं। अंत में ये समझोता युद्ध का अंत नहीं है। ये बात तय है। ये अगले दौर की शुरुवात
05:12है। अमेरिका को सुरक्षा चाहिए
05:17इसराइल को सुरक्षा का आश्वासन चाहिए, दुनिया को सस्ता तेल और स्थेर बाजार चाहिए और इन चारों लक्षों को एक
05:26साथ हासिल करना आसान नहीं होगा। इसलिए असली परिक्षा, अगनी परिक्षा अब शुरू हो रही है। अगले साथ दिन केवल
05:36अमेरिका
05:36और इरान के लिए नहीं बलकि पूरे मिडलीस्ट और वैश्विक अर्थविवस्ता के भविशे के लिए निरनायक सावित हो सकते। नमस्कार।
Comments