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प्रधानमंत्र नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स के मंच से एक बार फिर सीमा पार आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान को बेनकाब कर दिया है। वैश्विक मंच पर भारत के कड़े रुख और तमाम देशों के समर्थन को देखकर इस्लामाबाद और शहबाज शरीफ की सरकार में हड़कंप मच गया है।पीएम मोदी ने दो टूक शब्दों में कहा कि जो देश आतंकवाद का समर्थन करते हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाना चाहिए और उन पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।इस सम्मेलन में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ दोहरे मानदंडों की कड़ी आलोचना करते हुए वैश्विक ताकतों को कड़ा संदेश दिया है। रूस और अन्य बड़े देशों का समर्थन मिलने से भारत की आतंकवाद विरोधी कूटनीति को एक ऐतिहासिक जीत हासिल हुई है।पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवाद को छुपाने की कोशिश करता रहा है, लेकिन वैश्विक नेताओं के सामने उसकी पोल पूरी तरह खुल चुकी है।ब्रिक्स घोषणापत्र में आतंकवाद के खिलाफ कड़े प्रावधानों को शामिल किए जाने से पाकिस्तानी हुक्मरानों की नींद उड़ गई है।यह घटना साबित करती है कि भारत अब आतंकवाद के मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगा और दुनिया को साथ लेकर मुंहतोड़ जवाब देगा।

Prime Minister Narendra Modi delivered a scathing attack on Pakistan from the prestigious BRICS platform over cross-border terrorism The unified global condemnation of terror and India's assertive stance have sent shockwaves through Islamabad and Shahbaz Sharif's administration.PM Modi explicitly underscored that nations shielding or supporting terrorist networks must be held directly accountable for their actions.By calling out international double standards on security, India successfully rallied major global economies against the menace of terror. Strong diplomatic backing from key member states marked a massive counter-terrorism triumph for New Delhi. Pakistan's persistent attempts to hide its role as a terror exporter faced complete exposure in front of world leaders.The inclusion of strict anti-terror provisions in the BRICS joint declarations has left the Pakistani establishment entirely rattled.This high-level diplomatic showdown demonstrates India's unyielding resolve to isolate terror sponsors on every international forum.

#PMModi #BRICSSummit #PakistanTerrorism #GlobalTerrorism #Geopolitics #IndiaForeignPolicy #ShahbazSharif #InternationalNews

~HT.410~PR.512~ED.110~GR.538~VG.HM~

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00:00और इसमें इंडिया की रिक्वार्मेंट भी पूरी होती है, पैलग्राम और टेरोजम को आप कंडेंब कर रहे है, बेशक पाकिस्तान
00:07का नाम नहीं है, बट इस वेरी ओबियस के ये पाकिस्तान की तरफ उंगली आ रहा है, और लास्टेटमेंट मैं
00:14कुछ पाकिस्तान जनलिस
00:16से आज मेरा इंटिव्यू था, तो मैं उससे बात कर रहा था, वो बता रहे थे के ब्रिक्स को पाकिस्तान
00:22प्रेस कवर ही नहीं कर रही है, लिमिटेड कवर कर लिए, तो आप समझ सकते हैं के पाकिस्तान में कितना
00:31तहलका सा मचा हुआ है, के एक रॉशन प्रेजिडेंट, �
00:35एक चाइनिज प्रेजिडेंट और इस तरीके के 21 हेड अफ स्टेट्स आई वह माँ पे इस तरीके हो रही है,
00:42और भारत को ऐसी एमियत मिल रही है, तो वो एक शौक में चला गया हुँका बिडिया, जी इस बात
00:49में कोई दोर आए नहीं है, पाकिस्तान को जटका लगा है, �
00:51बहुत अच्छी बात आपने बता ही है, लेकिन सर, एकोनोमिक सेक्योरिटी और ग्लोबल एनरजी सेक्योरिटी ये दो ही मुद्धे हैं
00:58जिस पर आज कल के सारी दुनिया चल रही है, और ब्रिक्स का जो एकोनोमिक सेक्योरिटी का फंडा है, नाशनल
01:04डेवलप्मेंट बैंक
01:06जो इनका नया बैंक है, जो वर्ल्ड बैंक से हटके काम करने वाला है, अब सर मैं आपसे ये समझना
01:16चाहूंगा, is it economically possible कि हम ये चला पाए, ये जो न्यू डेवलप्मेंट बैंक है, एन डी भी जिसकी
01:25बात हो रही है, जो ब्रिक्स का नया बैंक है,
01:29Sir, do you think this is a sustainable idea, because China का अगर support है, Russia का support है, अगर
01:37India का भी support है, तो बैंक के पास पैसे रहेगा, बट इसको चलाते चलाते कहीं Indian economy पर burden
01:44तो नहीं आ जाएगा, इसको अगर आप थोड़ा समझा सके, Sir.
