00:0014 सितंबर को दो बड़े पर्व, हर्तालिका तीज, गणेश चतुर्थी, साथ-साथ
00:07वरत और पूजा के नियम जान लीजिए
00:0914 सितंबर 2026 का दिन धार्मिक लिहाद से बेहद खास होने वाना है
00:14क्योंकि इस बार हर्तालिका तीज और गणेश चतुर्थी, दोनों पर्व एक ही दिन मनाये जाएंगे
00:20ऐसे में वरत अखने वालों के सामने सबसे बड़ा सवाल ये है कि दोनों पर्व की पूजा कैसे होगी
00:26किसकी पूजा पहले करनी है और वरत का पारण कब किया जाएगा
00:30पंचांग की गणुना के मुताबिक 14 सितंबर की शुरुआत तिथी से होगी
00:35और सुभ करीब 7 बजकर 6 मिनट पर चतुर्थी तिथी शुरू हो जाएगी
00:39इसी वजह से हर्तालिका तीज और गणीश चतुर्थी दोनों का पर्व 14 सितंबर को ही मनाय जाएगा
00:45सबसे पहले बात हर्तालिका तीज की
00:48भादरपद शुक्ल पक्ष की तृतिया तिथी 13 सितंबर की सुभह 7 बजकर 8 मिनट पर शुरू हुई
00:54और 14 सितंबर की सुभह 7 बजकर 6 मिनट तक रहेगी
00:57उदया तिथी के नियम के चलते हर्तालिका तीज का वरत 14 सितंबर को रखा जाएगा
01:02इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती है
01:06माननेता के मुताबिक सुहागिन महिलाएं
01:09सुखी वैवाहिक जीवन और पती की लंबी उम्र की कामना से ये वरत रखती है
01:13जबकि अविवाहित कन्याएं मन चाहे वर की कामना से वरत रख सकती है
01:17अब सबसे जरूरी है पूजा का समय
01:20हरताली का तीज की पूजा के लिए सुभह 6 बचकर 5 मिनट से 7 बचकर 6 मिनट तक का समय
01:26बताया गया है
01:27हलाकि अलग-अलग शहरों में पंचांग के हिसाब से समय में थोड़ा बदलाव हो सकता है
01:32इसलिए स्थानिये पंचांग को जरूर देखना चाहिए
01:35इसके बाद दोपहर में गणेश चतुर्थी की पूजा होगी
01:38गणेश चतुर्थी की चतुर्थी तिथी 14 सितंबर की सुभह करीब 7 बचकर 6 मिनट से शुरू होगी
01:44और अगले दिन सुभह तक रहेगी
01:46चुँकि 14 सितंबर को मध्यान काल में चतुर्थी तिथी मौजूद रहेगी
01:50इसलिए गणेश चतुर्थी इसी दिन मनाई जाएगी
01:53दिल्ली के हिसाब से गणपती स्थापना और पूजा का शुब समय
01:56सुभह 11 बजकर 2 मिनट से दुपहर 1 बजकर 31 मिनट तक बताया गया है
02:01दूसरे शहरों में मुहूर्थ थोड़ा अलग हो सकता है
02:04अब सवाल अगर कोई दोनों वरत रखना चाहता है तो क्रम क्या होगा
02:09इसके लिए सुभह हरतालिका तीज की पूजा की जा सकती है
02:12इसके बाद मध्यान काल में गणपती की स्थापना और पूजा की जाएगी
02:16हाला कि पूजा की परंपरा परिवार और क्षेत्र के हिसाब से अलग हो सकती है
02:20इसलिए स्थानिय पंडित या परिवार की परंपरा के अनुसार क्रम तै करना बहतर रहेगा
02:26और हरतालिका तीज के पारण की बात करें तो कई जगा ये वरत निर्जला रखा जाता है
02:31और इसका पारण अगले दिन किया जाता है
02:33इसलिए सिर्फ गणीश पूजा पूरी होने के बाद ही तीज का वरत खोलना ज़रूरी नहीं है
02:38यानि 14 सितंबर को एक ही दिन शिव पारवती की आराधना भी होगी और गणपती की स्थापना भी
02:44लेकिन दोनों वरत रखना हर किसी के लिए ज़रूरी नहीं है
02:48वरत का फैसला अपनी श्रधा, स्वास्थ और पारिवारिक परंप्रा के मुताबिक किया जा सकता है
02:53फिलहाल के लिए बस इतना ही बाकी अपडेट के लिए बने रहिए One India Hindi के साथ
Comments