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Beijing में Trump और Xi Jinping की मुलाकात के बाद दुनिया की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। Iran-US तनाव के बीच यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि क्या China ने अपने हितों के लिए America के साथ कोई बड़ी रणनीतिक डील कर ली है। कई राजनीतिक विश्लेषक सवाल उठा रहे हैं कि क्या Iran अब वैश्विक स्तर पर अकेला पड़ता जा रहा है। इस वीडियो में जानिए Trump-Xi बैठक के बड़े संकेत, China की बदलती रणनीति, Iran पर संभावित असर और दुनिया भर में हो रही राजनीतिक प्रतिक्रियाएं। देखिए पूरी रिपोर्ट, ताज़ा अपडेट और अंतरराष्ट्रीय राजनीति का गहराई से विश्लेषण।

The Trump-Xi meeting in Beijing has triggered massive global speculation as reports suggest a possible strategic understanding between the US and China amid rising Iran tensions. Political analysts are questioning whether China is distancing itself from Iran to secure larger economic and diplomatic gains with America. Did Donald Trump manage to shift global equations during his Beijing visit? What impact could this have on the Iran-US conflict and Middle East geopolitics? In this video, watch the full analysis of the Trump-Xi talks, China’s evolving strategy, Iran’s position, and the international reactions creating buzz worldwide. Stay tuned for breaking updates and detailed geopolitical insights.

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00:00निश्ची तरुप से टरंप साहब का ये जो दोरा है वो काफी भविश्य निर्धारित करने वाला है और खासकर भारती
00:06होने के नाते मैं इस दोरे को काफी आश्रंका किसाब देख रहा हूं क्योंकि जिस तरीके से प्रेजडेंट टरंप ने
00:13वहां पे बयान दिये हैं और पह
00:28करा है कि वह काफी संझीद की के साथ मौह पे बयान दे रहा है काफी जिम्मेदारी के साथ दे
00:33रहे हैं और ये बाकी दुनिया के लिए ऑच्छी फ़बर नहीं है क्योंकि अगर अगर अमरीका और चीन के बीच
00:38मैं किसी तरीके का कोई समझोता हो जाता है तो बाकी काफी द�
00:45लूपने का प्लान कर सकते हैं और हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि दोनों देशों की जो अंतर निर्भरता
00:52है वो काफी जादा है वो सोवियत संग और वो जो यूएसे वाला मामला नहीं है कि दोनों के हित
00:58बिलकुल टकराते नहीं थे इन दोनों के हित आपस में जोड़
01:01रहे हैं चीन जहां सबसे बड़ा प्रोडक्शन करने वाला उत्पादन करने वाला देश है वहीं अमेरिका सबसे बड़ा कंजूमर रहा
01:09है और वो एक दूसे की सारी जरुतों को पूरा करके बागी पूरी दुनिया को इस्टब कर सकते हैं तो
01:16भारत के लिए एक तरीके से अल
01:34सवाजर के पास चलते हैं सिधार जी जिन पिंग और टर topics दोनों ने बड़े बड़े बयान दिया है जिन
01:44फिरींच कोत ने बहुत बरोसेन साथी बताया है जिन पिंग को
02:00कहूं तो ये दोनों नेता अवल दर्जे के दोगले हैं ये किसी के सगे नहीं है ये सिर्फ अपना फायदा
02:08देख रहे हैं जब तक इनका उल्लू सीधा नहीं होता है तब तक एक दूसरे के दोस्त है और वैसे
02:13भी इंटरनेशनल पॉलिटिक्स में कहते हैं तो बेनेफिट्स �
02:25इतिहास को तो अब तक सिर्फ पांच प्रेजिडेंट ऐसे हुए हैं जो चीन गए हैं चीन के बनने के बार
02:32रिचर्ड निक्सन, रोनाल्ड रिगन, बिल क्लिंटन, बराक अबामा और डोनल्ड ट्रम का ये दूसरा दौरा है क्योंकि वो दो बार
02:41आये थी, दो बार और भी �
02:42लेकिन इनने ही ज़्यादा लगा के दो बार जाना चाहिए, यहां पर एक चीन समझने वाली है कि लग रहा
02:50था कि मिडिल इस्ट में जो टेंशन चल रही है, उसमें चीन कहीं न कहीं इरान को बैकिंग दे रहा
02:56है, सपोर्ट दे रहा है, अभी आप ये देखिए कि बात्ची
03:11जो कर रहे हैं, वो सही कर रहे थे, अब ऐसे में क्या होगा कि आप ने जिनको पहले उकसाया
03:17लड़ने के लिए, अब आप उने पीछे उनसे हट रहे हुए, यही अमेरिका ने यूकरेन के साथ किया था दो
03:23अजार बाइस में, और यूकरेन अभी तक मार खा रहा है, उसकी स