01:48बहुत अच्छा सवाल है, आपका देखे, कोई भी संगटन को अगर एक दूसरे संगटन को चनौती देनी है, तो उसको
01:57अपने आपको मजबूत करना पड़ेगा, और National Development Bank एक आपका ऐसा आपका जरीया है, कि आप अगर global South
02:04की countries को help करना चाहते हैं, और इसमें एक बहुत इम
02:18डॉलर्स में नहीं देगे, तो अगर आप उन चाहिए तो आपको अपने अपनी करनसी में पैसा मिलेगा, तो ये इसको
02:27एक इंपॉर्टन इसका पहलू ये है, और National Development Bank को शंगाई में है ये, जो इसका जो इसकी लोकेशन
02:39है,
02:41और इसको बहुत इंपॉर्टन है कि इसको मजबूत करने की जुरूत है, बिकॉस आज की डेट में ये डेलबरेशन हुई
02:50हैं इसके उपर, ब्रिक्स में आप जानते हैं कि 350 मीटिंग्स एक साल में हुई हैं, भारत में 50 से
02:56उपर शेरों में, तो National Development Bank के उपर भी मीटिंग्स
03:02हुई हैं, और एक blueprint बन चुका है और इसको मजबूत करने के लिए और इसको कैसे इसको मजबूत किया
03:10जाए, और इसको मुझे लगता नहीं है कि इतना ज्यादा impact भारत की economy पर पढ़ेगा, and after all, China
03:16is going to play a major role, जी चाइना के बाद पैसे की कोई कमी नहीं और चाइना इसको श�
03:32इसको मुझे लगता है कि अगर आपका वर्ल्ड बैंक चलता है तो वो USA की वज़े से चलता है, और
03:37maximum funding उसको USA से आती है, इसको मुझे लगता है कि अगर आप एक model इसका देखे, National Development
03:45Bank का तो इसमें चाइना का major role होने वाला है, चाइना का bigger role होने वाला है, और आपने
03:51बहुत सह
03:51तरीके से West के साथ एक parallel draw करते हुए मैं समझाया कि जिसे साब से World Bank और America
03:57एक साथ चलते हैं, वैसे ये New Development Bank में एक बहुत important stump China का होगा, बट Russia और
04:04India का भी I feel एक considerable say रहेगा, बट अगला सवाल, अगला बड़ा मुद्दा सर, Energy Supply, Energy Security
04:11की मैंने बात की थी, Green Energy की तरफ ये दुनिया
04:15जा रही है, critical minerals की बात हो रही है, and Brics देशों के पास अच्छा खासा amount of critical
04:22minerals है, if not India, China के पास है, you have Brazil, South Africa, काफी सारे ऐसे देश हैं, तो
04:29सर, critical minerals की इस लड़ाई में, जहां West के पास भी जिस चीज की किल्लत है, वो अगर Brics
04:35के देशों के पास हो, तो ये क्या दुनिया के नए सम
04:39कमी करण बना सकते हैं, और Brics और ये सारे देश, Putin, Jinping, कैसे ensure करेंगे कि जो dependency है,
04:49West से, even Middle East से, for their energy supplies, उसको कम किया जा सके है, देखिए, आप कोई समझना
04:57पढ़ेगा कि आपकी dependency तभी आपकी कम होगी, जब आप एक alternative, आपका energy arrangements आपके पास होंगे, जैसे कि
05:06hydro, आपका hydrogen, आपक
05:08hydro carbon और इस तरीके के, because अभी आपके fossil fuels की तरफ आपका जो रहें, जैसे को आपको कम
05:21करना पड़ेगा, तो मुझे ये लगता है कि जब तक आप alternative energies के बारे में नहीं सोचेंगे, green energies
