00:00निश्ची तरुप से टरंप साहब का ये जो दोरा है वो काफी भविश्य निर्धारित करने वाला है और खासकर भारती
00:06होने के नाते मैं इस दोरे को काफी आश्रंका किसाब देख रहा हूं क्योंकि जिस तरीके से प्रेजडेंट टरंप ने
00:13वहां पे बयान दिये हैं और पह
00:28करा है कि वह काफी संझीद की के साथ मौह पे बयान दे रहा है काफी जिम्मेदारी के साथ दे
00:33रहे हैं और ये बाकी दुनिया के लिए ऑच्छी फ़बर नहीं है क्योंकि अगर अगर अमरीका और चीन के बीच
00:38मैं किसी तरीके का कोई समझोता हो जाता है तो बाकी काफी द�
00:45लूपने का प्लान कर सकते हैं और हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि दोनों देशों की जो अंतर निर्भरता
00:52है वो काफी जादा है वो सोवियत संग और वो जो यूएसे वाला मामला नहीं है कि दोनों के हित
00:58बिलकुल टकराते नहीं थे इन दोनों के हित आपस में जोड़
01:01रहे हैं चीन जहां सबसे बड़ा प्रोडक्शन करने वाला उत्पादन करने वाला देश है वहीं अमेरिका सबसे बड़ा कंजूमर रहा
01:09है और वो एक दूसे की सारी जरुतों को पूरा करके बागी पूरी दुनिया को इस्टब कर सकते हैं तो
01:16भारत के लिए एक तरीके से अल
01:34सवाजर के पास चलते हैं सिधार जी जिन पिंग और टर topics दोनों ने बड़े बड़े बयान दिया है जिन
01:44फिरींच कोत ने बहुत बरोसेन साथी बताया है जिन पिंग को
02:00कहूं तो ये दोनों नेता अवल दर्जे के दोगले हैं ये किसी के सगे नहीं है ये सिर्फ अपना फायदा
02:08देख रहे हैं जब तक इनका उल्लू सीधा नहीं होता है तब तक एक दूसरे के दोस्त है और वैसे
02:13भी इंटरनेशनल पॉलिटिक्स में कहते हैं तो बेनेफिट्स �
02:25इतिहास को तो अब तक सिर्फ पांच प्रेजिडेंट ऐसे हुए हैं जो चीन गए हैं चीन के बनने के बार
02:32रिचर्ड निक्सन, रोनाल्ड रिगन, बिल क्लिंटन, बराक अबामा और डोनल्ड ट्रम का ये दूसरा दौरा है क्योंकि वो दो बार
02:41आये थी, दो बार और भी �
02:42लेकिन इनने ही ज़्यादा लगा के दो बार जाना चाहिए, यहां पर एक चीन समझने वाली है कि लग रहा
02:50था कि मिडिल इस्ट में जो टेंशन चल रही है, उसमें चीन कहीं न कहीं इरान को बैकिंग दे रहा
02:56है, सपोर्ट दे रहा है, अभी आप ये देखिए कि बात्ची
03:11जो कर रहे हैं, वो सही कर रहे थे, अब ऐसे में क्या होगा कि आप ने जिनको पहले उकसाया
03:17लड़ने के लिए, अब आप उने पीछे उनसे हट रहे हुए, यही अमेरिका ने यूकरेन के साथ किया था दो
03:23अजार बाइस में, और यूकरेन अभी तक मार खा रहा है, उसकी स
03:40देख रहे हैं इसको, इसको मैं कैसे भी नहीं देख रहा हूँ, इसको मैं ऐसे देख रहा हूँ कि बिजनस
03:45डील है, और यह अब ग्लोबर पावर बैलेंस जो है, उसको बदलने की तरफ एक कदम है, इसमें एक चीज़
03:53और जो चाइना ने एक तरीके का तमाचा जड़ा है,
03:56ट्रप के गाल पर, वो यह कि चाइना ने जब शीजिन पिक बोल रहे थी तो उन्होंने अपने भाशना साफ
04:02कह दिया, कि ताइवान पर हमें एक इसी तरह की दोराय नहीं रखनी चाहिए, और ताइवान को लेकर अगर कोई
04:11कुछ कहेगा, तो उससे हमारे मद्वेद हो सकते
04:13हैं, और आगे चंकरी मामला संग्राशना बदल सकता है, मतलब चाइना ने यह साफ कर दिया, कि अगर आप उस
04:22पर मेरे साथ नहीं है, ताइवान के मुद्दे पर, तो फिर अगर मेरी आप से लड़ाई होती है, तो मैं
04:28उसमें बहुत जादा हिचके चाऊंगा नहीं, तो य
04:43जाक बामा को अगर सोड़ दे, तो सभी प्रेसिडेंट कुछ ने कुछ वहां से को के आए है, और नहीं
04:49तो एक तरीके से जो लॉटते हैं, किसका स्कूर ज्यादा रहा, तो स्कूर कम करा के आए, सबसे पहले गए
04:55थे, रिचार्ड निक्सिन, 20 साल की दुश्मनी के बाद ग
05:12गए हो, तो फिर ताइवान को हथ्यार क्यों दे रहे हो, तो ये सारी चीज़े है, इसलिए इस ये जो
05:19अभी मुलाका थे इसमें दौनों देशों की, इसमें दुनिया को ये नहीं देखना चाहिए, कि ये किसके लिए क्या करने
05:24वाले, तेजावत से का बड़ी अच्छी बा
05:41तेजावत साब के पास चलते हैं, तेजावत साब अभी मैं इतिहास में थोड़ा जहाग कर देख रहा था, तो 54
05:47साल के बाद अमेरिका का कोई राश्टपती अपने देश्ट के रक्षा मंतरी को लेकर चीन पहुचा हुआ है, आप इसे
05:53किस तरह से देख रहे हैं, ये तो प
06:09बड़ा दोरा इतने बड़े प्रतनिदी मंडल के साथ ले जाने के पीछे कि आपको क्या वजह नजरा दी हैं?