03:40देख रहे हैं इसको, इसको मैं कैसे भी नहीं देख रहा हूँ, इसको मैं ऐसे देख रहा हूँ कि बिजनस
03:45डील है, और यह अब ग्लोबर पावर बैलेंस जो है, उसको बदलने की तरफ एक कदम है, इसमें एक चीज़
03:53और जो चाइना ने एक तरीके का तमाचा जड़ा है,
03:56ट्रप के गाल पर, वो यह कि चाइना ने जब शीजिन पिक बोल रहे थी तो उन्होंने अपने भाशना साफ
04:02कह दिया, कि ताइवान पर हमें एक इसी तरह की दोराय नहीं रखनी चाहिए, और ताइवान को लेकर अगर कोई
04:11कुछ कहेगा, तो उससे हमारे मद्वेद हो सकते
04:13हैं, और आगे चंकरी मामला संग्राशना बदल सकता है, मतलब चाइना ने यह साफ कर दिया, कि अगर आप उस
04:22पर मेरे साथ नहीं है, ताइवान के मुद्दे पर, तो फिर अगर मेरी आप से लड़ाई होती है, तो मैं
04:28उसमें बहुत जादा हिचके चाऊंगा नहीं, तो य
04:43जाक बामा को अगर सोड़ दे, तो सभी प्रेसिडेंट कुछ ने कुछ वहां से को के आए है, और नहीं
04:49तो एक तरीके से जो लॉटते हैं, किसका स्कूर ज्यादा रहा, तो स्कूर कम करा के आए, सबसे पहले गए
04:55थे, रिचार्ड निक्सिन, 20 साल की दुश्मनी के बाद ग
05:12गए हो, तो फिर ताइवान को हथ्यार क्यों दे रहे हो, तो ये सारी चीज़े है, इसलिए इस ये जो
05:19अभी मुलाका थे इसमें दौनों देशों की, इसमें दुनिया को ये नहीं देखना चाहिए, कि ये किसके लिए क्या करने
05:24वाले, तेजावत से का बड़ी अच्छी बा
05:41तेजावत साब के पास चलते हैं, तेजावत साब अभी मैं इतिहास में थोड़ा जहाग कर देख रहा था, तो 54
05:47साल के बाद अमेरिका का कोई राश्टपती अपने देश्ट के रक्षा मंतरी को लेकर चीन पहुचा हुआ है, आप इसे
05:53किस तरह से देख रहे हैं, ये तो प
06:09बड़ा दोरा इतने बड़े प्रतनिदी मंडल के साथ ले जाने के पीछे कि आपको क्या वजह नजरा दी हैं?
06:41तो वो पूरे डेलिगेशन में कुछ ऐसे लोगों को नहीं रखना चाते थे जिससे कि जो चीनी लोग हैं, वारता
06:48कार है, वो थोड़े से सहज हो जाएं. ये ही भारत के साथ भी है, वारत के कुछ लोगों को
06:53भी चीन पसंद नहीं करता है, तो वो अक्सर वहां दोरे पे ज
07:09से लेकर जो बोईंग के CEO है या अमाम जो बड़े बड़े लोग हैं, वो कम से कम पंदरा बड़ी
07:14कंपनियों के जिसमें हत्यारों की कंपनिया वगरा ये भी सबस्रा मिला है, तो इसलिए रक्षा मंद्री का जाना वहां है,
07:21क्योंकि चीन ये चीन को अमेरिका ये कह रहा है क
07:24आप बाकी चीजों पर ध्यान दीजिए, रक्षा उत्पादन पर हम ध्यान दे रहे हैं, और चीन की जो भी ज़रुत
07:30हैं, फाइटर जेट से लेकर जो भी हैं, अमेरिका उनको देगा, अमेरिका उनको सप्लाई करेगा, जहां भारत के लिए वो
07:37कंजूसी करता है, टेक्निल
07:54वहीं चीन के लिए अमेरिका ने एक तरीके से पूरे दर्वाजे कोल रखे हैं, और चीन ने ये कहा है
08:00कि बदले में आप निशिन दे रहे हैं, रियर अर्थ मेनल को लेकर कभी अमेरिका को कोई परिशानी नहीं होगी,
08:06इसमें चीन को भी फाइदा है, क्योंकि वह पूरी ज
08:22नरम के जो स्वर्ग हैं, वो धीरे धीरे नरम पढ़ते जा रहा है, पर चीन ने क्योंकि शीकर वारताओं की
08:28जो तयारी होती है, वो पांच-छे महीने पहले से ही शुरू हो जाती है, और हम देख रहे हैं
08:34कि चीन ने शायद कुछ बाउंडरी लाइन फिक्स कर देते हैं, कि
08:49वैसे ही उन्होंने कुछ और बाउंडरी लाइन स्टै किये, कि देखिए अमरीका को यह हक नहीं है, कि हमें मांगदिकार
08:57के बारे में पढ़ाएं और सिखाएं, हमें क्या करना है, क्या नहीं करना है, हमसे बैतर कोई नहीं जानता है,
09:02चीन के हित किसमें हैं, वो चीन ही बता
09:17है, पर जैसे दूसरे मसले हैं, वैसे ही यह मसले जब कि आप देखेंगे कि मीडिया में शोर इस बात
09:23का वरा था, कि होमो स्टेट को लेकर क्या बात होगी नहीं होगी, मुझे लगता है कि दोनों के लिए
09:28ही, यह मैटपून नहीं है, जैसा कि सिदार चीन भी बोला, कि यह �
09:33दोनों ही हैं, एक दूसरे को उपसा के उपस उसका केवल फाइदा लेना जानते हैं, और जो स्वार्थ के वशिभूत
09:40जो विदेश निती या कोट निती का जो संचालन होता है, मुझे लगता है कि चीन और अमरिका भी दोनों
09:46उसी का परिछे दे रहे हैं.
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