00:00अमेरिका में रूस से तेल खरीदने वाले देशों के खिलाफ बड़ा कदम आगे बढ़ाया गया है
00:05और इसका सीधा असर भारत पर पढ़ सकता है
00:08अमेरिकी प्रतिरिधी सभा यानि की यूएस हाउस ओफ रेप्रेजेंटेटिव्स में
00:14लिंसे ओग राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड इरान एक्ट दोहजार चबबिस पर प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है
00:21इस बिल के तहट अमेरिकी राश्ट्रपती को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुक देशों पर
00:28सौफ फीसिदी तक ट्रैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है
00:32भारत और चीन जैसे बड़े रूसी उर्जा खरीदार इस प्रावधान के दाइरे में आ सकते हैं
00:38नमस्कार मेरा नाम हरिचा पराश्वर और आप देख रहे हैं वन इंडिया तिद्डिव
00:50अभी जो खबर मैं आपको बताने जा रही हूं इस खबर ने अमेरिका में ये प्रस्तावित पूरा है
01:01दरसल अमेरिका का आरोप है कि रूस से होने वाला उठ्जावयापार मॉस्को के यूक्रेन यूद के लिए आर्थिक संसाधन उपलब
01:09कराता और ये जो इल्जाम है डॉनल्ड ट्रम ये कई वर्षों से लगाते रहे हैं
01:15और भारत पर या फिर जो भी देश है उन पर ये टैरिफ वाली जो ये कहानी है ये कोई
01:19नहीं नहीं है
01:20पिछले दो वर्षों से हम ये लगातार सुन रहे हैं
01:23इसी वज़े से अमेरिका अब सिर्फ रूस पर प्रतिबंध लगाने तक सिमित नहीं रहना चाता है
01:28बलकि उन देशों पर दबाब बढ़ाने की कोशिश कर रहा है जो रूस से बड़ी मात्रा में तेल और गयास
01:34खरीदते हैं
01:35इस बिल में रूस के उर्जा चेत्र के साथ साथ प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले जो भी शैडो
01:43फ्लीट पर भी कारवाई का प्रावधान बताया जा रहा है
01:46इस पूरे मामले में सबसे एहम बात ये है कि अमेरिकी सीनेट इस बिल को पहले ही मनजूरी दे चुकी
01:53है
01:54साथ अगस्त को सीनेट में बिल च्रियासी के मुकाबले 11 वोट से पास हुआ था
02:00इसके बाद इसे हाउस ओफ रिप्रेजेंटेटी इसके पास भेजा गया है
02:04अब 15 सितंबर को अमेरिकी हाउस में इस बिल को आगे बढ़ाने के लिए प्रक्रियात्मक वोट हुआ जिसमें प्रस्ता और
02:10214 और 211 के अंदर से आगे बढ़ चुका है
02:13इसके बाद 16 सितंबर को बिल पर अंतिन मद्दान की प्रक्रिया शुरू हो रही
02:17अगर हाउस भी इससे मनजूरी दे देता है तो इससे राष्टपती के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा
02:24हला कि यहाँ एक important बात है जो आपने को कुछ आना चाहिए
02:29बिल पास हो जाने का मतलब यह नहीं होता है कि भारत पर उसे एक्षण सौ फीसिदी टैरिफ लागू हो
02:35जाएगा
02:36लेकिन कहीं न कहीं यह मकसद ही है सौ फीसिदी टैरिफ का और राष्टपती का हस्ताक्षर तो बस एक formality
02:43मात्र है
02:43क्योंकि कहीं न कहीं यह प्रस्ताव ही डॉनल्ड ट्रम्प के उकसावे के बाद आया है
02:49कानून राष्टपती को ऐसा टैरिफ लगाने का अधिकार देगा अब इस कानून के बदोल अगरेबिल पास हो जाता है
02:55अब आस्तवी कारवाई राष्टपती के फैसले और कानून में तैप्रक्रिया पर निर्भर करी
02:59भारत के लिए ये मामला इसलिए भी महतोपून है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में रूस भारत के प्रमुक कच्चे तेल
03:06आपूती करताओं में शामिल रहा है
03:08यूक्रेन युद के बाद पश्चमी देशों के प्रतिबंध हो और रूसी तेल पर कीमतों से जुड़े प्रतिबंधों के बीच भारत
03:16ने रूस से खरीद जारी रखी
03:18भारत का तर्क रहा है कि उज़ा सुरक्षा और भारतिय उभोगताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए उससे अपने
03:25लिए उपलब्द सोर से तेल खरीदने का अधिकार है