05:28के बारे में नहीं सोचेंगे, ये dependence आप नहीं कम कर पाएंगे, और second एक plus point है, Brics का,
05:37UAE आपके साथ है, Saudi Arabia आपके साथ है, Iran आपके साथ, ये तीन major energy के आपके hubs हैं,
05:49और इसी लिए Brics में resilience of supply chain की बात हो रहे हैं, अब इसको मुझे लगता है कि
05:58एक ऐसा model हमको निकालना पड़ेगा, जहां पे pipelines बनेगी, जो
06:05इसको Brics countries को connect करेगी, because you see, ultimately, ये supply chain को आपको एक नया
06:15shape देना पड़े, कोई भी conflict हो जाए, ये जो pipelines की security, एक collective security मानी
06:27जाएगी Brics countries की, और Brics countries इनको guard करेंगी कि इसके उपर कोई attack नहीं होगा, और ये pipelines
06:36का जो
06:38जो भी oil और आपके fuels आपके आपके इसको आएंगे, वो एक दूसरे countries के supply होगे, तो आपकी economy
06:49impact नहीं होगे, because आज अगर कुछ
06:52West Asia में हो जाता है, तो पूरी economy impact हो जाती है, खासते आप भी Brics countries की, तो
06:58एक transaction, ease of transaction
07:01आपको करना पड़ेगा, आपको एक favorable mechanism आपको बनाना पड़ेगा, Brics countries के लिए खाली, ये 21 countries जब आपस
07:13में
07:13transact करेंगी, तो वो एक digital currency के थूँ करेंगी, dollar के थूँ नहीं करेंगी, और अपनी local currency, जैसे
07:25कि अगर हमने
07:25रश्या से oil लेना है, तो rupee ruble में trade होगा, similarly अगर चाइना से लेना है, तो इस rupee
07:33और yuan, यूआन, जी, तो अगर हम इस
07:37तरीके का, एक bricks का mechanism, बने के, देखें, एक currency तो नहीं बन सकती, वो, I don't think India
07:44भी उसको मनेगा, और फिर उसको
07:45United States, उसको एक, एक anti-western का, एक, प्रतीत माग लेगा, जी, हाँ, तो, एक smart तरीका ये होगा,
07:56कि आप एक digital interface
07:58बनाई है, और UPIs हरे country के पास अपने-पने UPIs है, आज की लिए, ऐसे कि इंडिया, हम इसको
08:09UPI होते हैं, बाकि इसको कंट्री के अलग नाम है, पर वो भी digital transactions उनके होते हैं, उनके countries,
08:15तो, इनको connect करने की जुरूरत है, ये जो digital public interface की बात हो रही है, तो ये digital
08:25public interface को इनको
08:26connect actually करने की जुरूरत है, और आपस में, जैसे कि अगर मैं इसको रश्या विजिट करना चाहता हूँ, या
08:34मैं कोई भी ब्रिक्स country में जाता हूँ, तो मुझे वहां की local currency को आपने साथ ले जाने की
08:41जुरूरत नहीं है, बिकार हम चाहते हैं कि हम फोरेक्स से, हम currency लेते हैं कि
08:57एक mechanism ऐसा होना चाहिए, तब ही आप बिक्स को strong कर पाएंगे, देखे, बोलने से बिक्स ट्रॉंग नहीं होता
09:04है, आपको इनको trade जो आपका एक दूसरे के साथ trade है, इसका mechanism, आपको अपने अपनी currencies में करना
09:12पड़ेगा, और जिस दिन आप या हासल करें, आप देखें कि आ�
09:17और आप अपने देश की currency को भी मजबूत करें.
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