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नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) और वैश्विक संस्थाओं में तत्काल बदलाव की पुरजोर मांग उठाई है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग जैसे दिग्गजों की मौजूदगी में पीएम मोदी ने पश्चिमी देशों और पुरानी महाशक्तियों को साफ संदेश दिया कि 21वीं सदी की चुनौतियों से निपटने के लिए 20वीं सदी के पुराने ढांचे अब पूरी तरह अप्रभावी हो चुके हैं। इस ऐतिहासिक मंच से पुतिन और जिनपिंग ने भी ग्लोबल साउथ की अनदेखी और पश्चिमी प्रभुत्व वाले रवैये पर तीखी प्रतिक्रिया दी, जिससे संयुक्त राष्ट्र में बड़े सुधारों की मांग ने और जोर पकड़ लिया है। ब्रिक्स के इस शक्तिशाली मंच से उठी संयुक्त राष्ट्र के खिलाफ इस ललकार ने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। इस वीडियो में हम विस्तार से विश्लेषण करेंगे कि कैसे भारत, रूस और चीन ने मिलकर वैश्विक शासन प्रणाली को बदलने का यह ऐतिहासिक शंखनाद किया है। संपूर्ण भू-राजनीतिक समीकरणों और इस महाबैठक के अंदरूनी ब्यौरे को जानने के लिए वीडियो को अंत तक जरूर देखें।

At the 18th BRICS Summit hosted at Bharat Mandapam in New Delhi, Prime Minister Narendra Modi delivered a fierce and definitive challenge to the United Nations Security Council, demanding urgent structural reforms. Standing alongside global powerhouses like Russian President Vladimir Putin and Chinese President Xi Jinping, PM Modi asserted that decades-old international institutions are entirely unequipped to manage 21.st-century global realities. Echoing these sentiments, leaders like Putin and Jinping also critiqued the outdated framework of the UN, fueling a collective pushback against Western-dominated governance. This monumental convergence from the expanded BRICS bloc has sent shockwaves through international diplomacy, marking a united call to empower the Global South. In this comprehensive video, we break down how this unprecedented challenge at the New Delhi summit aims to rewrite the rules of global power. Watch the complete analysis to understand the profound geo-strategic fallout of this historic event.

#PMModi #BRICSSummit #UNSC #VladimirPutin #XiJinping #GlobalSouth #Geopolitics #WorldNews