03:28मतलब अगर साफ शब्दों में बताएं तो भारत बार बार कहता है कि भारत अपनी उर्जा हितों से कभी भी
03:37समझावता नहीं करेगा
03:38यानि कि उसके लिए जो बहतर है वो वहाँ से तेल खरीदेगा उसके लिए जहाँ से मुनाफ़ा है वहाँ वो
03:43इन्वेस्ट करेगा
03:44लेकिन अमेरिका की नीती में रूस से तेल खरीद नाब सिर्फ व्यापार का मुद्दा नहीं रह गया है
03:49वशिंग्टन इसे रूस की युद्ध शम्ता और उसके राजसों से जोड़ कर देख रहा है
03:53यही वज़े है कि प्रिस्तावित कानून में रूस के बड़े उर्जा खरीदारों पर भी आर्थिक दबाब डालने का रास्ता बनाया
04:00गया है
04:00इस बीच भारत, अमेरिका, व्यापार, संबंधों के मोर्चे पर भी बाच्वे जारी है
04:05लेकिन इसमें जो सबसे important angle है, अच्छानक से ये जो छटपटाहट दिखाई दे रही है
04:11यूएस में और राश्टपदी ट्रम में, ये यू ही नहीं हो चुका है
04:14ये अभी भारत में जो ब्रीक्स हुआ है, जिसमें शी जुन पिंग, पुतिन और प्रधान मंतरी मोदी की तस्वीरे साथ
04:23में वाइरल हुई
04:23जो दोस्ती कनाया आयाम लिखा गया, एक सक्सेस्फुल ब्रीक्स हुआ, न्यू दिली समिट पर सभी देशों ने, 11 जो मुख्य
04:30देश हैं, उन्होंने हस्ताक्षर किये
04:31इसके बाद से ट्रम्प को ज्यादा मेट्री लगी हुई है, और ट्रम्प जिसके बाद ये फैसला ले रहे हैं
04:37आपको बता दे कि दोरों देशों के बीच, भारत और यूएस के बीच, ट्रेड डील को अंतिम रूप देरे के
04:42लिए भारती प्रतिनिदी मंडल के
04:43अमेरिका जाने के तैयारी की खबरे भी सामने हैं, यानि कि एक तरफ व्यापार समझते को आगे बढ़ाने की कोशिश
04:49कर रहे हैं
04:50और दूसी तरफ रूस से तेल खरीद को लेकर अमेरिकी कॉंगरिस मनाया दवा भी बन रहा है
04:54यहीं परमामला और पेंचीदा हो जाता है
04:57भारत के सामने एक साथ कई आर्तिक और रणितिक समीकरण है
05:00उर्जा की जरूरत रूस के साथ पुराना रक्षा और रणितिक संबंध
05:04अमेरिका के साथ बढ़ता व्यापारिक रिष्टा और वैश्विक बाजार में भारतिय निर्यातकों के हित
05:11वहीं अमेरिका की तरफ से टैरिफ निती लगतार बदलते वैश्विक व्यापक समीकरण का हिस्सा बने लिए
05:17इसलिए प्रस्तावित सौफिसीदी टैरिफ को संभावित अधिकार के तौर पर देखना जरूरी है
05:22हलाकि भारत पर जैसे ही ये लागो होता है भारत के लिए मुश्किले तुबढ़ सकती है
05:27अब सबके नजर अमेरिकी हाउस के अंतिम वोट और उसके बाद राश्विक पती के फैसले पर है
05:31अगर कानून आगे बढ़ता है तो भारत के लिए अगला बड़ा सवाल यही होगा कि अमेरिका इस अधिकार का इस्तेमाल
05:37करता है
05:38या फिर भारत अमेरिका वयापार वारता के जरी कोई नया रास्ता निकलता है
05:43यानि कि फिलहाल मामला सिर्फ रूस से तेल खरीदने का नहीं है
05:46ये भारत की उज़ा जरूर तो अमेरिका के साथ वियापार, रूस के साथ संबन्द और बदलती वेश्विक अर्थववस्था
05:52इन सब ही के बीच संतुलन का सवाल बन चुका है
05:56हाला कि ये ब्रिक्स के बाद जो टोनल्ड ट्रम्प ने ये पैसला लिया है, ये साह बताता है
06:01कि एक तरफ भारत के लिए अपने बाजार खोलने हैं और भारत में खास करके अमेरिका को इन्वेस्ट करना है
06:06अपने जो अपनी वस्तु है वो अमेरिका को भारत में बेचना है लेकिन दूसरी तरह जो अमेरिका का और जो
06:13ट्रम का एगो है रूस के प्रती रूस से संबंध खराब करवाने के लिए सबी देशों का उस पर वो
06:18निरंतर आगे बढ़ रहा है और इसी क्रम में एक बार फिर �
06:22और ठीक ब्रिक्स के बाद ये कोई कोइंसिदेंस तो नहीं हो सकता है आपका सोचते हैं कॉमेंट में ज़रूर बताइए
06:28और बाकी अपडेट्स के लिए देश्तुनिया के बाकी सभी बड़ी चोटी खबरों के लिए देखते रही है वाने इंडिया है
06:36प्रिक्साइब अप्रिक्साइब एक बाकी सभी खबरों के लिए लिए में एओ प्रिक्साइब तो नहीं है
Comments