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Amid the BRICS Summit 2026, Iranian President Masoud Pezeshkian has put forward a major proposal concerning the global financial system. Speaking at the BRICS Business Forum, Pezeshkian called for greater use of national currencies in trade among member countries and urged the creation of stronger payment and settlement systems. He said that the existing financial system’s dependence on a few major currencies makes countries vulnerable to political and economic pressure. Pezeshkian stressed the need to transform BRICS’ economic strength into practical networks for trade, investment and joint financing. He also suggested making the New Development Bank a key source of financing for infrastructure and energy projects. This could include financing in local currencies, dedicated credit lines and guarantees to attract private investment. With Prime Minister Narendra Modi and Russian President Vladimir Putin present, Iran’s proposal is being viewed as a potential challenge to the dollar-dominated global financial system.


BRICS Summit 2026 के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने वैश्विक वित्तीय व्यवस्था को लेकर बड़ा प्रस्ताव रखा है। ब्रिक्स बिजनेस फोरम में पेजेश्कियान ने सदस्य देशों के बीच व्यापार में राष्ट्रीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ाने और इसके लिए मजबूत भुगतान एवं निपटान सिस्टम तैयार करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा वित्तीय व्यवस्था कुछ चुनिंदा मुद्राओं पर निर्भर है, जिससे देश राजनीतिक और आर्थिक दबावों के प्रति संवेदनशील हो जाते हैं। पेजेश्कियान ने BRICS की ताकत को व्यापार, निवेश और संयुक्त वित्तपोषण के नेटवर्क में बदलने की जरूरत बताई। साथ ही उन्होंने न्यू डेवलपमेंट बैंक को इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा परियोजनाओं की फाइनेंसिंग का प्रमुख माध्यम बनाने का सुझाव दिया। इसमें स्थानीय मुद्राओं में फाइनेंसिंग, विशेष क्रेडिट लाइन और निजी निवेश आकर्षित करने के लिए गारंटी जैसे विकल्प शामिल हैं। पीएम मोदी और पुतिन की मौजूदगी के बीच ईरान का यह प्रस्ताव डॉलर आधारित व्यवस्था के लिए नई चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।


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00:00भारत में आज शुरू होने वाला है ब्रिक सम्मिट और ये चर्चा में है ना की जस भारत में बट
00:08पूरी दुनिया में क्योंकि इस पर सबसे ज़्यादा जो नजर बना के रखे हुए होंगे इस दुनिया में सबसे ज़्यादा
00:16जो गंभीरता से नजर बना के रखे हुए हों
00:22और डॉनल्ड ट्रम्प ने जिस प्रकार से अभी पुरे दुनिया को परिशान किया है, वो इसके बाद क्या एक्षन लेंगे,
00:29रशिया क्या करने वाला है, चाइना क्या क्या करने वाला है, इरान के प्रेसिडेंट भारत में है, जो एक बहुत
00:35बड़ी खबर है, कली हमने आप
00:51ज्यादा interesting है क्योंकि जब ये war शुरू हुई थी तब भारत के PM इसराइल में थे एक दिन पहले
00:59और उन्होंने बोला था कि
01:01इसराइल हमारा fatherland है और आज iradian president यहां है तो भारत ने क्या सच में अपना side चुन लिया
01:09है
01:10क्या भारत कभी जुर्रत करेगा कि वो इरान से दुबारा तेल ले बहुत सारी ऐसी चीज़े हैं जिसको हम समझाना
01:17चाहते हैं