06:41तो वो पूरे डेलिगेशन में कुछ ऐसे लोगों को नहीं रखना चाते थे जिससे कि जो चीनी लोग हैं, वारता
06:48कार है, वो थोड़े से सहज हो जाएं. ये ही भारत के साथ भी है, वारत के कुछ लोगों को
06:53भी चीन पसंद नहीं करता है, तो वो अक्सर वहां दोरे पे ज
07:09से लेकर जो बोईंग के CEO है या अमाम जो बड़े बड़े लोग हैं, वो कम से कम पंदरा बड़ी
07:14कंपनियों के जिसमें हत्यारों की कंपनिया वगरा ये भी सबस्रा मिला है, तो इसलिए रक्षा मंद्री का जाना वहां है,
07:21क्योंकि चीन ये चीन को अमेरिका ये कह रहा है क
07:24आप बाकी चीजों पर ध्यान दीजिए, रक्षा उत्पादन पर हम ध्यान दे रहे हैं, और चीन की जो भी ज़रुत
07:30हैं, फाइटर जेट से लेकर जो भी हैं, अमेरिका उनको देगा, अमेरिका उनको सप्लाई करेगा, जहां भारत के लिए वो
07:37कंजूसी करता है, टेक्निल
07:54वहीं चीन के लिए अमेरिका ने एक तरीके से पूरे दर्वाजे कोल रखे हैं, और चीन ने ये कहा है
08:00कि बदले में आप निशिन दे रहे हैं, रियर अर्थ मेनल को लेकर कभी अमेरिका को कोई परिशानी नहीं होगी,
08:06इसमें चीन को भी फाइदा है, क्योंकि वह पूरी ज
08:22नरम के जो स्वर्ग हैं, वो धीरे धीरे नरम पढ़ते जा रहा है, पर चीन ने क्योंकि शीकर वारताओं की
08:28जो तयारी होती है, वो पांच-छे महीने पहले से ही शुरू हो जाती है, और हम देख रहे हैं
08:34कि चीन ने शायद कुछ बाउंडरी लाइन फिक्स कर देते हैं, कि
08:49वैसे ही उन्होंने कुछ और बाउंडरी लाइन स्टै किये, कि देखिए अमरीका को यह हक नहीं है, कि हमें मांगदिकार
08:57के बारे में पढ़ाएं और सिखाएं, हमें क्या करना है, क्या नहीं करना है, हमसे बैतर कोई नहीं जानता है,
09:02चीन के हित किसमें हैं, वो चीन ही बता
09:17है, पर जैसे दूसरे मसले हैं, वैसे ही यह मसले जब कि आप देखेंगे कि मीडिया में शोर इस बात
09:23का वरा था, कि होमो स्टेट को लेकर क्या बात होगी नहीं होगी, मुझे लगता है कि दोनों के लिए
09:28ही, यह मैटपून नहीं है, जैसा कि सिदार चीन भी बोला, कि यह �
09:33दोनों ही हैं, एक दूसरे को उपसा के उपस उसका केवल फाइदा लेना जानते हैं, और जो स्वार्थ के वशिभूत
09:40जो विदेश निती या कोट निती का जो संचालन होता है, मुझे लगता है कि चीन और अमरिका भी दोनों
09:46उसी का परिछे दे रहे हैं.
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