~HT.410~PR.512~ED.276~GR.538~VG.HM~

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Transcript
00:00कभी आपने सोचा है कि एक ऐसी दुनिया जहां टेकनोलोजी ऐसी तेजी से बदल रही है कि हर हफते नए
00:05स्टैंडर्ड बन रहे हैं, वहां की सबसे बड़ी ग्लोबल पंचायत यानि युनाइटेड निशन्स आज भी 1945 के पुराने धर्रे पर
00:14क्यूं चल रहा है।
00:15दर्शकों, यही सवाल ब्रिक्स के मंच से उठाया है प्रदान मंतरी नरेंदर मोदी जी ने और उनके सामने बैटे थे
00:23दुनिया के बड़े बड़े लीडर्स, चाइना के जिन पिंग, फूतिन भी वहीं बैटे हुए थे और रशिया, चाइना, सौथाफरिका, युएई
00:33जै
00:33से कई देशों के सामने से ये आवाज अब वेश्ट गई है, सोचों, 80 साल पहले बनी एक ऐसा सिस्टम
00:41जिसमें आज की दुनिया की आदी से जादा आबादी, यानि ग्लोबल साउथ के पास अपने फैसले लेने का कोई हग
00:49ही नहीं है, युनाइटेड नेशन्स को बदलना �
00:52पड़ेगा और ये गूंज उठी है दिल्ली से, जब यही सवाल दुनिया के सामने बड़े मंच पर उठता है, तब
00:59मिलती है एक ऐसी ललकार जो पुर्यानी सूपर पावर्स की नीन ने उड़ा देती है, हाल ही में न्यू डेली
01:06में चल रहे ब्रिक सम्मिट के दौरान कु�
01:18सवाल खड़ा कर दिया है, जो पूरे ग्लोबल पॉलिटिक्स की दिशा बदलने की ताकत रखता है, मोदी जी ने साफ
01:25कह दिया है कि 21st century की problems को आप 20th century के पुराने टाइप राइटर्स पर solve नहीं कर
01:32सकते हैं, अब सवाल ये है कि आखिर ये नया reform क्या है, जिसके लिए भार
01:48इसे की गहराई में उतरते हैं और देखते हैं कि परदे के पीछे आखिर चल क्या रहा है, दुनिया बदल
01:53चुकी है दर्शको, 1945 में जब दूसरा विश्वयुद्ध खतम हुआ था, तब United Nations Security Council यानी UNSC बनाया गया
02:02था, उस वक्त के हालात अलग थे, कुछ बड़े देशों �
02:05ने मिलकर दुनिया की कमान अपने हाथ में ले रखी थी, लेकिन आज साल 2026 आच चुका है, आज की
02:12तारीक में ना तो वो पुरानी एकॉनमी बाकी है और ना ही वो पुराने पावर एकुशन्स रहे हैं, फिर भी
02:18UN Security Council के Permanent Members, जिनने P5 कहा जाता है, वही पुराने पाच दे
02:25और बाकी पूरी दुनिया सिरफ तमाशा देखती है या उनके फैसलों पर थपा लगाती है। जब PM Modi ने ब्रिक्स
02:32के मंच पर और UN Chief Gutteris के साथ बैठक में इस मुद्दे को उठाया, तो उनने इसी सद्यों पुरानी
02:39पाखंट पर चोट की। उनका साफ कहना था कि जब तक Global
02:42institutions में contemporary realities, यानि आज के वक्त की सचाई को जगा नहीं दी जाएगी, तब तक ना तो इन
02:50संस्थानों की कोई credibility बचेगी और ना ही ये दुनिया के नए संकटों से निपट पाएगी। सोचो, आज Cyber Security
02:58हो, Artificial Intelligence हो या फिर Climate Change हो, West Asia और Ukraine जैसे गंभीर conflicts की भी अगर बात
03:05हो, तो ये
03:05पुरानी global bodies हर जगा फेल हो चुकी है, इनके पास ना कोई power है और ना ही ऐसी representativeness
03:13जो जमाने के साथ चल सके, और यहीं पर शुरू होता है सबसे बड़ी लड़ाई, Global South के हक की
03:20लड़ाई, अब तक क्या होता था कि बड़े देशों ने विकसित देशों के नाम पर बाकी दुन
03:34लेकिन अब भारत ने इस चुपी को तोड़ दिया है, ब्रिक्स के जरिये भारत ने पूरी दुनिया को यह दिखा
03:40दिया है कि अब Global South चुप बैठने वाला नहीं है, जब New Delhi में पूतिन और जी जिंग पिंग
03:46जैसे निताओं की मौजूदगी में यह चर्चा हुई, तो इस
03:49का मेसेज बिलकुल साफ था, यह सिरफ एक बैठक नहीं, बलकि एक नए मल्टी पोलर वोल्ड ओर्डर की नीव है,
03:55मल्टी पोलर का मतलब साफ है एक ऐसी दुनिया जहां पावर किसी एक या दो वेस्टन कापिटल्स के हाथ में
04:01सिमट करना रह जाए, वाशिंग्टन और लं
04:17प्रेजेंटेशन नहीं मिलता, तब तक यह संस्था एक ऐसी मुबाइल फोन की तरह है, जिसमें सिम कार्ट तो है, लेकिन
04:22नेट्वर्क ही नहीं आता, और बिना नेट्वर्क के फोन वो किसी काम का है नहीं, ठीक वैसे ही बिना ग्लोबल
04:28साउथ के रेप्रेजेंटेशन के,
04:29UN आज भी एक बेअसर संस्था बन कर रहे गई है, सवाल ये पैदा होता है कि इस रुफॉर्म के
04:36रास्ते में सबसे बड़ी रुकावट कौन है, रुकावट वही पुराने देशों का गत जोड है, जो अपनी कुर्सी छोड़ना नहीं
04:43चाहता, वीटो पावर के मजे लेने �
04:45वाले ये देश नहीं चाहते कि कोई नया पावर सेंटर उभर कर उनके बराबर खड़ा हो जाए, आना कि जब
04:51भारत जैसा देश लगातार अपनी एकॉनमिक ग्रोथ, अपनी डिजिटल पबलिक इंफराश्रक्चर की ताकत और अपनी इंडिपेंडन्ट फॉरन पॉलिसी क
05:00दमपर दुनिया के सामने एक मिसाल पेश करते हैं, तो इनके लिए इन मांगों का इग्नोर करना ना मुनकिन होता
05:05जा रहा है। इस बार ब्रिक सम्मिट में जो सबसे बड़ा बदलाब देखने को मिला है वो ये है कि
05:10अब ये मंच सिरफ आप सी व्यापार वाया करंसी का नह
05:37और यही वो सचाई है जो पीम मोदी ने दुनिया के सामने रखी है। उनका ये कहना है कि आप
05:4321st century का software 20th century के टाइप राइटर पर नहीं चला सकते। अपने आप में एक बहुत बड़ा व्यंग
05:50है और उन लोगों पर जो आज भी पुराने डर और पुरानी राजनीती से नि
05:57आज जब artificial intelligence और rapid technology हर अफ़ते दुनिया को बदल रही है तो क्या हमारी global bodies इतनी
06:04सुस्त रह रही हैं कि उनका एक फैसला चायद दुनिया को बदलने पर इसमें दशा को लग जाएंगे। पर जवाब
06:11पिलकुल नहीं है। इसले न्यू दिल्ली से उठी ये अवाज को याम ब
06:27करेगा कि क्या United Nations वक्त के साथ खुद को बदलता है या फिर उन्हें पीछे छोड़ कर आगे निकल
06:33जाता है। पूरे मामले पर जो भी आपकी राय है हमें comment section में ज़रूर बताइएगा। अब देख रहे हैं
06:38One India मैं हूँ अकुर्श कौशिक।
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