01:18हम आपको अपने guests से introduce कराएंगे पहले हमाए साथ है अर्विन तेजावत साब जो हमाए साथ regularly जुड़ते रहते
01:25हैं
01:26विदेशी माम लोग को समझाते रहते हैं काफी बार ये भी कहते हैं कि भाई बहुत ज़्यादा criticism मैं नहीं
01:33करूँगा सरकार का
01:34या मैं बहुत directly नहीं वोलूगा लेकिन फिर भी सचाई उनके मुह से निकलती रहती है और वो हमें बताते
01:39रहते हैं कि भारत का real picture क्या है
01:41और साथ में हमारे साथ जुड़रे wing commander आलोक साहे साब
01:45he is a defense expert and he is a veteran
01:48तो अब हम समझेंगे दोनों माम लोगों कि
01:51जो इसका business deals होने वाली है जो लगता है कि हमें होने वाली है
01:56हम बहुत सुनते आए हैं कि भारत ने Britain के साथ काफी बड़ी deal की थी
02:00US के साथ बहुत बड़ी deal की भारत US से तेल भी लेना चाहता था
02:05चलिए शुरुआत करते हैं अर्विन तेजावत साब से
02:07अर्विन तेजाव साब बहुत कुछ ट्रंप ने बोला है आज तक भारत को
02:12जब से इरान US वार शुरू हुआ उन्होंने धमकियां भी दी
02:15ब्रिक सम्मिट शुरू होने के जस्ट पहले जेडी वांस की धमकी आती है
02:20डारेक्ट नहीं थी भारत को लेकिन उन्होंने बोला था इरान जिससे भी वैपार करेगा
02:25उसको हम टार्गेट करेंगे यानि कि और ज्यादा सैंक्शन्स तो भारत कोई मजबूत कदम ले पाएगा
02:32कि ब्रिक सम्मिट जो 2001 से चदी आ रही है उससे कुछ और निकल के नहीं आने वाला
02:39जी इतजाद साब
02:40नगें साहब क्या कहें आपने तो शुरात से ही कहा है कि सरकार को क्रिटिसाइज करना वाकरी काफी मुश्किल काम
02:47होता है
02:58पर फिरली सच की अपनी ताकत होती है तो उसे बोलना चाहिए भारत
03:11पर क्या आपको लगता है कि भारत करेगा
03:17लेकिन एक स्टेटमेंट जो PM मोदी ने दिया था उन्होंने बोला था कि अब हम वैपार बढ़ाएंगे और उसके बाद
03:29ही जेडी वांस का स्टेटमेंट आये था तो जब वो स्टेटमेंट दिया उसकी तो वैल्यू हम करेंगे
03:37मतलब मीडिया तो बोलेगा कि हाँ चलिए भारत इरान के साथ कोई ना कोई बिजनस करेगा या अपना वैपार बढ़ाएगा
03:42चाबार अफकोस वो पूरा कंस्ट्रक्शन रुका हुआ है वो अब कब होगा हमें पता नहीं जी प्लीज कंटिनू बिल्कुल नगिन
03:51साहब यह स्
03:57हैं कि पूर्ट निती को अक्स्र यह समझ लियाँ कि अगर आपके सर में दर्ध है तो बताएज जाता है
04:03कि पैट में
04:05तो हगीकत ये हैं कि क्या हुता है वो एक अलग बात है वासरिक ता ये घा की
04:20उसके भी अल्टिनेटिस ढूंड रहा है क्योंकि भारत को ये भ्रह्म था कि वह अमेरिका जैसे किसी देश के साथ
04:26अच्छे संबन बना के ना केवल तक्निकी का अस्तातरण करवा सकता है वरंद दुनिया में जो नहीं जो यूनि पोलर
04:36वर्ल्ड सिस्टम होगा उसमें एक मज
04:50जा रहे हैं और अगर बदले में कुछ मिला है तो साफ साफ कहना चाहिए दोखा हलाकि बहुत सारे लोग
04:57ये कहने में संकोज करते हैं पर दोखा हमेशा युद्धों में नहीं होता है दोखा हमेशा ये नहीं होता है
05:04कि एक बार चीनी रास्पतियां मिलने आए मडरास ये च
05:20मेशा लल्चा कर कोहुनी पे गोड़ चिपका कर कहा जाता है कि आप खाइए खाइए और आपको पता है कि
05:25वह गोड़ आप कभी खा नहीं पाएंगे तो वही भारत और अमेलिका के रिस्तों में हैं चले साल तक मेहनत
05:32की कहिए दो दशक्तर
05:34कर अपको पता है एंढगे टॉप्स्काइए टॉट ट्या कर दग्सेशर है नहीं प्छाइए नहीं पूर। लखा झालोव बादी से खाइए
05:42आपको पार्भा कार फॉस्तों की करेशब को एंगे लिए हुड़ कर आपको अजान नहीं पार आपको लेख थाइए एक बालोव
05:46
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